आंध्र प्रदेश में El Niño और गर्म मौसम के कारण बिजली की दैनिक मांग पिछले साल के 240 मिलियन यूनिट से बढ़कर 290 मिलियन यूनिट हो गई है। ऊर्जा मंत्री गोट्टिपाटी रवि कुमार ने अतिरिक्त बिजली खरीदकर निर्बाध आपूर्ति बनाए रखने की बात कही है।
विजयवाड़ा: आंध्र प्रदेश में El Niño के प्रभाव और गर्म मौसम के कारण बिजली की मांग में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। राज्य के ऊर्जा मंत्री गोट्टिपाटी रवि कुमार ने बताया कि पिछले साल इसी अवधि में रोजाना बिजली की मांग करीब 240 मिलियन यूनिट (MU) थी, जो इस साल बढ़कर 290 मिलियन यूनिट तक पहुंच गई है। यानी मांग में करीब 20% से अधिक की वृद्धि हुई है। सरकार ने बढ़ी हुई जरूरत को पूरा करने के लिए अतिरिक्त बिजली खरीदने और निर्बाध आपूर्ति बनाए रखने की तैयारी की है।
El Niño के बीच बढ़ी बिजली की मांग
ऊर्जा मंत्री गोट्टिपाटी रवि कुमार ने बिजली उत्पादन और आपूर्ति की स्थिति को लेकर अधिकारियों के साथ समीक्षा के दौरान बढ़ती मांग का विवरण साझा किया। उनके मुताबिक, El Niño के प्रभाव के कारण राज्य में मौसम गर्म बना हुआ है और इसका सीधा असर बिजली की खपत पर पड़ रहा है।
पिछले साल इसी समय राज्य में रोजाना बिजली की मांग करीब 240 मिलियन यूनिट थी। इस वर्ष यह बढ़कर लगभग 290 मिलियन यूनिट हो गई है। मंत्री ने बताया कि गर्मी जैसी परिस्थितियों के कारण अतिरिक्त 50 मिलियन यूनिट की मांग पैदा हुई है।
बढ़ी हुई खपत का असर घरेलू, कृषि, वाणिज्यिक और औद्योगिक क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है। इससे पहले सितंबर की शुरुआत में भी राज्य में दैनिक बिजली खपत 275 मिलियन यूनिट से ऊपर पहुंच गई थी। उस समय ऊर्जा विभाग ने बढ़ती मांग को देखते हुए बिजली संयंत्रों की तैयारी और ईंधन आपूर्ति पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए थे।
बिजली की कमी से बचने के लिए अतिरिक्त खरीद
बढ़ती मांग के बीच आंध्र प्रदेश सरकार बिजली की जरूरत पूरी करने के लिए बाहरी स्रोतों से बिजली खरीदने की योजना पर काम कर रही है। अधिकारियों को मांग और आपूर्ति की स्थिति पर लगातार नजर रखने तथा जरूरत के अनुसार अतिरिक्त बिजली खरीदने के निर्देश दिए गए हैं।
सितंबर की शुरुआत में आंध्र प्रदेश पावर कोऑर्डिनेशन कमेटी और बिजली वितरण कंपनियों ने सितंबर और अक्टूबर के लिए अल्पकालिक बिजली खरीद की रणनीति तैयार की थी। इसका उद्देश्य El Niño से जुड़ी मौसम संबंधी परिस्थितियों के बीच ग्रिड की स्थिरता बनाए रखना और राज्य में विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना था।
ऊर्जा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, अगस्त में राज्य की औसत दैनिक ग्रिड मांग 269 मिलियन यूनिट रही थी, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 223 मिलियन यूनिट थी। अगस्त में एक दिन की अधिकतम मांग 286 मिलियन यूनिट तक पहुंच गई थी।
बिजली उत्पादन इकाइयां पूरी क्षमता से चल रहीं
मंत्री रवि कुमार के अनुसार, राज्य के बिजली उत्पादन केंद्र पूरी क्षमता के साथ काम कर रहे हैं। थर्मल पावर स्टेशनों में कोयले की उपलब्धता बनाए रखने के लिए भी कदम उठाए गए हैं।
हालिया समीक्षा में मंत्री ने कहा कि थर्मल पावर स्टेशनों में करीब 15 दिनों के लिए कोयले का स्टॉक उपलब्ध रखा गया है। उन्होंने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि ईंधन की कमी के कारण बिजली उत्पादन प्रभावित न हो। साथ ही, तकनीकी समस्याओं को जल्द दूर करने पर भी जोर दिया गया है।
बढ़ती मांग के बीच बिजली संयंत्रों की नियमित और निवारक देखभाल को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे अचानक तकनीकी खराबी के कारण उत्पादन रुकने की संभावना को कम करने में मदद मिल सकती है।
बारिश की कमी से जलविद्युत उत्पादन प्रभावित
El Niño के प्रभाव से केवल बिजली की मांग ही नहीं बढ़ी है, बल्कि बारिश की कमी का असर बिजली उत्पादन पर भी पड़ा है। कम वर्षा और जलाशयों में पानी की उपलब्धता प्रभावित होने से जलविद्युत उत्पादन पर दबाव बढ़ा है।
इस स्थिति में थर्मल और अन्य स्रोतों पर निर्भरता बढ़ जाती है। सितंबर में आंध्र प्रदेश के बिजली क्षेत्र पर मौसम संबंधी परिस्थितियों का असर पहले ही सामने आ चुका है। रिपोर्टों के अनुसार, राज्य में जलविद्युत उत्पादन में गिरावट और कुछ ताप विद्युत इकाइयों से जुड़ी तकनीकी चुनौतियों ने आपूर्ति व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डाला है।
ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों पर भी असर
बिजली की बढ़ती मांग का असर कृषि क्षेत्र पर भी पड़ रहा है। कम बारिश के कारण कई इलाकों में किसान सिंचाई के लिए बोरवेल और मोटर पर अधिक निर्भर हैं। इससे कृषि क्षेत्र में बिजली की मांग बढ़ रही है।
आंध्र प्रदेश के कुछ जिलों में बिजली की दैनिक खपत पिछले साल की तुलना में काफी बढ़ी है। कडपा जिले में सामान्य तौर पर करीब 15 मिलियन यूनिट की दैनिक खपत के मुकाबले इस वर्ष यह बढ़कर 17 मिलियन यूनिट हो गई। 1 से 10 सितंबर के बीच जिले में 161 मिलियन यूनिट बिजली की खपत दर्ज हुई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 125 मिलियन यूनिट थी।
ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति कृषि गतिविधियों के साथ-साथ घरेलू जरूरतों के लिए भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में मांग और उपलब्ध आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखना बिजली विभाग के सामने बड़ी चुनौती है।
कुछ क्षेत्रों में बिजली कटौती की शिकायतें
राज्य में बढ़ी हुई मांग और सीमित उपलब्धता के बीच कुछ क्षेत्रों में बिजली कटौती की रिपोर्ट भी सामने आई है। सितंबर के मध्य में प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक, ग्रामीण आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में उपभोक्ताओं ने अनियमित बिजली कटौती की शिकायत की थी।
प्रकाशम जिले में दैनिक खपत 7-8 मिलियन यूनिट से बढ़कर करीब 9 मिलियन यूनिट हो गई थी। रिपोर्ट में स्थानीय अधिकारियों के हवाले से बताया गया कि मांग और आपूर्ति के अंतर को संभालने के लिए कुछ क्षेत्रों में पीक आवर्स के दौरान बिजली राहत उपाय किए गए।
हालांकि, ऊर्जा मंत्री का कहना है कि सरकार अतिरिक्त बिजली की खरीद और उत्पादन क्षमता के बेहतर इस्तेमाल के जरिए आपूर्ति को बनाए रखने की कोशिश कर रही है।
सौर और पवन ऊर्जा पर भी जोर
बिजली क्षेत्र पर बढ़ते दबाव के बीच राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। अगस्त में ऊर्जा मंत्री ने अधिकारियों को मांग में संभावित बढ़ोतरी को देखते हुए बाहरी स्रोतों से बिजली खरीदने के साथ-साथ नवीकरणीय बिजली उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए थे।
सौर ऊर्जा को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दिन के समय सौर ऊर्जा उत्पादन बढ़ाकर थर्मल पावर पर दबाव कम करने और भविष्य में बढ़ती मांग को संभालने की कोशिश की जा रही है।
सितंबर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में सौर और पवन ऊर्जा का उत्पादन पिछले साल के मुकाबले बढ़ा है। हालांकि, बढ़ती कुल मांग और मौसम आधारित उत्पादन में उतार-चढ़ाव के कारण ग्रिड प्रबंधन अभी भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
सरकार का लक्ष्य निर्बाध बिजली आपूर्ति
ऊर्जा मंत्री ने कहा है कि सरकार का उद्देश्य घरेलू, कृषि और औद्योगिक उपभोक्ताओं को बिजली की आपूर्ति में व्यवधान से बचाना है। बढ़ती मांग को देखते हुए बिजली उत्पादन, खरीद और वितरण से जुड़े विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
सितंबर में अधिकारियों को मांग और आपूर्ति की स्थिति की लगातार निगरानी करने तथा जरूरत पड़ने पर पहले से बिजली खरीदने के निर्देश दिए गए थे।
आंध्र प्रदेश में बिजली की मांग का मौजूदा स्तर यह दिखाता है कि मौसम संबंधी बदलाव बिजली व्यवस्था पर सीधा असर डाल सकते हैं। फिलहाल राज्य सरकार का फोकस अतिरिक्त बिजली की उपलब्धता, कोयले के पर्याप्त भंडार, बिजली संयंत्रों की तकनीकी तैयारी और नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने पर है।












