नोएडा में साइबर ठगी का एक और बड़ा मामला सामने आया है, जहां शेयर बाजार में निवेश कर कम समय में मोटा मुनाफा कमाने का लालच देकर 56 वर्षीय महिला से करीब एक करोड़ रुपये ठग लिए गए। साइबर जालसाजों ने महिला से संपर्क करने के लिए फेसबुक का इस्तेमाल किया और बातचीत के दौरान उन्हें शेयर बाजार में निवेश के जरिए अच्छा रिटर्न मिलने का भरोसा दिलाया। महिला को जब भरोसा हो गया तो आरोपियों ने अलग-अलग मोबाइल नंबरों से उनसे संपर्क करना शुरू किया और शेयर खरीदने तथा निवेश के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कराई। 25 अगस्त से 29 सितंबर 2026 के बीच महिला ने आरोपियों के बताए खातों में करीब एक करोड़ रुपये भेज दिए। बाद में जब निवेश की रकम और कथित मुनाफा निकालने में परेशानी हुई तो उन्हें साइबर ठगी का शक हुआ। इसके बाद उन्होंने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पीड़िता नोएडा के सेक्टर-41 की रहने वाली बताई जा रही हैं। उनकी शिकायत के मुताबिक, 25 अगस्त को फेसबुक के माध्यम से कुछ लोगों ने उनसे संपर्क किया था। बातचीत के दौरान आरोपियों ने खुद को शेयर बाजार और निवेश से जुड़ी जानकारी रखने वाला बताया। महिला को बताया गया कि शेयर बाजार में कुछ चुनिंदा कंपनियों में पैसा लगाकर कम समय में अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। बातचीत धीरे-धीरे आगे बढ़ी और जालसाजों ने निवेश के फायदे समझाकर महिला को पैसे लगाने के लिए तैयार कर लिया।
साइबर ठगों की इस पूरी रणनीति में सबसे अहम भूमिका भरोसा कायम करने की थी। शुरुआत में आरोपियों ने महिला से सीधे बहुत बड़ी रकम नहीं मांगी। पहले शेयर बाजार में निवेश और उससे होने वाले संभावित लाभ की बातें की गईं। इसके बाद उन्हें अलग-अलग खातों की जानकारी देकर वहां रकम जमा करने को कहा गया। महिला ने आरोपियों की बातों पर विश्वास करते हुए बताए गए बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे ट्रांसफर की जाने वाली रकम बढ़ती गई और करीब 34 दिनों के भीतर कुल रकम लगभग एक करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
पुलिस के मुताबिक, 25 अगस्त से 29 सितंबर के बीच महिला ने कई किस्तों में पैसे अलग-अलग बैंक खातों में भेजे। आरोपियों की ओर से हर बार निवेश पर बेहतर रिटर्न मिलने की बात कही जाती रही। महिला को यह भरोसा दिलाया जाता रहा कि शेयर बाजार में लगाए गए पैसे बढ़ रहे हैं और आगे चलकर उन्हें बड़ी रकम वापस मिलेगी। इस तरह लगातार बातचीत के जरिए उनका भरोसा बनाए रखा गया और वह अलग-अलग खातों में पैसे भेजती रहीं।
ऐसे मामलों में साइबर ठग अक्सर पीड़ित को एक ऐसे डिजिटल प्लेटफॉर्म या पोर्टल की जानकारी देते हैं, जहां निवेश की रकम के साथ कथित मुनाफा बढ़ता हुआ दिखाई देता है। इस मामले में भी महिला को निवेश से जुड़े लाभ का भरोसा दिलाया गया। एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, जालसाजों ने महिला को एक पोर्टल का लिंक भी दिया था, जहां जमा रकम और मुनाफा बढ़ता हुआ दिखाई देता था। इससे उन्हें लगा कि उनका निवेश वास्तव में बढ़ रहा है। हालांकि, जब उन्होंने इस रकम को निकालने की कोशिश की तो मामला बदल गया।
महिला ने जब अपनी जमा रकम और कथित मुनाफे को वापस निकालने की कोशिश की तो आरोपियों की ओर से अलग-अलग तरह की दिक्कतें बताई जाने लगीं। उन्हें रकम निकालने में परेशानी होने लगी और अतिरिक्त पैसे जमा करने की बात कही गई। लगातार नई मांग और रकम वापस नहीं मिलने के बाद महिला को शक हुआ कि कहीं वह किसी साइबर ठगी का शिकार तो नहीं हो गई हैं। इसके बाद उन्होंने पूरे मामले की जानकारी जुटाई और पुलिस से संपर्क किया।
ठगी का अहसास होने के बाद पीड़िता ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद मामला नोएडा के साइबर क्राइम थाने तक पहुंचा। पुलिस ने महिला की शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि करीब एक करोड़ रुपये किन-किन बैंक खातों में गए, इन खातों के वास्तविक धारक कौन हैं और रकम ट्रांसफर होने के बाद उसे आगे कहां भेजा गया।
डीसीपी साइबर क्राइम प्रीति यादव के मुताबिक, पुलिस ठगी में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों और बैंक खातों की जानकारी जुटा रही है। जांच में डिजिटल संपर्क के माध्यमों को भी खंगाला जा रहा है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि फेसबुक पर महिला से संपर्क करने वाले लोग कौन थे और उन्होंने किस नेटवर्क के जरिए पीड़िता को अपने जाल में फंसाया। इसके अलावा जिन बैंक खातों में रकम पहुंची है, उनके लेनदेन की पूरी जानकारी भी जुटाई जा रही है।
जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि महिला से रकम एक ही खाते में क्यों नहीं बल्कि अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कराई गई। साइबर अपराध के मामलों में जालसाज अक्सर अलग-अलग खातों का इस्तेमाल करते हैं, जिससे रकम को एक खाते से दूसरे खाते में भेजकर उसकी वास्तविक दिशा का पता लगाना मुश्किल हो सके। पुलिस इस मामले में भी सभी खातों के बीच हुए लेनदेन को जोड़कर पूरे नेटवर्क तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश करेगी कि फेसबुक के जरिए बनाए गए संपर्क के बाद महिला से किन-किन मोबाइल नंबरों पर बातचीत हुई। यदि आरोपियों ने कॉल, मैसेज या किसी अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया है तो उनकी तकनीकी जांच की जाएगी। मोबाइल नंबरों की लोकेशन, सिम से जुड़ी जानकारी और बैंक खातों के दस्तावेज जांच में अहम साबित हो सकते हैं। हालांकि, जांच पूरी होने से पहले आरोपियों की पहचान और उनकी भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि शेयर बाजार में निवेश के नाम पर साइबर ठगी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। जालसाज पहले पीड़ित को सोशल मीडिया या मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए संपर्क करते हैं। इसके बाद निवेश की जानकारी देने, मुनाफे के स्क्रीनशॉट दिखाने या किसी डिजिटल पोर्टल पर बढ़ी हुई रकम दिखाने के जरिए भरोसा कायम किया जाता है। जब पीड़ित बड़ी रकम निवेश कर देता है तो रकम निकालने के समय टैक्स, प्रोसेसिंग फीस या अन्य शुल्क के नाम पर अतिरिक्त पैसा मांगने का तरीका अपनाया जाता है।
नोएडा में इससे पहले भी शेयर बाजार और ऑनलाइन निवेश के नाम पर बड़ी रकम की साइबर ठगी के मामले सामने आ चुके हैं। अगस्त 2026 में सेक्टर-49 के एक कारोबारी से स्टॉक मार्केट में अधिक मुनाफे का झांसा देकर 1.13 करोड़ रुपये की कथित ठगी का मामला सामने आया था। उसमें भी अलग-अलग खातों में रकम ट्रांसफर कराई गई और निवेश की रकम निकालने के प्रयास के बाद अतिरिक्त पैसा जमा करने को कहा गया था।
अक्टूबर की शुरुआत में भी नोएडा में एक 82 वर्षीय व्यक्ति से ऑनलाइन निवेश में मुनाफे का लालच देकर 50.42 लाख रुपये की ठगी का मामला दर्ज हुआ था। उस मामले में भी सोशल मीडिया के जरिए संपर्क करने के बाद अलग-अलग बैंक खातों में रकम जमा कराई गई और रकम वापस निकालने के समय टैक्स तथा अन्य शुल्क के नाम पर अतिरिक्त पैसे मांगे गए। पुलिस ने बैंक खातों और मोबाइल नंबरों की जांच शुरू की थी।
नोएडा पुलिस की जांच अब इस मामले में पैसे की पूरी ट्रेल का पता लगाने पर केंद्रित है। करीब एक करोड़ रुपये की रकम एक महीने से कुछ अधिक समय में कई खातों में भेजी गई है। ऐसे में जांचकर्ताओं के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि इन खातों का संचालन कौन कर रहा था और रकम आगे किन खातों या माध्यमों में भेजी गई। बैंकिंग रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
साइबर विशेषज्ञों और पुलिस की ओर से लगातार लोगों को सलाह दी जाती है कि सोशल मीडिया पर मिलने वाले निवेश के प्रस्तावों पर बिना सत्यापन के भरोसा न करें। शेयर बाजार में मुनाफे का कोई निश्चित आश्वासन नहीं होता। अगर कोई व्यक्ति या ऑनलाइन ग्रुप बहुत कम समय में बहुत अधिक या गारंटीड रिटर्न का दावा करता है तो अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी है। निवेश करने से पहले संबंधित कंपनी, ब्रोकर, प्लेटफॉर्म और भुगतान के माध्यम की स्वतंत्र रूप से जांच करनी चाहिए।
किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर निजी बैंक खाते में निवेश की रकम भेजना जोखिम भरा हो सकता है। इसी तरह किसी अनजान लिंक से ऐप डाउनलोड करने या अपनी बैंकिंग जानकारी साझा करने से भी बचना चाहिए। ओटीपी, यूपीआई पिन, पासवर्ड और अन्य गोपनीय बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करनी चाहिए। यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर फ्रॉड हो जाता है तो उसे देरी किए बिना बैंक को सूचना देने के साथ साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करनी चाहिए।
फिलहाल नोएडा साइबर क्राइम पुलिस ने मामले को जांच में लिया है। महिला से संपर्क करने वाले लोगों, इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और करीब एक करोड़ रुपये के लेनदेन की जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि फेसबुक से शुरू हुआ यह संपर्क किस साइबर नेटवर्क तक पहुंचता है और रकम को अलग-अलग खातों में भेजने के पीछे कौन लोग शामिल हैं। जांच पूरी होने के बाद ही इस ठगी में शामिल आरोपियों और पूरे नेटवर्क की तस्वीर साफ हो सकेगी।











