1 जनवरी 2027 से बदलेगा ई-वे बिल नंबर, कारोबारियों को करानी होगी सॉफ्टवेयर की जांच

GST ई-वे बिल नंबर 1 जनवरी 2027 से 12 की जगह 14 अंकों का होगा। कंसोलिडेटेड बिल में भी बदलाव होगा। जानें सॉफ्टवेयर अपडेट और नए नियमों की पूरी जानकारी।

जीएसटी नेटवर्क (GSTN) ने ई-वे बिल के नंबर में बदलाव करने की तैयारी शुरू कर दी है। अभी सामान की ढुलाई के लिए बनने वाले ई-वे बिल पर 12 अंकों का नंबर मिलता है। नई व्यवस्था में यह नंबर 14 अंकों का हो जाएगा। इसे 1 जनवरी 2027 से लागू करने का प्रस्ताव है। कारोबारियों के साथ उन कंपनियों को भी अपने सॉफ्टवेयर में बदलाव करना होगा, जो बिलिंग और ई-वे बिल बनाने की सुविधा देती हैं।

धनबाद: ट्रक से माल भेजने वाले व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों को नए साल से ई-वे बिल बनाते समय बदली हुई व्यवस्था का ध्यान रखना पड़ सकता है। GSTN ने 4 नवंबर 2026 की एडवाइजरी में ई-वे बिल नंबर को 12 से बढ़ाकर 14 अंकों का करने की जानकारी दी है। जिन कारोबारियों का बिलिंग सॉफ्टवेयर अभी सिर्फ 12 अंकों का नंबर स्वीकार करता है, उन्हें इसे अपडेट कराना होगा। ऐसा नहीं करने पर नई व्यवस्था शुरू होने के बाद ई-वे बिल का नंबर दर्ज करने या उसकी जांच करने में परेशानी आ सकती है।

ई-वे बिल का नंबर बदलेगा, व्यापारियों को क्या करना होगा

देश में सामान एक जगह से दूसरी जगह भेजने के लिए ई-वे बिल का इस्तेमाल किया जाता है। बड़ी संख्या में कारोबारी, ट्रांसपोर्ट कंपनियां और माल भेजने वाली फर्में हर दिन यह दस्तावेज तैयार करती हैं। अब इसके नंबर में बदलाव होने जा रहा है।

1 जनवरी 2027 से बदलेगा ई-वे बिल नंबर, कारोबारियों को करानी होगी सॉफ्टवेयर की जांच

फिलहाल सामान्य ई-वे बिल जारी होने पर 12 अंकों का एक अलग नंबर मिलता है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद यह नंबर 14 अंकों का होगा। यानी नंबर में दो अंक बढ़ जाएंगे।

कंसोलिडेटेड ई-वे बिल की नंबरिंग भी बदलेगी। अभी इसका नंबर 10 अंकों का होता है। प्रस्तावित व्यवस्था में इसे 11 अंकों का किया जाएगा। कंसोलिडेटेड ई-वे बिल का इस्तेमाल तब होता है, जब एक ही वाहन में अलग-अलग ई-वे बिल से जुड़ा सामान भेजा जा रहा हो।

जीएसटी नेटवर्क के अनुसार, देश में ई-वे बिल बनने की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में मौजूदा नंबरिंग सिस्टम की क्षमता आने वाले समय में कम पड़ सकती है। इसी परेशानी से बचने के लिए नंबर में अतिरिक्त अंक जोड़ने का फैसला लिया गया है।

यह बदलाव मुख्य रूप से ई-वे बिल की पहचान संख्या से जुड़ा है। जीएसटीएन की एडवाइजरी में सामान भेजने की सीमा, टैक्स दर या बिल की वैधता अवधि बदलने की कोई घोषणा नहीं की गई है।

बिलिंग सॉफ्टवेयर अपडेट नहीं किया तो हो सकती है परेशानी

नई नंबरिंग व्यवस्था का सबसे ज्यादा ध्यान उन कारोबारियों को रखना होगा, जो अपना ई-वे बिल अकाउंटिंग या बिलिंग सॉफ्टवेयर के जरिए बनाते हैं। कई कंपनियों के सिस्टम में अभी 12 अंकों का ई-वे बिल नंबर दर्ज करने की सुविधा है।

अगर ऐसे सॉफ्टवेयर में बदलाव नहीं किया गया, तो 14 अंकों वाला नया नंबर दर्ज करने में परेशानी आ सकती है। इससे बिल का रिकॉर्ड रखने, उसकी जांच करने या दूसरे सिस्टम में जानकारी भेजने के दौरान तकनीकी दिक्कत हो सकती है।

जीएसटी नेटवर्क ने करदाताओं के अलावा GST सुविधा प्रदाताओं (GSP), ERP सॉफ्टवेयर कंपनियों और API के जरिए ई-वे बिल सिस्टम से जुड़ी सेवाएं देने वाली संस्थाओं को भी तैयारी करने के लिए कहा है।

इन कंपनियों को अपने सॉफ्टवेयर, डेटाबेस और नंबर की जांच करने वाले नियमों में बदलाव करना होगा। खासकर यह देखना जरूरी होगा कि उनका सिस्टम नए प्रारूप वाले नंबर को बिना किसी गलती के स्वीकार कर रहा है या नहीं।

छोटे कारोबारियों को भी इस बदलाव की जानकारी रखनी चाहिए। यदि वे किसी बाहरी बिलिंग सॉफ्टवेयर या अकाउंटिंग सेवा का इस्तेमाल करते हैं, तो संबंधित सेवा प्रदाता से नए नंबरिंग प्रारूप के बारे में पूछ सकते हैं।

हालांकि, यह बदलाव हर कारोबारी के लिए एक जैसा तकनीकी काम नहीं होगा। जो लोग सीधे ई-वे बिल पोर्टल का इस्तेमाल करते हैं, उनकी तैयारी उन कंपनियों से अलग हो सकती है जिनके बिल अपने सॉफ्टवेयर से अपने आप तैयार होते हैं।

जनवरी से पहले होगी टेस्टिंग, जीएसटीएन ने दी तैयारी की सलाह

नई व्यवस्था शुरू करने से पहले जीएसटी नेटवर्क सॉफ्टवेयर कंपनियों और तकनीकी सेवा प्रदाताओं को परीक्षण का मौका देगा। इसके लिए ई-वे बिल पोर्टल के सैंडबॉक्स सिस्टम में नया प्रारूप उपलब्ध कराया जाएगा।

सैंडबॉक्स एक टेस्टिंग सिस्टम होता है। इसमें कंपनियां बिना अपने वास्तविक कारोबार को प्रभावित किए यह देख सकती हैं कि उनका सॉफ्टवेयर नए नंबरों के साथ सही काम कर रहा है या नहीं।

जीएसटीएन ने बताया है कि टेस्टिंग से जुड़ी सुविधा जल्द उपलब्ध कराई जाएगी। इसके साथ तकनीकी निर्देश भी ई-वे बिल पोर्टल पर जारी किए जाएंगे।

कारोबारियों के लिए जरूरी है कि वे सॉफ्टवेयर अपडेट होने के बाद उसकी जांच भी कर लें। केवल नंबर दर्ज करने की जगह बढ़ाना काफी नहीं होगा। जहां-जहां ई-वे बिल नंबर का इस्तेमाल होता है, उन सभी हिस्सों में नया प्रारूप सही तरीके से काम करना चाहिए।

मसलन, किसी कंपनी का बिलिंग सिस्टम ई-वे बिल नंबर को स्टोर कर ले, लेकिन उसका दूसरा सॉफ्टवेयर उसे स्वीकार न करे, तो रिकॉर्ड मिलाने में दिक्कत आ सकती है। इसलिए पूरे सिस्टम की जांच करना उपयोगी रहेगा।

जीएसटी नेटवर्क ने संबंधित कंपनियों और करदाताओं को एक जनवरी 2027 से काफी पहले तैयारी पूरी करने की सलाह दी है। इससे नई व्यवस्था शुरू होने पर ई-वे बिल बनाने और उससे जुड़े कामों में रुकावट आने की आशंका कम होगी।

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