दो बार इंटरव्यू में नहीं मिली सफलता, तीसरी कोशिश में SDO बनीं सुधा सिंह, हासिल की 167वीं रैंक

बिहार के रोहतास की सुधा सिंह ने दो बार BPSC इंटरव्यू में असफल होने के बाद 70वीं परीक्षा में 167वीं रैंक हासिल की। जानें आर्थिक तंगी से SDO बनने तक की उनकी कहानी।

बिहार के रोहतास जिले की सुधा सिंह ने आर्थिक परेशानियों और दो बार BPSC इंटरव्यू में असफल होने के बाद भी तैयारी जारी रखी। तीसरे प्रयास में उन्होंने 70वीं BPSC परीक्षा में 167वीं रैंक हासिल की। अब वह UPSC की तैयारी कर रही हैं।

BPSC Success Story: बिहार के रोहतास जिले की सुधा सिंह ने लगातार दो बार असफल होने के बाद भी अपनी पढ़ाई नहीं छोड़ी। घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी, लेकिन परिवार ने उनका साथ दिया। सुधा 68वीं और 69वीं BPSC परीक्षा में इंटरव्यू तक पहुंचीं, मगर अंतिम चयन नहीं हो पाया। इसके बाद भी वह दिल्ली में रहकर तैयारी करती रहीं। आखिरकार 70वीं BPSC परीक्षा में 167वीं रैंक हासिल कर उन्होंने SDO बनने का सपना पूरा कर लिया। उनकी इस सफलता से परिवार के साथ गांव के लोग भी खुश हैं।

दो बार इंटरव्यू में हुईं असफल, तीसरे प्रयास में मिली सफलता

रोहतास जिले के दिनारा प्रखंड की करहंशी पंचायत के धरहरा गांव की रहने वाली सुधा सिंह ने BPSC परीक्षा पास करने के लिए कई साल मेहनत की। वह 68वीं BPSC परीक्षा के इंटरव्यू तक पहुंची थीं, लेकिन उनका चयन नहीं हो सका। इसके बाद उन्होंने 69वीं BPSC परीक्षा दी। इस बार भी इंटरव्यू में सफलता नहीं मिली।

 दो बार इंटरव्यू में नहीं मिली सफलता, तीसरी कोशिश में SDO बनीं सुधा सिंह, हासिल की 167वीं रैंक

दो बार अंतिम चरण तक पहुंचकर बाहर होने के बाद भी सुधा ने तैयारी जारी रखी। उन्होंने अपनी पिछली गलतियों को समझा और उन विषयों पर ज्यादा ध्यान दिया, जिनमें उन्हें सुधार करने की जरूरत थी।

जब 70वीं BPSC परीक्षा का रिजल्ट आने वाला था, तो सुधा पूरी रात जागती रहीं। उन्हें परिणाम का बेसब्री से इंतजार था। रिजल्ट में अपना नाम और 167वीं रैंक देखकर वह बेहद खुश हुईं। उन्होंने सबसे पहले अपने बड़े भाई और माता-पिता को फोन करके इसकी जानकारी दी।

पिता रांची में करते हैं ट्रांसपोर्ट का काम

सुधा सिंह के पिता जगनारायण सिंह वर्ष 1994 से झारखंड के रांची में रहकर ट्रांसपोर्ट का काम करते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं रही, लेकिन उन्होंने बच्चों की पढ़ाई को हमेशा महत्व दिया।

उनकी मां विंध्याचली देवी ने भी बेटी की पढ़ाई में पूरा सहयोग किया। सुधा तीन भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं। उनके बड़े भाई शशांक शेखर सिंह ने मुश्किल समय में उनका हौसला बढ़ाया और पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रेरित किया।

परिवार की आर्थिक परेशानियों के बावजूद सुधा ने अपने लक्ष्य से ध्यान नहीं हटाया। दो बार BPSC इंटरव्यू में असफल होने के बाद जब उन्होंने तीसरी कोशिश करने का फैसला किया, तब भी घरवालों ने उनका साथ दिया।

दिल्ली में रोजाना 8 से 12 घंटे करती थीं पढ़ाई

BPSC की तैयारी के लिए सुधा दिल्ली में रह रही थीं। यहां वह रोजाना करीब 8 से 12 घंटे पढ़ाई करती थीं। परीक्षा नजदीक आने पर कई बार देर रात तक पढ़ती रहती थीं। उनका ज्यादातर समय पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी में गुजरता था।

सुधा शुरुआत में सिविल सेवा में नहीं जाना चाहती थीं। उनका पहला सपना डिफेंस क्षेत्र में करियर बनाना था। इसके लिए उन्होंने कोशिश भी की, लेकिन SSB में सफल नहीं हो सकीं।

इसके बाद उनके बड़े भाई ने उन्हें सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने की सलाह दी। सुधा ने भाई की बात मानकर BPSC की तैयारी शुरू की। इस दौरान उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपनी मेहनत जारी रखी।

सरकारी स्कूल से की पढ़ाई, आरा से पूरी की ग्रेजुएशन

सुधा सिंह की शुरुआती पढ़ाई झारखंड में हुई थी। उन्होंने वर्ष 2013 में सरकारी स्कूल से मैट्रिक की परीक्षा पास की थी। इसमें उन्हें 75 प्रतिशत अंक मिले थे।

इसके बाद वर्ष 2015 में बिहार बोर्ड से इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की और 70 प्रतिशत अंक हासिल किए। आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने आरा स्थित वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय में दाखिला लिया।

वर्ष 2018 में उन्होंने 70 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातक की पढ़ाई पूरी की। ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर ध्यान देना शुरू किया। डिफेंस क्षेत्र में सफलता नहीं मिलने के बाद उन्होंने प्रशासनिक सेवा में जाने का लक्ष्य बनाया।

गया में चल रही ट्रेनिंग, अब UPSC पास करने की तैयारी

70वीं BPSC परीक्षा में सफलता हासिल करने के बाद सुधा सिंह फिलहाल गया में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। SDO के पद पर चयन होने के बाद भी वह अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहती हैं।

उनका अगला लक्ष्य संघ लोक सेवा आयोग यानी UPSC की परीक्षा पास करना है। सुधा आगे प्रशासनिक सेवा में बड़ी जिम्मेदारी निभाना चाहती हैं। इसके लिए वह तैयारी कर रही हैं।

सुधा का मानना है कि किसी परीक्षा में असफल होने के बाद तैयारी छोड़ना सही नहीं है। अगर पिछली गलतियों को समझकर दोबारा मेहनत की जाए, तो अगली कोशिश में बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।

BPSC की तैयारी करने वाले युवाओं को दिया संदेश

सुधा सिंह की सफलता उन युवाओं के लिए एक उदाहरण है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। वह दो बार BPSC के इंटरव्यू तक पहुंचीं, लेकिन चयन नहीं हुआ। इसके बावजूद उन्होंने तीसरी बार परीक्षा दी और 167वीं रैंक हासिल की।

सुधा का कहना है कि तैयारी के दौरान मुश्किल समय आ सकता है, लेकिन ऐसे समय में पढ़ाई और अपने लक्ष्य पर ध्यान बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने युवाओं को अपनी कमियों को सुधारने और लगातार मेहनत करने की सलाह दी।

आर्थिक परेशानियों के बीच पढ़ाई करके SDO के पद तक पहुंचने वाली सुधा की सफलता से उनके परिवार और गांव में खुशी है। अब उनका अगला सपना UPSC परीक्षा में सफलता हासिल करना है।

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