उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में गोमती नदी के बढ़ते जलस्तर ने हालात बेहद गंभीर कर दिए हैं। शहर के कई निचले इलाकों में बाढ़ का पानी घरों और गलियों तक पहुंच गया है। फैजुल्लागंज, मल्लाही टोला, इटौंजा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसी बीच इटौंजा क्षेत्र के लासा गांव में मंगलवार सुबह बाढ़ के पानी से होकर गुजर रहे युवकों के साथ बड़ा हादसा हो गया। पानी में डूबने से 18 वर्षीय विमल की मौत हो गई, जबकि उसके साथ मौजूद अन्य युवकों को ग्रामीणों की मदद से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। कई घंटे चले बचाव अभियान के बाद विमल का शव बरामद किया गया।
लासा गांव में बाढ़ के कारण सड़कें पानी में डूबी हुई हैं। मंगलवार सुबह करीब साढ़े सात बजे कुछ युवक इटौंजा-माल रोड की तरफ जा रहे थे। ग्रामीणों के अनुसार, गांव में नाव की पर्याप्त सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें बाढ़ के पानी से होकर पैदल गुजरना पड़ा। शुरुआत में पानी करीब चार फीट गहरा बताया गया, लेकिन लासा मंदिर के सामने रास्ते से नीचे की ओर गहराई बढ़ गई और वहां पानी करीब पांच फीट तक होने की बात सामने आई। इसी दौरान युवक गहरे पानी की चपेट में आ गए और देखते ही देखते कई लोग डूबने लगे।
हादसे के दौरान युवकों ने एक-दूसरे को पकड़कर बचने की कोशिश की। आसपास मौजूद ग्रामीणों को जब चीख-पुकार सुनाई दी तो वे तत्काल मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों ने अपनी जान जोखिम में डालकर पानी में फंसे युवकों को बाहर निकालने की कोशिश शुरू की। सात लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया, लेकिन विमल गहरे पानी में चला गया। इसके बाद उसकी तलाश के लिए पुलिस और एनडीआरएफ को सूचना दी गई।
एनडीआरएफ की टीम सुबह करीब 8:45 बजे मौके पर पहुंची। पीएसी की एक और एनडीआरएफ की दो नावों की मदद से पानी में तलाश अभियान शुरू किया गया। तेज बहाव और गहरे पानी के कारण बचाव दल को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई घंटे तक तलाशी अभियान चलाने के बाद भी जब विमल का पता नहीं चला तो ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई। आखिरकार ग्रामीणों ने जाल और कांटे की मदद से तलाश शुरू की और करीब साढ़े ग्यारह बजे विमल का शव बरामद कर लिया।
विमल की मौत की खबर गांव पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया। वह कृष्ण कुमार का बेटा था। परिजनों और ग्रामीणों के मुताबिक बाढ़ के कारण गांव में सामान्य आवाजाही पहले से ही प्रभावित थी। नाव की सुविधा नहीं होने की वजह से लोगों को पानी से होकर निकलना पड़ रहा था। इसी मजबूरी में हुआ यह हादसा एक परिवार के लिए जिंदगी भर का दुख छोड़ गया।
इस हादसे को लेकर ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति नाराजगी भी देखने को मिली। ग्रामीणों का कहना था कि जब गांव चारों तरफ से बाढ़ के पानी से घिरा है तो लोगों के आने-जाने के लिए पर्याप्त नावों की व्यवस्था होनी चाहिए थी। हादसे के बाद ग्रामीणों ने राहत और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर विरोध जताया। कुछ समय के लिए इटौंजा-माल रोड पर आवागमन भी प्रभावित हुआ। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर लोगों को समझाया और स्थिति को नियंत्रित किया।
इस हादसे के साथ ही लखनऊ शहर में गोमती नदी का बढ़ता जलस्तर भी चिंता का बड़ा कारण बना हुआ है। फैजुल्लागंज, मल्लाही टोला, मड़ियांव, घैला, दौलतगंज और गोमती नगर विस्तार के कई निचले हिस्से जलभराव से प्रभावित हैं। कई जगह घरों के अंदर पानी पहुंच चुका है। प्रभावित परिवारों को घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने की मजबूरी है। कुछ लोग नावों के सहारे बाहर निकल रहे हैं, जबकि कई परिवार अपने घरों की छतों पर शरण लेने को मजबूर हैं।
फैजुल्लागंज के कई इलाकों में स्थिति इतनी खराब है कि लोगों के सामने भोजन, पीने के पानी और दवाइयों की समस्या खड़ी हो गई है। पानी से घिरी गलियों में दुकानें बंद हैं और रोजमर्रा का सामान जुटाना मुश्किल हो रहा है। कई परिवारों का घरेलू सामान भी पानी में डूब चुका है। रिपोर्टों के अनुसार हजारों परिवार बाढ़ से प्रभावित हैं और बड़ी संख्या में लोग सुरक्षित स्थानों की ओर जा चुके हैं।
बाढ़ का असर बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ा है। जलभराव के कारण कई स्कूलों में बच्चों की आवाजाही प्रभावित हुई है। फैजुल्लागंज इलाके में प्राथमिक विद्यालय समेत कई स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित होने की रिपोर्ट सामने आई है। पानी से घिरी बस्तियों में बच्चों के लिए स्कूल पहुंचना मुश्किल हो गया है और कई जगह स्कूलों में ताले लगे हैं।
लखनऊ की बाढ़ का असर धार्मिक स्थलों तक भी पहुंच गया है। डालीगंज स्थित प्रसिद्ध पातालपुरी लेटे हनुमान मंदिर का गर्भगृह गोमती के पानी में पूरी तरह डूब चुका है। मंदिर प्रशासन के अनुसार गर्भगृह में स्थापित हनुमान प्रतिमा के ऊपर करीब 13 फीट तक पानी पहुंच गया है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और मंदिर की स्थिति को देखते हुए गर्भगृह को दर्शन के लिए बंद कर दिया गया है।
लेटे हनुमान मंदिर में पानी पहुंचना लखनऊ में गोमती के बढ़े जलस्तर की गंभीरता को दर्शाता है। यह क्षेत्र गोमती नदी के किनारे स्थित है और नदी का पानी बढ़ने के साथ आसपास के इलाकों में भी जलस्तर का असर दिखाई दे रहा है। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर रख रहा है। मंदिर में सामान्य दर्शन व्यवस्था बहाल होने के लिए पानी के कम होने का इंतजार करना होगा।
फैजुल्लागंज में बाढ़ का असर केवल सड़कों तक सीमित नहीं है। कई घरों में पानी घुस चुका है और लोगों को अपने सामान को ऊंची जगहों पर रखने की कोशिश करनी पड़ रही है। कुछ परिवारों ने घर छोड़कर किराये के मकानों या सुरक्षित स्थानों पर जाने का फैसला किया है। राहत नावों के जरिए लोगों को निकालने और जरूरी सामान पहुंचाने का काम किया जा रहा है, लेकिन प्रभावित आबादी अधिक होने के कारण हर परिवार तक मदद पहुंचाना चुनौती बना हुआ है।
बाढ़ के पानी के साथ अब स्वास्थ्य संबंधी खतरा भी बढ़ गया है। घरों और गलियों में जमा पानी गंदा होने के कारण संक्रमण का खतरा बना हुआ है। फैजुल्लागंज में लोगों ने पानी में सांप और बिच्छू जैसे जहरीले जीव दिखाई देने की शिकायत भी की है। इसको देखते हुए स्वास्थ्य सेवाओं और राहत शिविरों में जरूरी इंतजाम बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
लखनऊ में मौजूदा बाढ़ की स्थिति को केवल स्थानीय बारिश से जोड़कर नहीं देखा जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार गोमती के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में हुई भारी बारिश के कारण नदी में पानी बढ़ा है। इसका असर धीरे-धीरे नीचे की ओर बढ़ते हुए लखनऊ तक पहुंचा है। यही वजह है कि शहर में हाल के दिनों में भारी बारिश न होने के बावजूद गोमती का जलस्तर बढ़ता रहा और नदी किनारे बसे निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति गंभीर होती गई।
प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान जारी है। नावों के जरिए लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है। अधिकारियों का ध्यान खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और बीमार लोगों को सुरक्षित निकालने पर है। इसके अलावा पीने के पानी, भोजन, स्वास्थ्य सेवाओं और प्रकाश की व्यवस्था को भी प्राथमिकता दी जा रही है।
लासा गांव में विमल की मौत ने बाढ़ के दौरान सुरक्षित आवाजाही की चुनौती को भी सामने ला दिया है। पानी से घिरी सड़क पर पैदल निकलना किस तरह जानलेवा साबित हो सकता है, यह घटना इसका गंभीर उदाहरण है। प्रशासन और ग्रामीणों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि प्रभावित गांवों में लोगों को सुरक्षित आवागमन और राहत उपलब्ध कराई जाए, ताकि पानी में फंसे लोगों को मजबूरी में गहरे या तेज बहाव वाले रास्तों से होकर न गुजरना पड़े।
फिलहाल लखनऊ में बाढ़ का पानी कई इलाकों में जमा है और गोमती का जलस्तर चिंता का विषय बना हुआ है। एक तरफ इटौंजा के लासा गांव में एक युवक की जान चली गई, दूसरी तरफ शहर के निचले इलाकों में हजारों परिवार पानी से जूझ रहे हैं। लेटे हनुमान मंदिर का गर्भगृह 13 फीट पानी में डूब चुका है और कई बस्तियों में घरों के अंदर तक पानी पहुंच गया है। प्रशासन की राहत और बचाव व्यवस्था के बीच लोगों की निगाह अब नदी के जलस्तर में कमी आने और सामान्य स्थिति लौटने पर टिकी है।












