अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) में छात्रसंघ बहाली और चुनाव कराने की मांग को लेकर पिछले 16 दिनों से चल रहा आंदोलन मंगलवार देर रात अचानक तेज हो गया। डक पॉइंट पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेता यासिर फहद की तबीयत लगातार बिगड़ने के बाद रात करीब एक बजे प्रॉक्टर टीम और जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज की मेडिकल टीम धरना स्थल पर पहुंची। टीम का उद्देश्य यासिर को मेडिकल कॉलेज ले जाकर उनका इलाज और चिकित्सकीय निगरानी कराना था, लेकिन यासिर ने धरना स्थल छोड़ने से इनकार कर दिया। छात्रों ने भी उन्हें वहां से ले जाने की कोशिश का विरोध किया। कुछ ही देर में बड़ी संख्या में छात्र डक पॉइंट पर पहुंचने लगे और देर रात तक कैंपस में आंदोलन का माहौल और ज्यादा गरमा गया।
बताया गया कि यासिर फहद छात्रसंघ बहाली की मांग को लेकर 21 सितंबर से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। आंदोलन के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ने की खबर पहले भी सामने आती रही है। छह अक्टूबर को भी रिपोर्टों में उनकी हालत बिगड़ने के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से छात्रों से बातचीत के जरिए गतिरोध खत्म करने की कोशिशों का जिक्र किया गया था। लेकिन चुनाव की तारीख और छात्रसंघ की बहाली को लेकर छात्रों और प्रशासन के बीच सहमति नहीं बन सकी। इसी बीच मंगलवार रात मेडिकल टीम के धरना स्थल पर पहुंचने के बाद विवाद और बढ़ गया।
मेडिकल टीम और प्रॉक्टोरियल टीम के पहुंचने की जानकारी मिलते ही धरना स्थल पर मौजूद छात्रों ने यासिर को कहीं ले जाने का विरोध शुरू कर दिया। छात्रों का कहना था कि यासिर अपनी मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रखना चाहते हैं और उन्हें जबरन धरना स्थल से नहीं हटाया जाना चाहिए। दूसरी ओर, प्रशासन की ओर से उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए चिकित्सकीय देखभाल जरूरी मानी जा रही थी। इसी बात को लेकर देर रात डक पॉइंट पर छात्रों और विश्वविद्यालय की टीम के बीच तनाव की स्थिति बन गई।
विरोध बढ़ने के बाद प्रॉक्टोरियल टीम वापस लौट गई, लेकिन तब तक पूरे कैंपस में यह सूचना फैल चुकी थी कि यासिर को मेडिकल कॉलेज ले जाने की कोशिश की गई है। इसके बाद अलग-अलग हॉस्टलों से छात्र डक पॉइंट की तरफ पहुंचने लगे। रिपोर्ट के मुताबिक, रात करीब दो बजे तक वहां बड़ी संख्या में छात्र जमा हो गए। छात्रों ने छात्रसंघ बहाली की मांग को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी। आंदोलनकारियों का कहना था कि कई दिनों से भूख हड़ताल और धरना चलने के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से उनकी मुख्य मांग पर स्पष्ट फैसला नहीं लिया गया है।
डक पॉइंट पर छात्रों की संख्या बढ़ने के साथ ही प्रदर्शन का स्वर भी तेज होता गया। छात्र छात्रसंघ चुनाव की तारीख घोषित करने, चुनाव प्रक्रिया शुरू करने और यासिर फहद से जुड़े निलंबन को वापस लेने जैसी मांगें उठा रहे हैं। आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय में निर्वाचित छात्रसंघ नहीं होने के कारण छात्रों के पास अपनी समस्याओं को संस्थागत तरीके से उठाने के लिए प्रतिनिधित्व का मंच नहीं है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक एएमयू छात्रसंघ का अंतिम चुनाव 2018-19 शैक्षणिक सत्र में हुआ था और उसके बाद नियमित निर्वाचित छात्रसंघ नहीं रहा।
छात्रों की मांग केवल चुनाव की तारीख घोषित करने तक सीमित नहीं है। आंदोलन के दौरान छात्रों की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति, चुनाव कार्यक्रम जारी करने और छात्रसंघ चुनाव की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की गई है। साथ ही कुछ छात्र यासिर फहद के निलंबन को वापस लेने और आंदोलन से जुड़े मामलों में कार्रवाई रोकने की भी मांग उठा रहे हैं। छात्रों का कहना है कि छात्रसंघ की बहाली से विश्वविद्यालय में छात्रों की समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाने का औपचारिक माध्यम फिर से उपलब्ध होगा।
इस पूरे आंदोलन की शुरुआत सितंबर में छात्रसंघ बहाली की मांग से हुई थी। इसके बाद यासिर फहद ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की। छात्रों के मुताबिक उन्होंने प्रशासन को ज्ञापन देकर चुनाव कराने की मांग की थी। उनका कहना था कि यदि चुनाव की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई तो आंदोलन तेज किया जाएगा। दूसरी ओर, विश्वविद्यालय प्रशासन ने यासिर के निलंबन को छात्र अनुशासन से जुड़े आरोपों से जोड़ा है। विश्वविद्यालय का पक्ष है कि यासिर के खिलाफ परिसर में प्रदर्शन और कथित अनुशासनहीनता से संबंधित कार्रवाई की गई थी। यासिर और उनके समर्थक इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे आंदोलन से जोड़कर देख रहे हैं।
यासिर फहद के निलंबन को लेकर भी दोनों पक्षों के दावे अलग हैं। यासिर का कहना है कि उन्हें छात्रसंघ बहाली की मांग उठाने के बाद निशाना बनाया गया, जबकि विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनके खिलाफ कार्रवाई को कथित नियम उल्लंघन से जोड़ा है। विश्वविद्यालय की ओर से पहले यह भी कहा गया था कि उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया था। इस विवाद के बीच यासिर ने भूख हड़ताल जारी रखी और छात्रों ने उनके समर्थन में आंदोलन तेज किया।
इस आंदोलन के दौरान महिला छात्राओं की भागीदारी भी बढ़ी है। इससे पहले अब्दुल्ला कॉलेज की छात्राएं डक पॉइंट पर पहुंचकर आंदोलन के समर्थन में प्रदर्शन कर चुकी हैं। अब मंगलवार देर रात मेडिकल टीम के पहुंचने के बाद अब्दुल्ला कॉलेज का गेट भी विरोध का दूसरा बड़ा केंद्र बन गया। रिपोर्ट के मुताबिक, आईजी हॉल की छात्राएं हॉस्टल गेट के पास एकत्र हुईं और छात्रसंघ बहाली के समर्थन में नारेबाजी की। छात्राओं की ओर से गेट पर विरोध जताया गया और गेट खोलने का प्रयास भी किया गया।
इस तरह देर रात एएमयू कैंपस में एक साथ दो प्रमुख प्रदर्शन स्थल बन गए। डक पॉइंट पर बड़ी संख्या में छात्र यासिर फहद के समर्थन और छात्रसंघ बहाली की मांग को लेकर जमा थे, जबकि अब्दुल्ला कॉलेज गेट पर छात्राएं आंदोलन कर रही थीं। दोनों स्थानों पर नारेबाजी और प्रदर्शन के कारण कैंपस का माहौल तनावपूर्ण बना रहा। सुरक्षा को देखते हुए विश्वविद्यालय की प्रॉक्टोरियल टीम और सुरक्षा कर्मियों की मौजूदगी बढ़ाई गई, जबकि कैंपस के बाहर पुलिस भी निगरानी करती रही।
छात्रों का कहना है कि आंदोलन को दबाने के बजाय विश्वविद्यालय प्रशासन को बातचीत के जरिए रास्ता निकालना चाहिए। उनका तर्क है कि लंबे समय से छात्रसंघ चुनाव नहीं होने के कारण छात्रों के बीच असंतोष बढ़ रहा है। छात्रों के मुताबिक, यदि प्रशासन चुनाव प्रक्रिया और तारीख को लेकर स्पष्ट घोषणा कर देता है तो आंदोलन समाप्त करने की दिशा में रास्ता निकल सकता है। वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से स्वास्थ्य संबंधी स्थिति को देखते हुए यासिर को चिकित्सकीय देखभाल उपलब्ध कराने की कोशिश की गई है।
यासिर फहद ने मंगलवार रात एक वीडियो संदेश के जरिए भी छात्रों से बड़ी संख्या में धरना स्थल पर पहुंचने की अपील की थी। उन्होंने प्रशासन पर उन्हें धरना स्थल से हटाने की तैयारी का आरोप लगाया और आशंका जताई कि छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग किया जा सकता है। यह उनके द्वारा लगाया गया आरोप है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं हुई है। दूसरी ओर, मेडिकल टीम के पहुंचने की वजह के रूप में उनकी बिगड़ती तबीयत और चिकित्सकीय जरूरत को बताया गया है।
एएमयू में यह आंदोलन अब केवल एक छात्र की भूख हड़ताल तक सीमित नहीं रह गया है। पिछले दिनों इसमें अलग-अलग संकायों के छात्र शामिल हुए हैं। छात्राओं ने भी समर्थन जताया है और पूर्व छात्रसंघ पदाधिकारियों ने आंदोलन की मांगों के समर्थन में अपनी बात रखी है। रिपोर्टों के अनुसार छात्र संगठनों और कुछ बाहरी जनप्रतिनिधियों की ओर से भी आंदोलन के समर्थन में बयान सामने आए हैं। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन और आंदोलनकारी छात्रों के बीच मूल मांगों को लेकर गतिरोध अभी बना हुआ है।
इससे पहले आंदोलन के दौरान मौलाना आजाद लाइब्रेरी के बाहर भी छात्रों ने प्रदर्शन किया था। कुछ समय के लिए लाइब्रेरी का प्रवेश प्रभावित हुआ, हालांकि बाद में उसे खोल दिया गया। इससे साफ है कि छात्र आंदोलन अलग-अलग तरीकों से प्रशासन तक अपनी मांग पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। दूसरी तरफ विश्वविद्यालय प्रशासन परिसर की सामान्य गतिविधियों और सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखने पर जोर दे रहा है।
एएमयू में छात्रसंघ की बहाली का मुद्दा नया नहीं है। छात्रों का कहना है कि 2018-19 के बाद चुनाव नहीं होने से कई बैच ऐसे हैं जिन्होंने विश्वविद्यालय में निर्वाचित छात्र प्रतिनिधियों के साथ काम करने या उन्हें चुनने का अवसर ही नहीं देखा। आंदोलन में शामिल छात्रों का कहना है कि छात्रसंघ केवल चुनाव या पदों का विषय नहीं है, बल्कि हॉस्टल, शिक्षा, छात्र सुविधाओं और प्रशासन के साथ संवाद जैसे मुद्दों को उठाने का मंच भी है। हालांकि विश्वविद्यालय में छात्रसंघ की वर्तमान स्थिति और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े प्रशासनिक पक्ष पर अंतिम निर्णय विश्वविद्यालय स्तर पर होना है।
मंगलवार देर रात की घटना ने आंदोलन को एक और संवेदनशील मोड़ पर पहुंचा दिया है। एक तरफ 16 दिन से भूख हड़ताल कर रहे यासिर की स्वास्थ्य स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है, वहीं दूसरी तरफ उन्हें मेडिकल कॉलेज ले जाने की कोशिश के विरोध में छात्रों का जुटना प्रशासन के लिए भी चुनौती बन गया है। यदि बातचीत के जरिए समाधान नहीं निकलता है तो आंदोलन के और बढ़ने की आशंका बनी हुई है।
फिलहाल डक पॉइंट और अब्दुल्ला कॉलेज गेट पर हुए देर रात के प्रदर्शन के बाद विश्वविद्यालय परिसर में सुरक्षा और निगरानी बढ़ा दी गई है। छात्रों की मुख्य मांग छात्रसंघ चुनाव की बहाली और चुनाव की स्पष्ट समय-सारिणी को लेकर है, जबकि प्रशासन की प्राथमिकता यासिर के स्वास्थ्य और कैंपस में व्यवस्था बनाए रखने की दिखाई दे रही है। दोनों पक्षों के बीच संवाद से ही आगे का रास्ता निकलने की संभावना है। छह अक्टूबर की रिपोर्टों में भी प्रशासन की ओर से छात्रों से बातचीत के जरिए गतिरोध खत्म करने की कोशिशों का उल्लेख किया गया था।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रसंघ चुनाव को लेकर कोई ठोस घोषणा करता है या नहीं और यासिर फहद की भूख हड़ताल को लेकर क्या चिकित्सकीय तथा प्रशासनिक कदम उठाए जाते हैं। फिलहाल आंदोलन 16वें दिन में पहुंच चुका है और आधी रात के घटनाक्रम के बाद कैंपस में छात्र-प्रशासन के बीच तनाव और बढ़ गया है।











