Abdul El-Sayed: अमेरिकी सीनेटर की जीत पर प्रियंका चतुर्वेदी का पलटवार, गिनाए भारत के मुस्लिम राष्ट्रपतियों के नाम

Abdul El-Sayed News: अमेरिका में अब्दुल अल-सैयद की जीत पर प्रियंका चतुर्वेदी ने जवाब दिया। भारत के पूर्व मुस्लिम राष्ट्रपतियों का उदाहरण देकर क्या कहा, जानें।

अमेरिका में अब्दुल अल-सैयद के पहले मुस्लिम सीनेटर चुने जाने के बाद भारत में नई बहस शुरू हो गई है। शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने भारत के पूर्व मुस्लिम राष्ट्रपतियों और दूसरे बड़े संवैधानिक पदों पर रहे नेताओं के उदाहरण देकर जवाब दिया है।

नई दिल्ली: अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में अब्दुल अल-सैयद की ऐतिहासिक जीत को लेकर भारत में भी राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। सैयद अमेरिकी सीनेट के लिए चुने जाने वाले पहले मुस्लिम नेता बने हैं। उनकी जीत को लेकर वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई की टिप्पणी पर शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने भारत के उन मुस्लिम नेताओं का जिक्र किया है, जो राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और मुख्य न्यायाधीश जैसे बड़े संवैधानिक पदों पर रह चुके हैं।

प्रियंका चतुर्वेदी ने अमेरिकी चुनाव के उदाहरण पर क्या कहा?

अमेरिका में अब्दुल अल-सैयद के सीनेट चुनाव जीतने के बाद भारत में भी धार्मिक प्रतिनिधित्व को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। इसी बीच शिवसेना (यूबीटी) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए उन लोगों से सवाल किया है, जो मानते हैं कि भारत में अभी इस तरह का राजनीतिक बदलाव होना बाकी है।

प्रियंका ने पूछा कि क्या सचमुच भारत को अपने अब्दुल अल-सैयद जैसे किसी ऐतिहासिक पल का इंतजार है? उन्होंने अपने जवाब में भारत के इतिहास का जिक्र किया। प्रियंका चतुर्वेदी ने सवाल उठाया कि क्या भारत को सच में अपने अब्दुल अल-सैयद का इंतजार है? अपनी बात समझाने के लिए उन्होंने देश के इतिहास के कई उदाहरण दिए। उन्होंने कहा कि भारत में मुस्लिम समुदाय के लोग पहले भी बड़े संवैधानिक पदों पर पहुंच चुके हैं। देश में मुस्लिम राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति रह चुके हैं। न्यायपालिका में भी इस समुदाय के लोगों ने ऊंचे पद संभाले हैं।

प्रियंका का कहना था कि दूसरे देशों में जो कुछ अच्छा हो रहा है, उसकी तारीफ जरूर होनी चाहिए। लेकिन हमें अपने देश का इतिहास भी नहीं भूलना चाहिए। भारत में अलग-अलग धर्म और समुदाय के लोग मिलकर रहते आए हैं। देश के बड़े पदों पर भी अलग-अलग समुदायों के लोगों को जिम्मेदारी मिली है। उन्होंने इसी बात को याद रखने की अपील की।

राजदीप सरदेसाई की किस पोस्ट पर शुरू हुआ विवाद?

अमेरिका में अब्दुल अल-सैयद की जीत के बाद पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखी थी। उन्होंने अल-सैयद के भाषण की तारीफ की और कहा कि भारत में भी ऐसा दिन देखने को मिले, जब किसी नेता को उसके धर्म के बजाय उसकी सोच और सबको साथ लेकर चलने की वजह से पहचाना जाए।

राजदीप की यह बात कुछ लोगों को पसंद आई, तो कुछ ने इस पर सवाल उठा दिए। एक तरफ लोगों का कहना था कि राजनीति में धर्म से ज्यादा काम और लोगों को जोड़ने की सोच मायने रखनी चाहिए। वहीं, दूसरे लोगों ने भारत का इतिहास याद दिलाना शुरू कर दिया। उनका सवाल था कि जब भारत में मुस्लिम नेता पहले ही राष्ट्रपति और दूसरे बड़े पदों पर रह चुके हैं, तो फिर ऐसे किसी पल का इंतजार करने की बात क्यों हो रही है?

इसी बीच शिवसेना (यूबीटी) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी की पोस्ट भी सामने आई। उन्होंने भारत के कई पुराने नेताओं के नाम गिनाकर अपनी बात रखी। हालांकि, अपनी पोस्ट में उन्होंने कहीं भी राजदीप सरदेसाई का नाम नहीं लिखा था।

जाकिर हुसैन से एपीजे अब्दुल कलाम तक, प्रियंका ने दिलाया इतिहास याद

प्रियंका चतुर्वेदी ने भारत के तीन पूर्व मुस्लिम राष्ट्रपतियों का उदाहरण दिया। इनमें सबसे पहले उन्होंने डॉ. जाकिर हुसैन का नाम लिया। जाकिर हुसैन साल 1967 में देश के तीसरे राष्ट्रपति बने थे। वह इस पद पर पहुंचने वाले पहले मुस्लिम थे। राष्ट्रपति बनने से पहले जाकिर हुसैन देश के उपराष्ट्रपति भी रह चुके थे। उन्होंने 1962 से 1967 तक यह जिम्मेदारी संभाली थी। इसके बाद वह राष्ट्रपति बने।

Abdul El-Sayed: अमेरिकी सीनेटर की जीत पर प्रियंका चतुर्वेदी का पलटवार, गिनाए भारत के मुस्लिम राष्ट्रपतियों के नाम

हामिद अंसारी और मोहम्मद हिदायतुल्लाह का भी किया जिक्र

पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी का नाम भी प्रियंका चतुर्वेदी की पोस्ट में शामिल था। हामिद अंसारी ने अगस्त 2007 से अगस्त 2017 तक लगातार दो कार्यकाल पूरे किए थे। इसके अलावा उन्होंने मोहम्मद हिदायतुल्लाह का उदाहरण दिया। हिदायतुल्लाह भारत के मुख्य न्यायाधीश रहे थे। बाद में उन्होंने देश के उपराष्ट्रपति का पद भी संभाला और कार्यवाहक राष्ट्रपति की जिम्मेदारी भी निभाई। प्रियंका ने इन नेताओं का जिक्र करते हुए कहा कि भारत में धार्मिक विविधता के साथ बड़े संवैधानिक पदों पर पहुंचने की परंपरा नई नहीं है।

दूसरे लोगों ने भी भारत के इतिहास का दिया हवाला

प्रियंका चतुर्वेदी के अलावा रक्षा मामलों पर टिप्पणी करने वाली सजेदा अख्तर ने भी इस विषय पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने भारत में अल्पसंख्यक समुदायों से आए सैन्य अधिकारियों, मुख्य न्यायाधीशों, मुख्य चुनाव आयुक्तों, मुख्यमंत्रियों और राज्यपालों का उदाहरण दिया। सजेदा का कहना था कि केवल अमेरिका की नई उपलब्धि को महत्व देते हुए भारत के पुराने इतिहास को नजरअंदाज करना सही नहीं है।

हालांकि, इस बहस का दूसरा पक्ष भी है। भारत में मुस्लिम नेताओं का राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति बनना ऐतिहासिक उपलब्धि रही है, लेकिन इससे मौजूदा। राजनीति में सभी समुदायों के प्रतिनिधित्व और समान अवसरों से जुड़े सवाल अपने आप खत्म नहीं हो जाते।

कौन हैं अमेरिका के नए सीनेटर अब्दुल अल-सैयद?

42 वर्षीय अब्दुल अल-सैयद अमेरिका की डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता हैं। उन्होंने 3 नवंबर 2026 को हुए मध्यावधि चुनाव में मिशिगन से अमेरिकी सीनेट की सीट जीती है। उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स को हराया। चुनावी रिपोर्टों के अनुसार, सैयद को करीब 52 प्रतिशत वोट मिले। अब्दुल अल-सैयद मिस्र से अमेरिका आकर बसे परिवार से आते हैं। राजनीति में आने से पहले वह सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग में काम कर चुके हैं।

उनके चुनावी अभियान में स्वास्थ्य सेवाओं को सस्ता बनाने, आम परिवारों के खर्च कम करने और राजनीति में बड़ी कंपनियों के प्रभाव को सीमित करने जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। अमेरिकी संसद के निचले सदन में पहले भी मुस्लिम नेता चुने जा चुके हैं, लेकिन सीनेट के लिए किसी मुस्लिम उम्मीदवार की यह पहली जीत है।

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