ऑस्ट्रेलिया के धाकड़ बल्लेबाज ग्लेन मैक्सवेल अब इंटरनेशनल क्रिकेट में खेलते नहीं दिखेंगे। 38 साल के मैक्सवेल ने संन्यास ले लिया है। वह तीन वर्ल्ड कप जीतने वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम में शामिल रहे हैं। हालांकि, आईपीएल और बिग बैश लीग में उनका खेलना जारी रहेगा।
स्पोर्ट्स डेस्क: ऑस्ट्रेलिया के स्टार ऑलराउंडर ग्लेन मैक्सवेल ने इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास ले लिया है। करीब 14 साल तक ऑस्ट्रेलिया के लिए खेलने वाले मैक्सवेल ने 3 नवंबर 2026 को अपने फैसले की जानकारी दी। उन्होंने जून 2025 में ही वनडे क्रिकेट छोड़ दिया था और अब टी20 इंटरनेशनल से भी संन्यास ले लिया है। मैक्सवेल अपनी तेज बल्लेबाजी और मैदान के चारों तरफ शॉट लगाने के लिए मशहूर रहे हैं।
जब वह क्रीज पर होते थे, तो विरोधी टीम के गेंदबाजों के लिए उन्हें रोकना आसान नहीं होता था। फैंस उन्हें 'द बिग शो' भी कहते हैं। अपने करियर में उन्होंने कई बार ऐसे मैच जिताए, जिनमें ऑस्ट्रेलिया की हार लगभग तय नजर आ रही थी।
आखिर ग्लेन मैक्सवेल ने क्यों लिया संन्यास?
मैक्सवेल ने अपने संन्यास को लेकर 'द फाइनल वर्ड' पॉडकास्ट में बात की। उन्होंने बताया कि क्रिकेट छोड़ने का फैसला उन्होंने अचानक नहीं लिया। पिछले कुछ समय से उनके मन में यह बात चल रही थी कि अब इंटरनेशनल क्रिकेट से अलग हो जाना चाहिए। उन्होंने विक्टोरिया की तरफ से घरेलू वनडे और चार दिवसीय क्रिकेट नहीं खेलने का भी फैसला किया है।
मैक्सवेल के लिए यह टीम हमेशा खास रही है। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने अपने साथी खिलाड़ियों को संन्यास की बात बताई, तो वह काफी भावुक हो गए। आखिर इतने साल एक साथ खेलने के बाद टीम से अलग होना उनके लिए भी आसान नहीं था। मैक्सवेल की इच्छा थी कि वह नवंबर में इंग्लैंड के खिलाफ मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर अपना आखिरी इंटरनेशनल मैच खेलें।
लेकिन ऑस्ट्रेलियाई चयनकर्ता अब युवा खिलाड़ियों को आगे लाना चाहते हैं। ऐसे में मैक्सवेल को मैदान पर आखिरी बार खेलने का मौका नहीं मिल सका। उन्होंने चयनकर्ताओं के फैसले पर कोई नाराजगी नहीं जताई।
अफगानिस्तान के खिलाफ खेली पारी आज भी याद है
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ग्लेन मैक्सवेल का नाम आते ही 2023 वनडे वर्ल्ड कप में अफगानिस्तान के खिलाफ खेली गई उनकी पारी याद आ जाती है। मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में उस दिन ऑस्ट्रेलिया की हालत बेहद खराब थी। टीम को जीत के लिए 292 रन बनाने थे, लेकिन 91 रन तक पहुंचते-पहुंचते सात बल्लेबाज आउट हो गए। उस समय किसी को उम्मीद नहीं थी कि ऑस्ट्रेलिया यह मैच जीत पाएगा। लेकिन मैक्सवेल दूसरे ही इरादे से मैदान पर टिके थे।
बल्लेबाजी के दौरान उनके पैरों में इतनी ऐंठन हो रही थी कि वह दौड़ भी नहीं पा रहे थे। कई बार दर्द के कारण उन्हें मैदान पर रुकना पड़ा। इसके बावजूद मैक्सवेल ने बल्लेबाजी नहीं छोड़ी। उन्होंने 128 गेंदों पर नाबाद 201 रन बनाकर ऑस्ट्रेलिया को तीन विकेट से जीत दिला दी। दूसरे छोर पर पैट कमिंस उनका साथ देते रहे।
उस मैच में मैक्सवेल की बल्लेबाजी देखकर हर कोई हैरान रह गया था। इसी वर्ल्ड कप में उन्होंने नीदरलैंड के खिलाफ 40 गेंदों में शतक लगाया था। उस वक्त यह वनडे वर्ल्ड कप में सबसे तेज शतक का रिकॉर्ड था।
14 साल के करियर में बनाए हजारों रन
मैक्सवेल ने साल 2012 में अफगानिस्तान के खिलाफ अपना पहला इंटरनेशनल वनडे मैच खेला था। शुरुआत से ही वह अपने अलग तरह के शॉट खेलने के लिए मशहूर हो गए थे। गेंद चाहे तेज गेंदबाज की हो या स्पिनर की, मैक्सवेल बड़े शॉट लगाने से पीछे नहीं हटते थे। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के लिए कुल 286 इंटरनेशनल मैच खेले। इनमें 149 वनडे, 130 टी20 और सात टेस्ट शामिल हैं। उनके नाम तीनों फॉर्मेट में मिलाकर 7,226 रन और 136 विकेट दर्ज हैं।
मैक्सवेल ने वनडे में 3,990 रन, टी20 इंटरनेशनल में 2,897 रन और टेस्ट क्रिकेट में 339 रन बनाए। उन्होंने अपना आखिरी टेस्ट मैच 2017 में खेला था। इसके बाद वह ज्यादातर वनडे और टी20 टीम का हिस्सा रहे।
तीन वर्ल्ड कप जीते, रोहित शर्मा के बराबर पहुंचे
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ऑस्ट्रेलिया के लिए खेलते हुए मैक्सवेल ने तीन वर्ल्ड कप खिताब जीते। वह 2015 और 2023 की वनडे वर्ल्ड कप विजेता टीम में थे। इसके अलावा 2021 में जब ऑस्ट्रेलिया ने टी20 वर्ल्ड कप जीता, तब भी मैक्सवेल टीम का हिस्सा थे। टी20 इंटरनेशनल में उन्होंने पांच शतक लगाए हैं। इस मामले में उनका नाम भारत के रोहित शर्मा के साथ लिया जाता है। मैक्सवेल सिर्फ बल्ले से ही नहीं, बल्कि अपनी फुर्तीली फील्डिंग और ऑफ स्पिन गेंदबाजी से भी टीम के काम आते थे।
संन्यास के बाद भी आईपीएल में खेल सकते हैं मैक्सवेल
मैक्सवेल ने फिलहाल क्रिकेट से पूरी तरह दूरी बनाने का फैसला नहीं किया है। वह इंटरनेशनल क्रिकेट नहीं खेलेंगे, लेकिन आईपीएल और दूसरे टी20 टूर्नामेंट में खेलते हुए नजर आ सकते हैं। बिग बैश लीग में उनका मेलबर्न स्टार्स के साथ 2027-28 सीजन तक का करार है। आने वाले समय में वह अपनी फिटनेस पर ज्यादा ध्यान देना चाहते हैं, ताकि फ्रेंचाइजी क्रिकेट में खेल सकें।
मैक्सवेल का ऑस्ट्रेलिया के लिए सफर अब खत्म हो गया है। उनके करियर में कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन जब भी टीम को तेजी से रन बनाने की जरूरत पड़ी, मैक्सवेल ने खुलकर बल्लेबाजी की। खासकर अफगानिस्तान के खिलाफ उनकी 201 रन की पारी को क्रिकेट प्रेमी शायद ही कभी भूल पाएंगे।










