केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित हो गए हैं। दो निर्दलीय उम्मीदवारों के नामांकन खारिज होने के बाद कोई प्रतिद्वंद्वी नहीं बचा। यह सीट एल. मुरुगन के इस्तीफे से खाली हुई थी।
Rajya Sabha Election 2026: केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी अब मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद होंगे। गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को नामांकन वापस लेने की समयसीमा खत्म होने के बाद उन्हें निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया। उपचुनाव में उनके अलावा दो निर्दलीय उम्मीदवारों ने नामांकन किया था, लेकिन जांच के दौरान दोनों के पर्चे खारिज हो गए। इसके बाद मैदान में केवल पुरी बचे थे। इस सीट पर पहले 12 नवंबर को मतदान होना था, जिसकी अब जरूरत नहीं पड़ेगी।
बिना मतदान के कैसे जीत गए हरदीप सिंह पुरी?
मध्य प्रदेश में राज्यसभा की एक खाली सीट पर होने वाला उपचुनाव मतदान से पहले ही पूरा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार हरदीप सिंह पुरी ने निर्विरोध जीत दर्ज की है। गुरुवार दोपहर तीन बजे नामांकन वापस लेने की आखिरी समयसीमा खत्म होने के बाद रिटर्निंग ऑफिसर उमेश कुमार शर्मा ने उनके निर्वाचन की घोषणा की।
इस दौरान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने पुरी की ओर से निर्वाचन प्रमाणपत्र प्राप्त किया। उनके साथ उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और भाजपा के कई विधायक भी मौजूद रहे। दरअसल, इस उपचुनाव में हरदीप सिंह पुरी के अलावा राजकुमार लोहानी और कांते सयन्ना ने भी नामांकन दाखिल किया था। लेकिन 3 नवंबर को हुई जांच में दोनों के नामांकन पत्र नियमों के मुताबिक सही नहीं पाए गए।
इसके बाद सिर्फ भाजपा उम्मीदवार का नामांकन वैध बचा था। ऐसे में 5 नवंबर को नाम वापसी की अवधि पूरी होते ही पुरी को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया।
दो निर्दलीय उम्मीदवारों के नामांकन क्यों हुए रद्द?
राज्यसभा उपचुनाव में कांग्रेस समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार राजकुमार लोहानी और तेलंगाना के कांते सयन्ना ने नामांकन किया था। रिटर्निंग ऑफिसर के मुताबिक, राजकुमार लोहानी ने निर्धारित समय तक फॉर्म-26 का जरूरी शपथपत्र जमा नहीं किया था। इस दस्तावेज में उम्मीदवार को अपनी संपत्ति, देनदारियों और आपराधिक मामलों सहित जरूरी जानकारियां देनी होती हैं।
लोहानी ने दावा किया था कि उन्होंने दस्तावेज ईमेल के जरिए भेज दिया था, लेकिन निर्वाचन अधिकारी ने इसे निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं माना। दूसरी तरफ कांते सयन्ना का नामांकन पर्याप्त प्रस्तावकों के हस्ताक्षर नहीं होने के कारण खारिज हुआ। राज्यसभा चुनाव के नियमों के तहत नामांकन के लिए विधायकों की निर्धारित संख्या में सहमति जरूरी होती है। दोनों उम्मीदवारों के पर्चे खारिज होने के बाद पुरी का रास्ता साफ हो गया।
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कांग्रेस ने पुरी के नामांकन पर भी उठाए थे सवाल
नामांकन की जांच के दौरान कांग्रेस नेताओं ने हरदीप सिंह पुरी के दस्तावेजों पर भी आपत्ति जताई थी। मध्य प्रदेश विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे और अन्य नेताओं ने उनके फॉर्म-26 शपथपत्र में कथित कमियों का मुद्दा उठाया था। उनका कहना था कि दस्तावेजों में कुछ जरूरी जानकारी सही तरीके से नहीं दी गई है।
हालांकि, रिटर्निंग ऑफिसर उमेश कुमार शर्मा ने सभी आपत्तियों की जांच के बाद पुरी का नामांकन वैध पाया। उन्होंने कहा कि दस्तावेजों में ऐसी कोई कमी नहीं मिली, जिसके आधार पर नामांकन खारिज किया जा सके। कांग्रेस नेताओं ने निर्वाचन अधिकारी के इस फैसले पर असहमति जताई और इसे अदालत में चुनौती देने की बात कही थी। फिलहाल आधिकारिक चुनाव प्रक्रिया के तहत पुरी निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं।
एल. मुरुगन के इस्तीफे से खाली हुई थी राज्यसभा सीट
मध्य प्रदेश की यह राज्यसभा सीट भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। मुरुगन अप्रैल 2024 में मध्य प्रदेश से राज्यसभा के सदस्य चुने गए थे। उनका कार्यकाल अप्रैल 2030 तक चलना था, लेकिन अक्टूबर 2026 में उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता और केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दे दिया।
मुरुगन ने तमिलनाडु में भाजपा के संगठनात्मक काम पर अधिक ध्यान देने की बात कही थी। उनके इस्तीफे के कारण राज्यसभा की सीट पर उपचुनाव कराना जरूरी हो गया। चुनाव आयोग ने 22 अक्टूबर को उपचुनाव का कार्यक्रम घोषित किया था। इसके मुताबिक 12 नवंबर को मतदान और मतगणना होनी थी। लेकिन अब निर्विरोध निर्वाचन होने के कारण वोटिंग की जरूरत नहीं रहेगी।











