उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में धनबाद में तैनात केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के जवान परमबीर यादव की हत्या का मामला सामने आने के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है। 38 वर्षीय परमबीर यादव का शव रविवार देर रात गीडा थाना क्षेत्र के कालेसर जीरो प्वाइंट के पास बोक्टा-बरवार बांध के किनारे मिला था। शुरुआती तौर पर पुलिस को वह अचेत अवस्था में मिले थे और उन्हें उपचार के लिए बीआरडी मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। बाद में पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उनके सिर पर चोट के निशान मिले, जिसके आधार पर पुलिस ने अब हत्या की जांच आगे बढ़ा दी है। मृतक के पिता दिनेश चंद्र यादव की तहरीर पर गीडा थाने में अज्ञात के खिलाफ हत्या की धारा में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
परमबीर यादव मूल रूप से गोरखपुर के बाघागाड़ा के रहने वाले थे और उनकी तैनाती धनबाद में थी। परिवार के मुताबिक वह छुट्टी लेकर अपने गांव लौट रहे थे। ट्रेन छूट जाने के बाद उन्होंने किराये की गाड़ी से घर आने का फैसला किया था। इसी सफर के दौरान कालेसर क्षेत्र में उनकी मौत हो गई। जिस स्थान पर उनका शव मिला, वह बोक्टा-बरवार बांध के किनारे है। राहगीरों की सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और जवान को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक उनकी हालत गंभीर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनकी जेब से मिले CISF पहचान पत्र के आधार पर पुलिस ने शव की पहचान की और परिवार को घटना की सूचना दी।
परमबीर के घर में जैसे ही उनकी मौत की खबर पहुंची, परिवार में चीख-पुकार मच गई। परिजनों के लिए यह विश्वास करना मुश्किल था कि जो जवान कुछ समय पहले ही घर आने के लिए निकला था, वह अब दुनिया में नहीं रहा। परिवार के लोग तत्काल अस्पताल पहुंचे। वहां शव देखकर पत्नी प्रतिमा यादव और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। परिजनों ने पुलिस से मामले की गहराई से जांच कर घटना के पीछे जिम्मेदार लोगों का पता लगाने और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
परमबीर की पत्नी प्रतिमा यादव ने पुलिस को दी गई जानकारी और परिवार के लोगों से बातचीत में बताया कि रविवार को गांव के लिए निकलने से पहले उनके पति ने फोन किया था। उन्होंने घर आने की जानकारी दी थी। पत्नी ने बताया कि परमबीर अपनी बेटी रिया यादव से भी बात करना चाहते थे, लेकिन उस समय बेटी सो रही थी। यही बात अब परिवार के लिए सबसे भावुक करने वाली याद बन गई है। पति के फोन के बाद पत्नी उनके घर पहुंचने का इंतजार करती रहीं, लेकिन उन्हें यह नहीं पता था कि यह उनकी आखिरी बातचीत होगी।
प्रतिमा के अनुसार, जब काफी समय तक परमबीर की कोई जानकारी नहीं मिली तो उन्होंने लगातार उनके मोबाइल पर फोन करना शुरू किया। उन्होंने करीब 55 बार फोन किया, लेकिन दूसरी तरफ से किसी ने कॉल रिसीव नहीं की। हर बार फोन नहीं उठने के साथ परिवार की चिंता बढ़ती गई। उन्हें उम्मीद थी कि शायद रास्ते में होने के कारण पति फोन नहीं उठा पा रहे हैं, लेकिन देर रात जब एक पुलिसकर्मी ने फोन उठाकर घटना की जानकारी दी तो परिवार के होश उड़ गए। इसके बाद परमबीर के भाई धर्मबीर को घटनास्थल की ओर भेजा गया। वहां पुलिस ने उन्हें बताया कि जवान को मेडिकल कॉलेज भेजा गया है। परिवार अस्पताल पहुंचा तो परमबीर का शव वहां मिला।
परमबीर के पिता दिनेश चंद्र यादव भी CISF में सब इंस्पेक्टर के पद पर तैनात हैं और इस समय पटना एयरपोर्ट पर उनकी ड्यूटी बताई गई है। परिवार के अनुसार, पिछले कुछ समय से उनकी पत्नी यानी परमबीर की मां भी उनके साथ पटना में रह रही थीं। बेटे की मौत की खबर मिलते ही माता-पिता पटना से गोरखपुर पहुंचे। परिवार के बड़े बेटे की अचानक मौत ने सभी को तोड़ दिया। पिता के लिए यह स्थिति और भी कठिन रही क्योंकि वह स्वयं सुरक्षा बल में सेवा दे रहे हैं और जानते हैं कि ड्यूटी से घर लौटते समय किसी जवान के साथ इस तरह की घटना कितनी गंभीर है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मामले ने नया मोड़ लिया है। रिपोर्ट में परमबीर के सिर पर चोट के निशान मिले हैं। पुलिस के अनुसार, इन्हीं चोटों के आधार पर हत्या की जांच को आगे बढ़ाया गया है। अभी हत्या के पीछे का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है और पुलिस इस बात का पता लगाने में जुटी है कि परमबीर पर हमला किसने किया, हमला कहां हुआ और उन्हें बांध के किनारे किस परिस्थिति में छोड़ा गया। पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जांच का एक अहम हिस्सा वह किराये की गाड़ी भी है, जिससे परमबीर धनबाद से अपने गांव के लिए निकले थे। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि गाड़ी में जवान के साथ कौन-कौन लोग मौजूद थे। रास्ते में गाड़ी किन-किन स्थानों पर रुकी और कालेसर पहुंचने से पहले उसमें किसी तरह की गतिविधि हुई या नहीं, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस ने आसपास के टोल प्लाजा और अन्य स्थानों पर लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगालने की तैयारी की है। अधिकारियों को उम्मीद है कि कैमरों की रिकॉर्डिंग से गाड़ी की आवाजाही और उसमें मौजूद लोगों के संबंध में महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं।
पुलिस यह भी जांच रही है कि परमबीर की आखिरी बार किस-किस व्यक्ति से बातचीत हुई थी। उनके मोबाइल फोन की जानकारी और संपर्क में रहे लोगों की सूची जांच का हिस्सा हो सकती है। घटना के समय उनकी लोकेशन और किराये की गाड़ी के रास्ते की जानकारी को आपस में मिलाकर पुलिस घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने का प्रयास कर रही है। अभी तक पुलिस ने हत्या के पीछे किसी निश्चित कारण या किसी व्यक्ति का नाम सार्वजनिक नहीं किया है।
परिवार के लिए सबसे दर्दनाक बात यह है कि परमबीर घर लौटते समय अपनी बेटी से बात करना चाहते थे। पत्नी ने बताया कि जब उन्होंने बेटी से बात कराने की बात कही थी, तब बेटी सो रही थी। इसके बाद उन्होंने शायद सोचा होगा कि घर पहुंचकर बेटी से मिलेंगे और बातचीत करेंगे, लेकिन उससे पहले ही उनकी जिंदगी खत्म हो गई। अब वही फोन कॉल परिवार के लिए ऐसी याद बन गई है जिसे वे शायद कभी भूल नहीं पाएंगे। पत्नी का लगातार फोन करना और दूसरी तरफ से जवाब नहीं मिलना इस घटना की गंभीरता और परिवार की बेचैनी को बताता है।
परमबीर यादव की शादी वर्ष 2010 में हुई थी। उनके परिवार में पत्नी प्रतिमा यादव और बेटी रिया यादव हैं। करीब डेढ़ दशक से अधिक समय से वैवाहिक जीवन बिता रहे परमबीर का अचानक इस तरह चले जाना परिवार के लिए बड़ा सदमा है। वह CISF में सेवा दे रहे थे और धनबाद में तैनात थे। छुट्टी लेकर घर लौटने के दौरान हुई इस घटना ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।
पोस्टमार्टम के बाद जवान का शव परिजनों को सौंप दिया गया। इसके बाद पुलिस और CISF के जवानों की मौजूदगी में राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। पिता दिनेश चंद्र यादव ने उन्हें मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार के दौरान माहौल बेहद गमगीन रहा। एक तरफ परिवार बेटे और पति को खोने के गम में था, वहीं दूसरी तरफ साथी जवानों ने अपने सहयोगी को सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी।
घटना के बाद इलाके के लोगों में भी चर्चा है कि आखिर ड्यूटी से घर लौट रहे जवान की हत्या कैसे हुई। जिस स्थान पर शव मिला, वहां तक वह किन परिस्थितियों में पहुंचा, यह पुलिस जांच का महत्वपूर्ण सवाल है। पुलिस घटनास्थल से मिले साक्ष्यों को जुटाकर यह समझने की कोशिश कर रही है कि हत्या वहीं की गई या किसी दूसरे स्थान पर हमला करने के बाद शव को वहां लाकर फेंका गया। फिलहाल पुलिस ने इन बिंदुओं पर जांच शुरू कर दी है और किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी उपलब्ध साक्ष्यों को देखा जा रहा है।
गीडा क्षेत्राधिकारी आभा सिंह के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर में चोट लगने की पुष्टि हुई है। अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है और पुलिस टीम घटना से जुड़े साक्ष्यों के साथ मृतक के संपर्क में रहे लोगों की जानकारी जुटा रही है। CCTV फुटेज और गाड़ी से जुड़ी जानकारी की भी जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल इस मामले में सबसे बड़ा सवाल हत्या की वजह और हमलावरों की पहचान का है। पुलिस की जांच इन दोनों बिंदुओं पर केंद्रित है। किराये की गाड़ी, CCTV फुटेज, मोबाइल और घटनास्थल से मिले साक्ष्य इस केस की जांच में अहम भूमिका निभा सकते हैं। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, यह स्पष्ट हो सकेगा कि परमबीर के साथ रास्ते में क्या हुआ और वह कालेसर के बांध किनारे कैसे पहुंचे।
परमबीर के परिवार की मांग है कि घटना की पूरी सच्चाई सामने लाई जाए और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो। एक जवान जो अपने घर और परिवार से मिलने के लिए छुट्टी लेकर लौट रहा था, उसकी मौत ने पूरे परिवार को सदमे में डाल दिया है। तिरंगे में लिपटा शव जब अंतिम यात्रा के लिए पहुंचा तो परिवार और ग्रामीणों की आंखें नम थीं। पत्नी की अपने पति से आखिरी बार बेटी की बात कराने की इच्छा अधूरी रह गई और अब परिवार पुलिस जांच से इस घटना की पूरी सच्चाई सामने आने का इंतजार कर रहा है।











