ब्रिटेन सरकार ने स्थानीय प्रशासन को मजबूत करने के लिए बड़ा विकेंद्रीकरण प्रस्ताव पेश किया है। इसके तहत इंग्लैंड के क्षेत्रीय मेयरों को आयकर और बिजनेस रेट्स की आय का हिस्सा मिलेगा, जबकि विपक्ष ने योजना के वित्तीय प्रभाव और समानता पर सवाल उठाए हैं।
लंदन: ब्रिटेन की सरकार ने प्रशासनिक और वित्तीय विकेंद्रीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए इंग्लैंड के शहरों और क्षेत्रीय प्रशासन को अधिक आर्थिक अधिकार देने की योजना की घोषणा की है। प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने कहा कि सरकार का उद्देश्य वेस्टमिंस्टर से सत्ता और संसाधनों को स्थानीय स्तर तक पहुंचाना है ताकि विकास संबंधी फैसले स्थानीय जरूरतों के अनुसार लिए जा सकें। प्रस्तावित योजना के तहत इंग्लैंड के विभिन्न सिटी रीजन के निर्वाचित मेयरों को पहली बार आयकर (Income Tax) से मिलने वाले राजस्व का एक हिस्सा मिलेगा। इसके अलावा उन्हें अपने क्षेत्रों में एकत्र होने वाले बिजनेस रेट्स (Business Rates) का भी निर्धारित हिस्सा रखने की अनुमति दी जाएगी।
आयकर और बिजनेस रेट्स से स्थानीय विकास को मिलेगा बल
सरकार का मानना है कि यदि स्थानीय प्रशासन को कर राजस्व का हिस्सा मिलेगा तो वे अपने क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे, परिवहन, आवास, रोजगार और कौशल विकास जैसी परियोजनाओं पर अधिक प्रभावी तरीके से निवेश कर सकेंगे। हालांकि अभी यह तय नहीं किया गया है कि आयकर का कितना प्रतिशत स्थानीय प्रशासन को मिलेगा। इस संबंध में विस्तृत जानकारी शरद ऋतु में पेश होने वाले केंद्रीय बजट के दौरान वित्त मंत्रालय द्वारा जारी किए जाने की संभावना है। सरकारी सूत्रों के अनुसार बिजनेस रेट्स का हिस्सा अप्रैल 2027 से और आयकर का हिस्सा अप्रैल 2028 से लागू किया जा सकता है।
स्थानीय प्रशासन को मिलेंगे व्यापक अधिकार
नई योजना के तहत क्षेत्रीय प्रशासन को केवल वित्तीय अधिकार ही नहीं बल्कि कई प्रशासनिक क्षेत्रों में भी अधिक स्वतंत्रता दी जाएगी। इनमें आवास विकास, सार्वजनिक परिवहन, क्षेत्रीय आर्थिक विकास, कौशल प्रशिक्षण और स्थानीय निवेश योजनाओं पर निर्णय लेने की शक्तियां शामिल होंगी। सरकार का कहना है कि स्थानीय नेता अपने क्षेत्र की वास्तविक आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से समझते हैं, इसलिए उन्हें अधिक अधिकार मिलने से योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन संभव होगा।
सरकार का दावा- समुदाय में जुटा टैक्स उसी समुदाय पर होगा खर्च
प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने कहा कि सरकार अपने चुनावी वादे "ब्रिंग पावर होम" को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। उनके अनुसार स्थानीय समुदायों द्वारा दिया गया टैक्स उसी क्षेत्र के विकास में अधिक उपयोग किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे देशभर के हर क्षेत्र को अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार विकास योजनाएं लागू करने का अवसर मिलेगा और आर्थिक विकास अधिक संतुलित होगा।

मेयरों को परिवहन परियोजनाओं में भी मिलेगी अधिक स्वतंत्रता
सरकार ने यह भी घोषणा की है कि क्षेत्रीय मेयरों को परिवहन परियोजनाओं के लिए तेज मंजूरी प्रक्रिया उपलब्ध कराई जाएगी। नई व्यवस्था के अनुसार जिन परियोजनाओं के लिए पहले 200 मिलियन पाउंड से अधिक लागत होने पर केंद्रीय मंजूरी आवश्यक होती थी, अब यह सीमा बढ़ाकर 500 मिलियन पाउंड कर दी जाएगी। इससे ट्राम नेटवर्क, सड़क निर्माण और लाइट रेल जैसी परियोजनाओं को तेजी से लागू किया जा सकेगा। सरकार का मानना है कि इससे स्थानीय परिवहन व्यवस्था में सुधार होगा और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी।
ग्रामीण क्षेत्रों को लेकर उठे सवाल
हालांकि सरकार की इस योजना का सभी वर्गों ने स्वागत नहीं किया है। कई सांसदों और विपक्षी दलों ने आशंका जताई है कि जिन क्षेत्रों में निर्वाचित मेयर नहीं हैं, वहां के लोगों को समान लाभ नहीं मिल पाएगा। कॉर्नवाल सहित कई ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिनिधियों का कहना है कि उनके पास संयुक्त प्राधिकरण या क्षेत्रीय मेयर की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में उन्हें अन्य क्षेत्रों की तुलना में कम अधिकार और कम वित्तीय संसाधन मिल सकते हैं। सरकार ने इस आलोचना का जवाब देते हुए कहा कि केवल मेयर वाले क्षेत्र ही नहीं बल्कि अन्य रणनीतिक प्रशासनिक इकाइयों को भी निवेश और अधिकार दिए जाएंगे।
विपक्ष ने वित्तीय मॉडल पर उठाए सवाल
कंजर्वेटिव पार्टी ने सरकार की घोषणा को अधूरी बताते हुए कहा कि इसमें नए वित्तीय संसाधनों का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है। विपक्ष का तर्क है कि यदि कर संग्रह के आधार पर धन का वितरण किया गया तो आर्थिक रूप से कमजोर क्षेत्रों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। लिबरल डेमोक्रेट्स ने भी आशंका जताई कि यह व्यवस्था विभिन्न क्षेत्रों के बीच असमानता बढ़ा सकती है और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले नागरिक अपेक्षाकृत कम लाभ प्राप्त करेंगे। कुछ विपक्षी नेताओं ने यह भी कहा कि सरकार को पहले स्पष्ट करना चाहिए कि कम आय वाले क्षेत्रों को बराबरी का वित्तीय समर्थन कैसे मिलेगा।
सरकार तैयार कर रही है संतुलन व्यवस्था
सरकार ने संकेत दिया है कि वह ऐसी वित्तीय व्यवस्था विकसित कर रही है जिससे कम कर संग्रह वाले क्षेत्रों को भी आवश्यक आर्थिक सहायता मिलती रहे। इस तथाकथित "इक्वलाइजेशन सिस्टम" का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी क्षेत्र को केवल कम कर संग्रह के कारण विकास परियोजनाओं से वंचित न होना पड़े। सरकार का कहना है कि विस्तृत नीति दस्तावेज और वित्तीय मॉडल आगामी बजट के साथ सार्वजनिक किए जाएंगे।
ब्रिटेन में कर प्रणाली पर बढ़ी बहस
ब्रिटेन लंबे समय से अत्यधिक केंद्रीकृत कर व्यवस्था वाला देश माना जाता रहा है। विकसित देशों की तुलना में स्थानीय प्रशासन को मिलने वाले कर राजस्व का प्रतिशत काफी कम है। सरकार का मानना है कि वित्तीय विकेंद्रीकरण से स्थानीय प्रशासन अधिक जवाबदेह बनेगा, निवेश बढ़ेगा और क्षेत्रीय आर्थिक असमानता कम करने में मदद मिलेगी। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इस मॉडल की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कर राजस्व के वितरण और संतुलन की अंतिम व्यवस्था कैसी बनाई जाती है।












