Gokul Dairy Election: राहुल गांधी का भाजपा पर जनादेश बदलने का आरोप, सुप्रीम कोर्ट जाएगी कांग्रेस

Gokul Dairy Election 2026: राहुल गांधी ने भाजपा पर जनादेश पलटने का आरोप लगाया है। कांग्रेस ने महाराष्ट्र सरकार के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बात

महाराष्ट्र के गोकुल डेयरी चुनाव में कांग्रेस समर्थित पैनल की जीत के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। राहुल गांधी ने भाजपा पर नियम बदलकर बहुमत हासिल करने की कोशिश का आरोप लगाया है। कांग्रेस इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रही है।

नई दिल्ली: महाराष्ट्र के कोल्हापुर में गोकुल डेयरी के चुनाव को लेकर सियासी लड़ाई तेज हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को भाजपा पर चुनाव नतीजों के बाद नियम बदलकर सत्ता हासिल करने की कोशिश का आरोप लगाया। विवाद की वजह महाराष्ट्र सरकार का वह प्रस्ताव है, जिसके तहत बड़ी सहकारी संस्थाओं के निदेशक मंडल में सरकारी प्रतिनिधियों को मतदान का अधिकार मिल सकेगा। कांग्रेस का कहना है कि इससे दूध उत्पादकों का दिया हुआ जनादेश बदल सकता है।

राहुल गांधी ने भाजपा पर क्यों लगाया वोट चोरी का आरोप?

महाराष्ट्र के कोल्हापुर की गोकुल डेयरी का चुनाव अब राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भाजपा पर आरोप लगाया है कि चुनाव हारने के बाद वह नियमों का सहारा लेकर सहकारी संस्था पर नियंत्रण हासिल करना चाहती है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि गोकुल में दूध उत्पादकों ने भाजपा को हराया, लेकिन इसके बाद नियम बदलने की कोशिश शुरू हो गई। 

उन्होंने आरोप लगाया कि चार नए निदेशकों को शामिल करके भाजपा समर्थित खेमे की संख्या 12 से 16 करने और बहुमत हासिल करने की तैयारी है। राहुल ने इसे दूध उत्पादकों के वोटों की चोरी और जनादेश में मिलावट बताया। उन्होंने भाजपा पर सत्ता के लिए लोकतांत्रिक फैसलों को कमजोर करने का आरोप भी लगाया।

हालांकि, महाराष्ट्र सरकार का कहना है कि प्रस्तावित बदलाव बड़ी सहकारी संस्थाओं के कामकाज को बेहतर बनाने के लिए हैं। अभी यह मामला राजनीतिक आरोपों और प्रस्तावित कानूनी बदलाव को लेकर है। चुनाव का नतीजा औपचारिक रूप से पलटे जाने की पुष्टि नहीं हुई है।

गोकुल डेयरी चुनाव में किसे मिली थीं कितनी सीटें?

कोल्हापुर जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ को गोकुल डेयरी के नाम से जाना जाता है। यह महाराष्ट्र की प्रमुख दूध सहकारी संस्थाओं में शामिल है। इसके निदेशक मंडल का चुनाव 19 अक्टूबर 2026 को हुआ था। इस चुनाव में कांग्रेस नेता सतेज पाटिल के नेतृत्व वाले राजर्षि शाहू शेतकरी समविचारी आघाड़ी पैनल ने 25 में से 13 सीटें जीत ली थीं। दूसरी तरफ भाजपा, शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के महायुति समर्थित पैनल को 12 सीटों पर जीत मिली।

एक सीट की बढ़त के साथ कांग्रेस समर्थित पैनल को निदेशक मंडल में बहुमत मिल गया था। इसके बाद अध्यक्ष पद पर चुनाव होना था, लेकिन यहां नया विवाद शुरू हो गया। 29 अक्टूबर को अध्यक्ष चुनाव के लिए बैठक बुलाई गई। महायुति समर्थित 12 निदेशक इसमें शामिल नहीं हुए। बैठक के लिए कम से कम 14 सदस्यों की मौजूदगी जरूरी थी, जबकि कांग्रेस समर्थित पैनल के पास 13 सदस्य ही थे।

पर्याप्त सदस्य मौजूद नहीं होने के कारण बैठक स्थगित कर दी गई। इसके बाद कांग्रेस समर्थित निदेशकों ने अलग बैठक में शशिकांत पाटिल चुयेकर को अध्यक्ष चुना, लेकिन डेयरी प्रशासन ने इस फैसले को मान्यता नहीं दी।

महाराष्ट्र सरकार ने नियमों में क्या बदलाव किया?

Gokul Dairy Election: राहुल गांधी का भाजपा पर जनादेश बदलने का आरोप, सुप्रीम कोर्ट जाएगी कांग्रेस

बुधवार, 4 नवंबर को महाराष्ट्र कैबिनेट ने सहकारी संस्थाओं से जुड़े कानून में बदलाव के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इसके तहत सालाना 500 करोड़ रुपये से अधिक कारोबार वाली और सरकारी सहायता प्राप्त बड़ी सहकारी संस्थाओं में पांच सरकारी नामित निदेशक रखने का प्रावधान है। इनमें चार निदेशकों को मतदान का अधिकार मिलेगा, जबकि पांचवां सदस्य सरकारी अधिकारी होगा और वोट नहीं दे सकेगा। नामित निदेशक स्वयं अध्यक्ष जैसे पदों का चुनाव नहीं लड़ सकेंगे।

इस बदलाव को लेकर कांग्रेस की सबसे बड़ी आपत्ति चार नए मतदान अधिकार वाले सदस्यों पर है। अगर ये चारों निदेशक महायुति समर्थित पैनल के पक्ष में मतदान करते हैं, तो उसका संख्या बल 12 से बढ़कर 16 हो सकता है। वहीं, कांग्रेस समर्थित पैनल के पास 13 निर्वाचित निदेशक हैं। ऐसे में अध्यक्ष पद के चुनाव का गणित बदलने की आशंका जताई जा रही है।

राज्य सरकार ने अपने फैसले के समर्थन में कहा है कि बड़ी सहकारी संस्थाओं में विशेषज्ञों की भागीदारी, बेहतर प्रशासन और वित्तीय निगरानी जरूरी है। सरकार के मुताबिक, नई व्यवस्था से निदेशक मंडल में गतिरोध दूर करने में भी मदद मिल सकती है।

कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट जाने का किया ऐलान

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने महाराष्ट्र सरकार के फैसले पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि चुनाव में स्पष्ट बहुमत मिलने के बावजूद कांग्रेस समर्थित पैनल को अध्यक्ष चुनने में परेशानी हो रही है। खेड़ा ने आरोप लगाया कि निर्वाचित निदेशक मंडल को काम करने देने के बजाय सरकार नए सदस्यों को मतदान का अधिकार देकर चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी। पार्टी का कहना है कि सहकारी संस्थाओं की स्वतंत्रता और दूध उत्पादकों के मतदान अधिकारों की रक्षा जरूरी है।

10 नवंबर को अध्यक्ष चुनाव, अब आगे क्या होगा?

गोकुल डेयरी के अध्यक्ष पद का मामला पहले ही बंबई हाई कोर्ट की कोल्हापुर पीठ तक पहुंच चुका है। अदालत ने 2 नवंबर को आदेश दिया था कि 10 नवंबर 2026 को अध्यक्ष पद के लिए नई बैठक बुलाई जाए। अदालत ने सभी 25 निर्वाचित निदेशकों को बैठक की सूचना देने का निर्देश भी दिया था। अब सरकार के नए प्रस्ताव के कारण इस चुनाव से पहले कानूनी विवाद बढ़ सकता है।

गोकुल डेयरी केवल एक स्थानीय दूध संघ नहीं है। इससे लाखों दूध उत्पादक जुड़े हैं और संस्था का सालाना कारोबार हजारों करोड़ रुपये में है। इसलिए इसके निदेशक मंडल पर नियंत्रण को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मुकाबला भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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