हॉकी, क्रिकेट और शूटिंग से बदल रही मोहाली की पहचान, अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों से खेल नगरी बनने की तैयारी

मोहाली में एशियन चैंपियंस ट्रॉफी के मुकाबलों के बाद खेलों को नई पहचान मिली है। हॉकी, क्रिकेट और शूटिंग के आयोजनों से युवाओं को आगे बढ़ने के अवसर मिल रहे हैं।

चंडीगढ़ के नजदीक मोहाली अब बड़े खेल आयोजनों के लिए अपनी पहचान बना रहा है। एशियन चैंपियंस ट्रॉफी के मुकाबलों के बाद शहर में हॉकी को नई पहचान मिली है। क्रिकेट और शूटिंग की प्रतियोगिताएं भी स्थानीय खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का अवसर दे रही हैं।

मोहाली: चंडीगढ़ के पास बसे मोहाली की पहचान अब केवल आईटी कंपनियों और रिहायशी इलाकों तक सीमित नहीं रही। शहर में हॉकी, क्रिकेट और शूटिंग के बड़े मुकाबले आयोजित होने लगे हैं। हाल ही में एशियन चैंपियंस ट्रॉफी के सेमीफाइनल और फाइनल की मेजबानी मोहाली ने की। इससे शहर के खेल मैदान एक बार फिर चर्चा में आए हैं। ऐसे आयोजन पंजाब के युवाओं को खेलों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

एशियन चैंपियंस ट्रॉफी के मुकाबलों से मोहाली को मिली नई पहचान

मोहाली में पिछले दो दिन अंतरराष्ट्रीय हॉकी के नाम रहे। फेज-9 स्थित ओलिंपियन बलबीर सिंह सीनियर अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में 4 और 5 नवंबर को एशियन चैंपियंस ट्रॉफी के निर्णायक मुकाबले खेले गए। भारत समेत एशिया के कई देशों की टीमों ने इस प्रतियोगिता में हिस्सा लिया।

टूर्नामेंट की शुरुआत 27 अक्टूबर को जालंधर में हुई थी। वहां दो नवंबर तक लीग मैच खेले गए। इसके बाद सेमीफाइनल और पदक मुकाबलों के लिए टीमें मोहाली पहुंचीं। चार नवंबर को भारत ने दक्षिण कोरिया को 8-1 से हराकर फाइनल में जगह बनाई। इस मैच के साथ मोहाली के हॉकी स्टेडियम में पहली बार बड़े अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों का आयोजन हुआ।

पांच नवंबर को इसी मैदान पर खिताबी मुकाबला रखा गया। इस आयोजन ने शहर के हॉकी प्रेमियों को अपने घर के नजदीक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों का खेल देखने का मौका दिया।

मोहाली का हॉकी स्टेडियम पहले भी घरेलू प्रतियोगिताओं के लिए इस्तेमाल होता रहा है। लेकिन एशियन चैंपियंस ट्रॉफी जैसे बड़े टूर्नामेंट की मेजबानी से इसकी पहचान राष्ट्रीय स्तर से आगे बढ़ी है।

मैच देखने आए दर्शकों के लिए प्रवेश निशुल्क रखा गया था। इससे स्थानीय लोगों, खासकर स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय हॉकी देखने का अवसर मिला।

क्रिकेट के बाद शूटिंग में भी आगे बढ़ रहा मोहाली

मोहाली का नाम क्रिकेट प्रेमियों के लिए नया नहीं है। यहां पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन का आईएस बिंद्रा स्टेडियम लंबे समय से बड़े क्रिकेट मुकाबलों की मेजबानी करता रहा है। आईपीएल के अलावा यहां अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच भी खेले जा चुके हैं।

इन मुकाबलों की वजह से देश और विदेश के क्रिकेट खिलाड़ी मोहाली आते रहे हैं। शहर के लोगों को अपने नजदीक बड़े क्रिकेट आयोजनों का अनुभव मिला है। अब हॉकी के बड़े मुकाबलों ने इस खेल पहचान को और मजबूत किया है।

शूटिंग में भी मोहाली की मौजूदगी रही है। फेज-6 स्थित शूटिंग रेंज में ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी स्तर की प्रतियोगिताएं आयोजित हो चुकी हैं। इन आयोजनों में अलग-अलग विश्वविद्यालयों से आए खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया।

क्रिकेट, हॉकी और शूटिंग तीनों खेलों के लिए सुविधाएं होने से मोहाली के पास बड़े आयोजनों की मेजबानी करने का अवसर है। यहां खेल मैदानों के साथ चंडीगढ़ की नजदीकी भी महत्वपूर्ण है।

हालांकि, बड़े स्टेडियम होना ही किसी शहर को खेल नगरी बनाने के लिए काफी नहीं होता। इसके लिए नियमित प्रतियोगिताएं, अच्छे कोच और स्थानीय खिलाड़ियों को अभ्यास की सुविधाएं मिलना भी जरूरी है।

युवाओं को खेलों से जोड़ने में मिल सकती है मदद

पंजाब में युवाओं को खेलों की तरफ लाना लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। नशे की समस्या के बीच खेलों को युवाओं के लिए सकारात्मक गतिविधि के रूप में देखा जाता है। राज्य सरकार के 'रंगला पंजाब' के विचार में भी खुशहाल और सक्रिय समाज बनाने पर जोर दिया जाता है।

मोहाली में अंतरराष्ट्रीय मुकाबले होने से स्थानीय खिलाड़ियों को बड़े खेल आयोजनों का माहौल करीब से देखने का मौका मिलता है। जो बच्चे हॉकी या क्रिकेट सीख रहे हैं, उनके लिए अनुभवी खिलाड़ियों का प्रदर्शन देखना उपयोगी हो सकता है।

खासकर स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए ऐसे आयोजन खेलों के प्रति दिलचस्पी बढ़ाने का अवसर बन सकते हैं। हालांकि, केवल बड़े मुकाबले आयोजित होने से नई प्रतिभाएं तैयार नहीं हो जातीं। इसके लिए खिलाड़ियों को नियमित अभ्यास और प्रशिक्षण की सुविधाएं भी चाहिए।

स्थानीय स्तर पर खेल मैदानों की उपलब्धता, प्रशिक्षित कोच, आधुनिक उपकरण और प्रतियोगिताओं में भाग लेने के अवसर बढ़ाना जरूरी होगा। कई खिलाड़ियों को आर्थिक मदद की भी जरूरत पड़ती है, ताकि वे दूसरे शहरों में होने वाली प्रतियोगिताओं तक पहुंच सकें।

बड़े आयोजनों के साथ स्थानीय खिलाड़ियों पर भी देना होगा ध्यान

मोहाली में अंतरराष्ट्रीय हॉकी मुकाबलों का आयोजन शहर के खेल ढांचे के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। लेकिन इसका वास्तविक फायदा तभी बढ़ेगा, जब यहां के बच्चों और युवाओं को भी इन सुविधाओं का नियमित इस्तेमाल करने का मौका मिलेगा।

खेल विशेषज्ञों के लिए अब बड़ा सवाल यही है कि बड़े स्टेडियमों को स्थानीय प्रतिभाओं से किस तरह जोड़ा जाए। स्कूलों में खेल प्रतियोगिताएं बढ़ाने, कॉलेज स्तर पर नियमित टूर्नामेंट कराने और उभरते खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने से इस दिशा में काम किया जा सकता है।

मोहाली में मौजूद खेल सुविधाएं आसपास के इलाकों के खिलाड़ियों के लिए भी उपयोगी हो सकती हैं। यदि यहां अभ्यास और प्रतियोगिताओं के ज्यादा अवसर मिलें, तो युवाओं को खेल के लिए दूसरे शहरों पर कम निर्भर रहना पड़ेगा।

एशियन चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी के बाद मोहाली में हॉकी को लेकर चर्चा बढ़ी है। क्रिकेट और शूटिंग के साथ इस खेल का जुड़ना शहर के लिए नया अवसर है। अब देखना होगा कि आने वाले समय में यहां कितनी नियमित प्रतियोगिताएं आयोजित होती हैं और स्थानीय खिलाड़ियों को उनका कितना लाभ मिलता है।

Leave a comment