अंबेडकर जयंती 2026: मायावती ने बाबा साहेब को दी श्रद्धांजलि, कार्यकर्ताओं को दिया सामाजिक परिवर्तन का संदेश

Mayawati ने Ambedkar Jayanti के मौके पर बाबा साहेब को श्रद्धांजलि दी और कार्यकर्ताओं से सामाजिक परिवर्तन के लिए आगे आने का आह्वान किया। जानिए उनके संदेश

भारत में हर वर्ष मनाई जाने वाली Ambedkar Jayanti के अवसर पर बहुजन समाज पार्टी (BSP) की प्रमुख Mayawati ने संविधान निर्माता B. R. Ambedkar को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर उन्होंने न केवल बाबा साहेब के योगदान को याद किया, बल्कि पार्टी कार्यकर्ताओं को सामाजिक न्याय और राजनीतिक सशक्तिकरण के मार्ग पर आगे बढ़ने का संदेश भी दिया।

लखनऊ: संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर मायावती ने अपने आवास पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और फूल चढ़ाए। इस मौके पर उन्होंने बाबा साहेब के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन देश के गरीब, उपेक्षित और शोषित वर्ग के सम्मान और उत्थान के लिए समर्पित कर दिया।

मायावती ने इस अवसर पर कार्यकर्ताओं को भी संबोधित किया और उन्हें चुनाव में जीत हासिल कर संगठन को मजबूत बनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब के विचारों पर चलते हुए समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय और समानता पहुंचाना ही सबसे बड़ा लक्ष्य होना चाहिए।

बाबा साहेब के योगदान को किया नमन

मायावती ने अपने आवास पर डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब ने अपना पूरा जीवन देश के गरीबों, वंचितों, दलितों और शोषित वर्गों के अधिकारों की रक्षा और उनके उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने अपने संदेश में इस बात पर जोर दिया कि अंबेडकर ने न केवल सामाजिक भेदभाव के खिलाफ संघर्ष किया, बल्कि भारत के संविधान के माध्यम से समानता, न्याय और अधिकारों की गारंटी भी सुनिश्चित की।

Mayawati ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक विस्तृत संदेश साझा किया। उन्होंने लिखा कि भारत जैसे विशाल देश में “बहुजन समाज” के मसीहा के रूप में B. R. Ambedkar का योगदान अतुलनीय है। उन्होंने देशभर में पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों द्वारा अंबेडकर जयंती को मिशनरी भावना के साथ मनाने के लिए आभार व्यक्त किया।

सामाजिक न्याय और समानता पर जोर

मायावती ने अपने संदेश में यह भी कहा कि बाबा साहेब का पूरा जीवन सामाजिक परिवर्तन, आर्थिक न्याय और समानता की स्थापना के संघर्ष में बीता। उन्होंने विशेष रूप से जातिवाद, सामंतवाद और सामाजिक भेदभाव के खिलाफ उनके योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि संविधान के माध्यम से अंबेडकर ने जो अधिकार और सुरक्षा प्रदान की, वह आज भी देश के करोड़ों लोगों के लिए एक मजबूत आधार है।

अपने बयान में मायावती ने केंद्र और राज्य सरकारों पर अप्रत्यक्ष रूप से सवाल भी उठाए। उन्होंने कहा कि यदि शासन करने वाली पार्टियां संविधान के मूल उद्देश्यों—समानता, न्याय और सामाजिक कल्याण—को सही तरीके से लागू करतीं, तो आज भारत गरीबी, बेरोजगारी और सामाजिक भेदभाव जैसी समस्याओं से काफी हद तक मुक्त हो चुका होता।

उन्होंने यह भी कहा कि इन मूल्यों को पूरी तरह लागू न कर पाने के कारण देश अभी भी कई सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है।Mayawati ने BSP कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे बाबा साहेब के विचारों को आगे बढ़ाते हुए “सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक मुक्ति” के मिशन को मजबूत करें।

उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल सामाजिक स्तर तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे राजनीतिक सफलता के जरिए आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उनका मानना है कि चुनावी जीत के माध्यम से ही बहुजन समाज के अधिकारों और हितों की बेहतर रक्षा की जा सकती है।

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