पूर्व अंतरराष्ट्रीय अंपायर अनिल चौधरी का मानना है कि विराट कोहली जैसे जुनूनी और ऊर्जा से भरपूर खिलाड़ी क्रिकेट के आकर्षण को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
स्पोर्ट्स न्यूज़: भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार बल्लेबाज विराट कोहली अपनी शानदार बल्लेबाजी के साथ-साथ मैदान पर दिखने वाले जज्बे और आक्रामक रवैये के लिए भी जाने जाते हैं। क्रिकेट जगत में अक्सर उनकी आक्रामक शैली को लेकर चर्चा होती रहती है। इसी बीच भारत के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अंपायर अनिल चौधरी ने विराट कोहली के व्यक्तित्व और उनके खेल के अंदाज पर खुलकर अपनी राय रखी है।
अनिल चौधरी का मानना है कि विराट कोहली जैसे जुनूनी और प्रतिस्पर्धी खिलाड़ी क्रिकेट के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। उनके अनुसार, ऐसे खिलाड़ी खेल में ऊर्जा, रोमांच और दर्शकों की दिलचस्पी बनाए रखते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कोहली की आक्रामकता को गलत तरीके से नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि यह उनके प्रतिस्पर्धी स्वभाव का हिस्सा है, न कि किसी के प्रति व्यक्तिगत दुर्भावना का।
विराट कोहली को लंबे समय से जानते हैं अनिल चौधरी
एक बातचीत के दौरान अनिल चौधरी ने बताया कि उन्हें विराट कोहली को करीब से देखने और समझने का अवसर काफी पहले से मिला है। उन्होंने कहा कि अपने अंपायरिंग करियर के दौरान उन्होंने कोहली के शुरुआती दिनों से ही उनके मैचों में अंपायरिंग की है, जिसके कारण वे उनके स्वभाव और क्रिकेट के प्रति उनके दृष्टिकोण को अच्छी तरह समझते हैं।
चौधरी के अनुसार, विराट के अंदर जीतने की तीव्र इच्छा और खेल के प्रति गहरा समर्पण है। यही कारण है कि वे मैदान पर हमेशा पूरी ऊर्जा के साथ नजर आते हैं। उन्होंने कहा कि कोहली कभी-कभी भावनात्मक और आक्रामक दिख सकते हैं, लेकिन उनके मन में किसी खिलाड़ी, अंपायर या प्रतिद्वंद्वी के प्रति व्यक्तिगत नकारात्मक भावना नहीं होती।
"ऐसे खिलाड़ी न हों तो खेल उबाऊ हो जाएगा"
अनिल चौधरी ने कहा कि क्रिकेट केवल तकनीक और आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि इसमें भावनाएं और प्रतिस्पर्धा भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। उनके अनुसार, विराट कोहली जैसे खिलाड़ी मैदान पर जो जुनून लेकर आते हैं, वही खेल को अधिक आकर्षक बनाता है। उन्होंने कहा कि कई बार कोहली अपनी भावनाएं खुलकर व्यक्त करते हैं, लेकिन जब उन्हें लगता है कि कोई फैसला सही है या किसी ने अच्छा प्रदर्शन किया है, तो वे उसकी सराहना करने से भी पीछे नहीं हटते। चौधरी के मुताबिक, यही खेल भावना उन्हें अन्य खिलाड़ियों से अलग बनाती है।
क्रिकेट विशेषज्ञों का भी मानना है कि दर्शक केवल रन और विकेट देखने के लिए ही नहीं, बल्कि खिलाड़ियों के व्यक्तित्व और मैदान पर उनकी अभिव्यक्ति के लिए भी खेल से जुड़े रहते हैं।
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गंभीर-कोहली विवाद पर क्या बोले पूर्व अंपायर?
भारतीय क्रिकेट इतिहास के चर्चित मैदानी विवादों में से एक विराट कोहली और गौतम गंभीर के बीच हुई बहस को भी अक्सर याद किया जाता है। इस विषय पर अनिल चौधरी ने कहा कि आक्रामकता कई खिलाड़ियों के खेल का स्वाभाविक हिस्सा होती है, विशेषकर उन खिलाड़ियों के लिए जो जीत को लेकर बेहद जुनूनी होते हैं।
उन्होंने कहा कि उत्तर भारत के कई क्रिकेटरों की खेल शैली स्वाभाविक रूप से आक्रामक रही है। स्थानीय और घरेलू क्रिकेट में भी ऐसे खिलाड़ियों को इसी अंदाज में खेलते देखा गया है। चौधरी का मानना है कि यदि ऐसे खिलाड़ियों की आक्रामकता को पूरी तरह नियंत्रित करने की कोशिश की जाए, तो उनके प्रदर्शन पर भी असर पड़ सकता है।
नॉन-स्ट्राइकर एंड रन-आउट विवाद पर भी रखी राय
क्रिकेट में नॉन-स्ट्राइकर एंड पर बल्लेबाज को रन-आउट करने को लेकर लंबे समय से बहस होती रही है। कुछ लोग इसे खेल भावना के खिलाफ मानते हैं, जबकि अन्य इसे नियमों के अनुरूप बताते हैं। इस मुद्दे पर अनिल चौधरी ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि बल्लेबाज गेंद फेंके जाने से पहले अपनी क्रीज छोड़ देता है और अनुचित लाभ लेने की कोशिश करता है, तो उसे रन-आउट करना नियमों के दायरे में पूरी तरह सही है।
उन्होंने यह भी अनुमान जताया कि भविष्य में क्रिकेट के नियमों में इस विषय पर और स्पष्टता लाई जा सकती है। उनके अनुसार, क्रिकेट प्रशासक ऐसा सिस्टम ला सकते हैं जिसमें पहले चेतावनी दी जाए और बार-बार गलती होने पर रन पेनल्टी जैसी व्यवस्था लागू की जाए।










