UGC New Rules 2026: यूजीसी के नए नियमों पर अभी नहीं आया फैसला, सुप्रीम कोर्ट ने चार हफ्ते आगे बढ़ाई सुनवाई

UGC New Rules 2026: यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट में अभी फैसला नहीं आया है। अदालत ने सुनवाई चार हफ्ते आगे बढ़ा दी है। जानें विवाद की वजह और अगली सुनवाई

यूजीसी के नए नियमों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को सुनवाई हुई, लेकिन अभी कोई फैसला नहीं आया। सरकार ने बताया कि छात्रों की आपत्तियों के बाद नियमों पर दोबारा विचार किया जा रहा है। अब चार हफ्ते बाद सुनवाई होगी।

नई दिल्ली: कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में जाति के आधार पर भेदभाव रोकने के लिए यूजीसी ने जो नए नियम बनाए हैं, उन पर विवाद अभी थमा नहीं है। गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को यह मामला फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुनवाई में केंद्र सरकार ने बताया कि छात्रों ने नियमों को लेकर कई आपत्तियां जताई हैं। इन्हें देखते हुए सरकार नियमों पर दोबारा विचार कर रही है। एक नई कमेटी बनाने पर भी बातचीत चल रही है। 

यूजीसी के नए नियमों पर केंद्र सरकार ने क्या कहा?

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को अहम सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ के सामने केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए। सुनवाई के दौरान तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सरकार छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से देख रही है। 

नियमों में मौजूद विवादित प्रावधानों पर दोबारा विचार किया जा रहा है, ताकि किसी भी वर्ग के विद्यार्थियों को असुरक्षा या भेदभाव महसूस न हो। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार नियमों की समीक्षा के लिए एक कमेटी बनाने पर विचार कर रही है। हालांकि, अभी कमेटी के गठन की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। सरकार का पक्ष सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई चार सप्ताह के लिए टाल दी। अदालत ने कहा कि उसने सरकार को अपना सुझाव दे दिया है और अब देखा जाएगा कि इस दिशा में क्या कदम उठाए जाते हैं।

CJI सूर्यकांत ने छात्रों को लेकर क्या कहा?

यूजीसी के नए नियमों पर सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने छात्रों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल उठाए। उन्होंने सरकार से पूछा कि इन नियमों पर दोबारा विचार करने में क्या परेशानी है। अगर कुछ बदलाव करने से आने वाली पीढ़ी को फायदा होता है, तो इस पर जरूर सोचना चाहिए। सीजेआई ने कहा कि कॉलेज और यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले हर छात्र को बराबर सुरक्षा मिलनी चाहिए। ऐसा नहीं होना चाहिए कि किसी एक वर्ग के छात्र को लगे कि नियम उसके खिलाफ हैं या उसकी शिकायत पर सुनवाई नहीं होगी। पढ़ाई करने आए बच्चों के मन में इस तरह का डर नहीं रहना चाहिए।

इस पर केंद्र सरकार की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि सरकार भी सभी छात्रों के हितों का ध्यान रखना चाहती है। इसी कारण नए नियमों की दोबारा जांच करने और उनमें जरूरी बदलाव पर विचार किया जा रहा है।

UGC के नए नियमों पर क्यों हो रहा है विवाद?

UGC New Rules 2026: यूजीसी के नए नियमों पर अभी नहीं आया फैसला, सुप्रीम कोर्ट ने चार हफ्ते आगे बढ़ाई सुनवाई

यूजीसी ने 13 जनवरी 2026 को कॉलेजों और यूनिवर्सिटी के लिए नए नियम जारी किए थे। इन नियमों को लाने की वजह यह थी कि कॉलेज में किसी भी छात्र को उसकी जाति, धर्म या भाषा के कारण परेशान न किया जाए। अगर किसी छात्र के साथ गलत व्यवहार होता है, तो वह इसकी शिकायत कर सके और कॉलेज प्रशासन उस पर कार्रवाई करे।

इसके लिए सभी कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में समान अवसर केंद्र और इक्विटी कमेटी बनाने की व्यवस्था रखी गई थी। कोई छात्र अपनी जाति, धर्म, भाषा या दिव्यांगता के कारण परेशान है, तो वह इस कमेटी के पास जाकर अपनी बात रख सकता है। लेकिन नियमों के सामने आते ही कुछ छात्रों ने इन पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। सबसे ज्यादा विवाद नियम 3(1)(c) को लेकर हुआ। इसमें जाति के आधार पर भेदभाव की बात करते समय SC, ST और OBC वर्ग के छात्रों का खास तौर पर जिक्र किया गया है।

सामान्य वर्ग के छात्रों को नए नियमों से क्या आपत्ति है?

यूजीसी के नियमों के खिलाफ अदालत पहुंचे याचिकाकर्ताओं का कहना है कि जाति के आधार पर गलत व्यवहार किसी भी छात्र के साथ हो सकता है। फिर शिकायत करने और सुरक्षा पाने के मामले में सामान्य वर्ग के छात्रों को अलग क्यों रखा गया है? उनकी मांग है कि अगर किसी छात्र के साथ उसकी जाति को लेकर गलत व्यवहार होता है, तो उसे भी शिकायत करने का पूरा मौका मिलना चाहिए। छात्र किसी भी वर्ग का हो, उसके लिए नियम बराबर होने चाहिए।

याचिकाकर्ताओं ने एक और बात उठाई है। उनका कहना है कि नए नियमों में झूठी शिकायत करने वालों को रोकने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए हैं। उन्हें डर है कि आपसी विवाद में भी इन नियमों का गलत इस्तेमाल किया जा सकता है। वहीं, दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्ग से जुड़े कई संगठनों की राय अलग है। उनका कहना है कि कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में आज भी छात्रों को जाति की वजह से परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे मामलों को रोकने के लिए सख्त नियम होना जरूरी है।

इसी बात को लेकर दोनों पक्षों में मतभेद है। एक तरफ सभी छात्रों के लिए बराबर सुरक्षा की मांग हो रही है, तो दूसरी तरफ जातिगत भेदभाव झेलने वाले छात्रों के लिए मजबूत व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने 29 जनवरी को नियमों पर रोक क्यों लगाई थी?

यूजीसी के नए नियम सामने आने के बाद देश के कई कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में इनका विरोध शुरू हो गया था। कुछ छात्र संगठनों ने भी नियमों पर सवाल उठाए। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गईं। 29 जनवरी 2026 को मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने नए नियमों पर फिलहाल रोक लगा दी थी। अदालत का कहना था कि नियमों की कुछ बातें साफ नहीं हैं। ऐसे में उनका गलत इस्तेमाल होने की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर भी चिंता जताई थी कि कहीं इन नियमों की वजह से छात्रों के बीच दूरी न बढ़ जाए। इसलिए इनके सभी पहलुओं को ठीक से समझना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए अंतरिम आदेश दिया था। इसके मुताबिक, जब तक अदालत कोई नया आदेश नहीं देती, तब तक साल 2012 के पुराने यूजीसी नियम ही लागू रहेंगे।

फिलहाल नए नियमों पर रोक बनी हुई है। अब सरकार की समीक्षा और सुप्रीम कोर्ट में आगे होने वाली सुनवाई के बाद ही साफ होगा कि इन नियमों में क्या बदलाव किए जाएंगे।

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