अयोध्या के 56 घाटों पर जलेंगे 30 लाख दीपक, नया रिकॉर्ड बनाने की तैयारी, सुरक्षा बढ़ी

अयोध्या में 7 नवंबर को 56 घाटों पर 30 लाख दीपक जलेंगे। 35 हजार स्वयंसेवक तैयारियों में जुटे हैं। 2100 ड्रोन का शो होगा और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।

अयोध्या में 7 नवंबर को दसवां दीपोत्सव मनाया जाएगा। सरयू नदी के 56 घाटों पर 30 लाख से ज्यादा दीपक जलाने की तैयारी है। करीब 35 हजार स्वयंसेवक आयोजन में जुटे हैं। सुरक्षा के लिए पूरे क्षेत्र को 20 जोन और 53 सेक्टर में बांटा गया है।

अयोध्या: रामनगरी में दीपोत्सव की तैयारियां अब अंतिम दौर में पहुंच गई हैं। शनिवार, 7 नवंबर को सरयू किनारे लाखों दीपक एक साथ जलाए जाएंगे। इस बार पिछले साल का रिकॉर्ड तोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। शुक्रवार को राम की पैड़ी सहित सभी घाटों पर अंतिम रिहर्सल और तैयारियों की जांच होगी। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा और यातायात के विशेष इंतजाम किए हैं।

राम की पैड़ी समेत 56 घाटों पर सजाए जा रहे लाखों दीपक

अयोध्या में इस बार दसवां दीपोत्सव आयोजित किया जा रहा है। सरयू नदी के किनारे राम की पैड़ी और आसपास के 56 घाटों पर मिट्टी के दीपक सजाए जा रहे हैं। इन दीपकों को जलाने के लिए अलग-अलग घाटों पर स्वयंसेवकों की ड्यूटी लगाई गई है।

अयोध्या के 56 घाटों पर जलेंगे 30 लाख दीपक, नया रिकॉर्ड बनाने की तैयारी, सुरक्षा बढ़ी

आयोजन से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, करीब 35 हजार स्वयंसेवक दीपोत्सव की तैयारियों में भाग ले रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या में कॉलेज और विश्वविद्यालयों के विद्यार्थी शामिल हैं। घाटों पर दीपक रखने के लिए पहले से डिजाइन तैयार किए गए हैं, ताकि सभी दीपक तय जगह पर रखे जा सकें।

गुरुवार तक घाटों पर करीब 12 लाख दीपक सजाए जाने की जानकारी सामने आई थी। शुक्रवार को बाकी दीपक लगाने और व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने का काम चल रहा है।

दीपकों को सजाने के अलावा तेल, बाती और दूसरी जरूरी सामग्री पहुंचाने की व्यवस्था भी की गई है। इतने बड़े आयोजन में सभी घाटों पर एक साथ दीपक जलाना आसान काम नहीं है। इसके लिए स्वयंसेवकों को अलग-अलग समूहों में जिम्मेदारी दी गई है।

अवध विश्वविद्यालय की टीम भी तैयारियों की निगरानी कर रही है। घाटों पर नियुक्त अधिकारी और स्वयंसेवक यह देख रहे हैं कि दीपक निर्धारित डिजाइन के अनुसार रखे जाएं और आयोजन के समय किसी तरह की परेशानी न हो।

पिछले साल जले थे 26.17 लाख दीपक, अब नया रिकॉर्ड बनाने का लक्ष्य

अयोध्या में दीपोत्सव की शुरुआत वर्ष 2017 में हुई थी। पहले आयोजन में करीब 1.71 लाख दीपक जलाए गए थे। इसके बाद हर साल दीपकों की संख्या बढ़ती गई।

साल 2021 में 9.41 लाख दीपक जलाए गए थे। अगले साल यह संख्या बढ़कर 15.76 लाख तक पहुंच गई। वर्ष 2023 में 22.23 लाख और 2024 में 25.12 लाख दीपक जलाए गए।

पिछले साल यानी 2025 में अयोध्या के घाटों पर 26.17 लाख दीपक जलाकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया गया था। इस बार आयोजन समिति ने 30 लाख से अधिक दीपक जलाने की तैयारी की है।

आयोजन को लेकर 30 से 33 लाख दीपकों की सजावट का लक्ष्य बताया जा रहा है। हालांकि, नया विश्व रिकॉर्ड बना है या नहीं, इसकी पुष्टि आयोजन पूरा होने और आधिकारिक गिनती के बाद ही होगी।

इस बार दीपोत्सव को लेकर रामनगरी के प्रमुख रास्तों, मंदिरों और घाटों पर भी सजावट की गई है। शहर में आने वाले श्रद्धालुओं को जगह-जगह रामायण से जुड़ी झांकियां और सांस्कृतिक कार्यक्रम देखने को मिलेंगे।

2100 ड्रोन से आसमान में दिखेगी रामायण की कहानी

दीपोत्सव में इस बार सिर्फ दीपकों की रोशनी ही नहीं, बल्कि तकनीक के जरिए भी रामायण के प्रसंग दिखाए जाएंगे। इसके लिए 2,100 ड्रोन का विशेष शो तैयार किया गया है।

ड्रोन शो में आसमान में अलग-अलग आकृतियां बनाकर भगवान श्रीराम की कथा से जुड़े दृश्य दिखाने की योजना है। पिछले साल के मुकाबले इस बार ड्रोन की संख्या भी बढ़ाई गई है।

सरयू तट पर लेजर शो और प्रोजेक्शन मैपिंग की भी व्यवस्था होगी। रामायण से जुड़े प्रसंगों को संगीत, रोशनी और डिजिटल तकनीक के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा।

कार्यक्रम में सरयू महाआरती भी होगी। इसके लिए 2,147 लोगों की भागीदारी की तैयारी की गई है। आरती के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठान होंगे।

दीपोत्सव में देश के अलग-अलग राज्यों की लोक कलाओं को भी जगह दी गई है। राजस्थान का घूमर, कर्नाटक का डोलू कुनिथा और बिहार की झिझिया जैसी प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी।

आयोजन में विदेशी कलाकारों की प्रस्तुतियां भी प्रस्तावित हैं। इससे दीपोत्सव में आने वाले लोगों को अलग-अलग क्षेत्रों की सांस्कृतिक परंपराएं देखने का अवसर मिलेगा।

20 जोन और 53 सेक्टर में बांटी अयोध्या, पुलिस का कड़ा पहरा

दीपोत्सव पर अयोध्या में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आने की संभावना है। इसी को देखते हुए पुलिस ने पूरे आयोजन क्षेत्र को 20 जोन और 53 सेक्टर में बांटा है।

सुरक्षा व्यवस्था संभालने के लिए 20 अपर पुलिस अधीक्षक और 45 पुलिस उपाधीक्षक स्तर के अधिकारियों की तैनाती की गई है। स्थानीय पुलिस के साथ दूसरे जिलों से भी अतिरिक्त पुलिसकर्मी बुलाए गए हैं।

भीड़ नियंत्रण के लिए पीएसी और आरएएफ की कंपनियां मौजूद रहेंगी। एटीएस, एसडीआरएफ, बम निरोधक दस्ते और डॉग स्क्वायड की टीमों को भी जिम्मेदारी दी गई है।

राम की पैड़ी, सरयू घाटों, प्रमुख मंदिरों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों वाले स्थानों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। आपात स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त टीमें भी तैयार रखी गई हैं।

अयोध्या के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. गौरव ग्रोवर के अनुसार, दीपोत्सव को सुरक्षित तरीके से संपन्न कराने के लिए पुलिसकर्मियों की ड्यूटी निर्धारित कर दी गई है। सुरक्षा व्यवस्था की लगातार निगरानी की जा रही है।

दीपोत्सव पर अयोध्या जाने वाले यात्रियों के लिए जरूरी जानकारी

दीपोत्सव के कारण अयोध्या में कई प्रमुख रास्तों पर यातायात प्रतिबंध लागू किए जा रहे हैं। रामपथ और धर्मपथ समेत आयोजन स्थल की ओर जाने वाले रास्तों पर सामान्य वाहनों की आवाजाही सीमित रह सकती है।

अयोध्या पुलिस की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, बाहरी ट्रैफिक डायवर्जन 6 नवंबर की मध्यरात्रि से 8 नवंबर तक, आयोजन और भीड़ समाप्त होने तक प्रभावी रहेगा।

ऐसे में बाहर से आने वाले यात्रियों को वाहन पार्किंग और पैदल जाने वाले रास्तों की जानकारी पहले से लेनी चाहिए। भीड़भाड़ वाले स्थानों पर पुलिस और प्रशासन के निर्देशों का पालन करना जरूरी होगा।

मुख्य दीपोत्सव समारोह 7 नवंबर को होगा। इसके बाद भी अयोध्या में सांस्कृतिक कार्यक्रम जारी रहेंगे। आयोजन का उद्देश्य धार्मिक परंपराओं के साथ शहर की सांस्कृतिक पहचान को सामने लाना है।

अब सभी की नजर शनिवार शाम पर है, जब राम की पैड़ी और सरयू के घाट लाखों दीपकों की रोशनी से जगमगाएंगे। नया रिकॉर्ड बनने की आधिकारिक घोषणा आयोजन और दीपकों की गिनती पूरी होने के बाद ही की जाएगी।

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