दीपावली से पहले शामली के चौसाना और आसपास के इलाकों में मिलावटी मावा तैयार करने के आरोप सामने आए हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि रिफाइंड तेल और पाउडर से बना मावा बाजारों में पहुंच रहा है। खाद्य सुरक्षा विभाग ने दोबारा जांच करने की बात कही है।
शामली: दिवाली पर मिठाई खरीदने वालों के लिए शामली से चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। जिले के चौसाना, पठानपुरा और गढ़ी हसनपुर में नकली मावा तैयार करने के आरोप लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ जगहों पर दूध के बजाय रिफाइंड तेल और पाउडर का इस्तेमाल कर मावा बनाया जा रहा है। इस मामले में खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच और कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
चौसाना में रोज 30 से 35 कुंतल मावा तैयार होने का दावा
दीपावली नजदीक आते ही शामली के मिठाई बाजार में मावे की मांग बढ़ने लगी है। मिठाई की दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ पहुंच रही है। इसी बीच चौसाना और आसपास के गांवों में मावे की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आई हैं।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, चौसाना क्षेत्र में कई स्थानों पर मावा बनाने का काम चल रहा है। यहां से रोज करीब 30 से 35 कुंतल मावा तैयार कर आसपास के बाजारों में भेजे जाने की चर्चा है। हालांकि, इस मात्रा की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
![]()
पठानपुरा के एक मावा विक्रेता ने दावा किया है कि त्योहार के समय मांग ज्यादा होने पर कुछ कारोबारी रिफाइंड तेल और पाउडर का इस्तेमाल कर मावे जैसा उत्पाद तैयार करते हैं। इससे उत्पादन की लागत कम हो जाती है। ऐसे उत्पाद को असली मावे के नाम पर बेचा जाए तो ग्राहकों के साथ धोखा हो सकता है।
सामान्य तौर पर मावा दूध को गर्म करके उसका पानी कम करने से तैयार होता है। इसका इस्तेमाल बर्फी, पेड़ा, गुलाब जामुन और कई दूसरी मिठाइयों में किया जाता है। लेकिन दूध की जगह सस्ते पदार्थ मिलाकर तैयार उत्पाद को शुद्ध मावा बताकर बेचना खाद्य मिलावट का मामला हो सकता है।
फिलहाल शामली में जिन स्थानों पर मिलावट के आरोप लगे हैं, वहां से लिए गए नमूनों की ऐसी कोई जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है, जिससे सभी दावों की पुष्टि हो सके।
पानीपत से मिठाइयों की सप्लाई का भी आरोप
मामला केवल स्थानीय स्तर पर मावा तैयार करने तक सीमित नहीं है। चौसाना में कुछ दुकानों पर हरियाणा के पानीपत से रसगुल्ले और दूसरी मिठाइयां आने की बात भी सामने आई है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि बाहर से आने वाली कुछ मिठाइयों की गुणवत्ता संदिग्ध है। हालांकि, केवल दूसरे राज्य से मिठाई मंगाना गलत नहीं है। मिलावट की पुष्टि खाद्य पदार्थों की जांच के बाद ही की जा सकती है।
क्षेत्र के निवासी अजय, बाबू, सुधीर और सलमान ने खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि त्योहारों के समय अधिकारी जांच करने पहुंचते हैं, लेकिन कुछ नमूने लेने के बाद वापस लौट जाते हैं।
लोगों की शिकायत है कि नमूनों की जांच का क्या नतीजा निकला और संबंधित कारोबारियों पर क्या कार्रवाई हुई, इसकी जानकारी उन्हें नहीं मिल पाती। उनका कहना है कि यदि नियमित जांच होती रहे तो मिलावट की शिकायतों पर जल्द कार्रवाई की जा सकती है।
कुछ स्थानीय कारोबारियों ने विभागीय कर्मचारियों पर मिलीभगत के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने आरोपों को बताया गलत
शामली के खाद्य सुरक्षा अधिकारी पंकज कुमार ने विभागीय कर्मचारियों पर लगाए गए रुपये लेने के आरोपों से इनकार किया है।
उन्होंने बताया कि दो दिन पहले चौसाना क्षेत्र में जांच के लिए गए थे, लेकिन उस दौरान कोई संदिग्ध सामग्री नहीं मिली। अधिकारी के अनुसार, वह फिलहाल मुजफ्फरनगर में हैं और वापस लौटने पर क्षेत्र में दोबारा छापेमारी की जाएगी।
ऐसे में स्थानीय लोगों के आरोपों और विभाग के पक्ष में अंतर बना हुआ है। आगे की जांच से ही स्पष्ट हो सकेगा कि जिन स्थानों पर मिलावटी मावा तैयार होने की शिकायत की गई है, वहां खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं।
त्योहारों के दौरान मावे और मिठाइयों की बिक्री बढ़ने के कारण इनकी गुणवत्ता की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है। खासकर खुले में बिकने वाले और बिना स्पष्ट जानकारी वाले खाद्य पदार्थ खरीदते समय ग्राहकों को सावधानी बरतनी चाहिए।
दिवाली पर मावा और मिठाई खरीदते समय रखें ध्यान
मिलावटी मावा या खराब गुणवत्ता वाली मिठाई खाने से पेट दर्द, उल्टी और दस्त जैसी परेशानियां हो सकती हैं। दूषित खाद्य पदार्थों से होने वाला नुकसान उनमें मौजूद सामग्री और मिलावट के प्रकार पर निर्भर करता है।
मिठाई खरीदते समय दुकान की साफ-सफाई और सामान को रखने के तरीके पर ध्यान देना चाहिए। पैकिंग वाली मिठाई पर निर्माण और इस्तेमाल की अंतिम तारीख देखना भी जरूरी है।
यदि मावे में असामान्य गंध आ रही हो, रंग बदला हुआ लगे या वह खराब दिखाई दे, तो उसे खाने से बचना बेहतर है। हालांकि, केवल रंग, गंध या स्वाद देखकर हर तरह की मिलावट की पहचान नहीं की जा सकती। इसकी पुष्टि प्रयोगशाला जांच से ही होती है।
दीपावली पर मिठाई खरीदने वाले ग्राहक दुकानदार से उसकी ताजगी और सामग्री के बारे में जानकारी ले सकते हैं। किसी खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता संदिग्ध लगे तो उसकी शिकायत संबंधित खाद्य सुरक्षा विभाग से की जा सकती है।
शामली में सामने आए आरोपों के बाद अब लोगों की नजर खाद्य सुरक्षा विभाग की अगली जांच पर है। विभाग ने दोबारा छापेमारी करने की बात कही है। जांच के नतीजों से ही स्पष्ट होगा कि संबंधित इलाकों में मिलावट के आरोप कितने सही हैं।







