गोरखपुर में चलेंगी 150 नई वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसें, हरसेवकपुर और कोनी में बनेंगे नए बस डिपो

गोरखपुर में 150 नई वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसें चलेंगी। हरसेवकपुर और कोनी में तीन-तीन एकड़ जमीन पर नए डिपो बनेंगे। यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी।

गोरखपुर में 150 नई वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसें चलाने की तैयारी तेज हो गई है। नगर निगम ने हरसेवकपुर नंबर दो और कोनी में बस डिपो बनाने के लिए तीन-तीन एकड़ जमीन चिह्नित की है। यहां बसों की पार्किंग, चार्जिंग और मरम्मत की व्यवस्था होगी।

गोरखपुर: शहर में आने वाले दिनों में लोगों को सफर के लिए 150 नई वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसों की सुविधा मिलेगी। इन बसों को चलाने के लिए दो नए डिपो बनाए जाएंगे। नगर निगम ने हरसेवकपुर नंबर दो और सोनबरसा मार्ग पर स्थित कोनी में जमीन चिह्नित कर परिवहन निगम को सौंपने की जानकारी दी है। दोनों जगह करीब तीन-तीन एकड़ जमीन उपलब्ध कराई गई है। अब यहां बसों की पार्किंग और चार्जिंग की व्यवस्था तैयार की जाएगी।

हरसेवकपुर और कोनी में बनेंगे इलेक्ट्रिक बस डिपो

गोरखपुर में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाने की योजना पर काम आगे बढ़ रहा है। शहर में 150 नई बसें चलाने के लिए बड़े डिपो की जरूरत थी। इसके लिए नगर निगम काफी समय से जमीन तलाश रहा था। अब हरसेवकपुर नंबर दो और सोनबरसा मार्ग पर कोनी में डिपो बनाने की तैयारी है।

दोनों जगहों पर करीब तीन-तीन एकड़ जमीन चिह्नित की गई है। नगर निगम ने इसकी जानकारी उत्तर प्रदेश परिवहन निगम और जिला प्रशासन को भी दे दी है।

डिपो बनने के बाद यहां बसों को खड़ा करने की जगह मिलेगी। साथ ही बैटरी चार्ज करने के लिए चार्जिंग स्टेशन लगाए जाएंगे। बसों की मरम्मत और नियमित जांच भी यहीं हो सकेगी।

इलेक्ट्रिक बसों को चलाने के लिए चार्जिंग की व्यवस्था सबसे जरूरी है। अगर पर्याप्त चार्जिंग पॉइंट नहीं होंगे तो बसों को समय पर सड़क पर उतारने में परेशानी आ सकती है। इसी वजह से नई बसें आने से पहले डिपो तैयार करने पर ध्यान दिया जा रहा है।

पहले चुनी गई जमीन को रोडवेज ने कर दिया था खारिज

इलेक्ट्रिक बस डिपो बनाने के लिए नगर निगम ने पहले भी कुछ स्थानों पर जमीन देखी थी। इनमें सहारा एस्टेट मार्ग से आगे खोराबार क्षेत्र और कोनी के पास बसंतपुर खास की जमीन शामिल थी।

हालांकि, परिवहन निगम को ये स्थान डिपो निर्माण के लिए ठीक नहीं लगे। अधिकारियों ने जमीन को अनुपयुक्त बताते हुए प्रस्ताव खारिज कर दिया था।

इसके बाद नगर निगम ने दोबारा जमीन की तलाश शुरू की। इस बार हरसेवकपुर नंबर दो और सोनबरसा मार्ग पर कोनी को चुना गया है।

नई जमीन मिलने से परियोजना का काम आगे बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, डिपो का निर्माण कब शुरू होगा और कितने समय में पूरा होगा, इसकी निश्चित तारीख अभी सामने नहीं आई है।

प्रदेश सरकार से मिल चुकी है 150 बसों की मंजूरी

गोरखपुर में 150 नई वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसें चलाने की योजना को उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है।

इस परियोजना पर गोरखपुर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड, नगर निगम और उत्तर प्रदेश परिवहन निगम मिलकर काम करेंगे।

नई बसों के संचालन से पहले चार्जिंग स्टेशन, पार्किंग और रखरखाव की व्यवस्था तैयार की जाएगी। इसके बाद शहर के अलग-अलग मार्गों पर बसें चलाने की योजना आगे बढ़ेगी।

फिलहाल नई बसों का किराया, रूट और संचालन शुरू होने की तारीख घोषित नहीं की गई है। यात्रियों को इन जानकारियों के लिए परिवहन विभाग की अगली घोषणा का इंतजार करना होगा।

नई बसों से शहर के यात्रियों को मिलेगी राहत

गोरखपुर में रोज बड़ी संख्या में लोग नौकरी, पढ़ाई, इलाज और खरीदारी के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाते हैं। सुबह और शाम शहर की कई सड़कों पर वाहनों की भीड़ रहती है।

ऐसे में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ने से सार्वजनिक परिवहन की सुविधा बेहतर हो सकती है। यात्रियों को वातानुकूलित बसों में सफर करने का मौका मिलेगा। गर्मी के मौसम में खासकर लंबी दूरी तय करने वाले लोगों को इससे राहत मिल सकती है।

इलेक्ट्रिक बसों का एक फायदा यह भी है कि इनके चलने से सड़कों पर डीजल वाहनों जैसा धुआं नहीं निकलता। इससे शहर में वाहनों के कारण होने वाले वायु प्रदूषण को कम करने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, बसों का फायदा यात्रियों तक तभी पहुंचेगा, जब उनके रूट और समय लोगों की जरूरत के अनुसार तय किए जाएंगे।

गोरखपुर में पहले से इलेक्ट्रिक बसों का संचालन हो रहा है। नई बसों के आने से इस सेवा का विस्तार किया जा सकेगा। इससे उन इलाकों को भी बस सेवा से जोड़ने का अवसर मिल सकता है, जहां अभी सार्वजनिक परिवहन के सीमित विकल्प हैं।

नगर निगम और परिवहन निगम के सामने फिलहाल दोनों डिपो तैयार करने की जिम्मेदारी है। चार्जिंग और दूसरी जरूरी सुविधाएं विकसित होने के बाद नई बसों को सड़क पर उतारने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

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