अरविंद केजरीवाल ने मोदी सरकार पर साधा निशाना, घरेलू हवाई यात्रा को सबके लिए सुलभ बनाने की मांग

अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार के फैसले पर आपत्ति जताई, कहा घरेलू उड़ानों के टिकट अब मध्यम वर्ग के लिए महंगे हो सकते हैं। सरकार को किराया नियंत्रित करना चाहिए।

अरविंद केजरीवाल ने घरेलू हवाई किराया सीमा हटाए जाने पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि टिकटों की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं और यह मध्यम वर्ग और छात्रों के लिए बोझ बनेगा। केजरीवाल ने सरकार से किराया नियंत्रित करने का आग्रह किया।

New Delhi: दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार के हालिया फैसले की कड़ी आलोचना की है, जिसमें घरेलू हवाई यात्रा पर लगी अस्थायी किराया सीमा को हटा दिया गया। केजरीवाल ने चेतावनी दी कि इस कदम से टिकटों की कीमतें मध्यम वर्ग के लिए असहनीय हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि हवाई यात्रा अब विलासिता नहीं, बल्कि जीवन की एक आवश्यकता बन चुकी है, इसलिए सरकार को किराया विनियमन के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए।

मोदी सरकार पर निशाना

केजरीवाल ने कहा कि मोदी सरकार हवाई किराए पर लगी सीमा को हटाकर टिकटों की कीमतों में अत्यधिक वृद्धि की राह खोल रही है। X पर पोस्ट में उन्होंने लिखा कि घरेलू उड़ानों के टिकट अब मध्यम वर्ग की पहुंच से बाहर होते जा रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार को टिकटों को नियंत्रित करने और नागरिकों के लिए हवाई यात्रा सुलभ बनाने पर ध्यान देना चाहिए। उनका तर्क है कि बिना किसी सीमा के किराया बढ़ने की संभावना है, जिससे आम लोगों के लिए यात्रा महंगी हो जाएगी।

नागरिक उड्डयन मंत्रालय का निर्णय

यह टिप्पणी नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MoCA) द्वारा शनिवार को लिए गए फैसले के तुरंत बाद आई है। मंत्रालय ने घरेलू उड़ानों पर लगे अस्थायी किराया प्रतिबंधों को वापस लिया है। मंत्रालय ने अपने निर्णय में यह तर्क दिया कि पूरे क्षेत्र में उड़ान संचालन में अब स्थिरता आ गई है। पिछले साल देश में विमानन क्षेत्र को भारी चुनौती का सामना करना पड़ा था, जिसमें इंडिगो एयरलाइंस में पायलटों की उपलब्धता संकट के कारण हजारों उड़ानें रद्द हो गई थीं।

पहले लागू की गई किराया सीमा

इस संकट के दौरान सरकार ने हवाई किराए पर अस्थायी सीमा लागू की थी। पहले निर्धारित सीमा के तहत 500 किमी तक की उड़ानों के लिए एक तरफा इकोनॉमी क्लास का किराया 7,500 रुपये से अधिक नहीं हो सकता था। वहीं, दिल्ली-मुंबई जैसे 1,000 से 1,500 किमी के व्यस्त मार्गों के लिए किराया 15,000 रुपये तक सीमित रखा गया था। 1,500 किमी से अधिक की दूरी पर उड़ानों का किराया 18,000 रुपये तक तय किया गया था। यह कदम टिकटों की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने और नागरिकों की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया था।

टिकटों की बढ़ती कीमतों का असर

केजरीवाल ने चेतावनी दी कि किराया सीमा हटने के बाद टिकटों की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। उनका कहना है कि बढ़ती कीमतें खासकर मध्यम वर्ग और छात्रों के लिए भारी बोझ साबित होंगी। उन्होंने यह भी कहा कि हवाई यात्रा अब रोजमर्रा की आवश्यकता बन गई है, इसलिए सरकार को इसे महंगा बनाने की बजाय सबके लिए सुलभ बनाने का प्रयास करना चाहिए।

सरकार से आग्रह

केजरीवाल ने केंद्र सरकार से अपील की है कि वह किराया विनियमन की प्रणाली को मजबूत करे। उन्होंने कहा कि इससे न केवल कीमतों में स्थिरता आएगी, बल्कि यात्रा करने वालों की सुरक्षा और सुविधा भी सुनिश्चित होगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि हवाई यात्रा अब सिर्फ विलासिता नहीं रही, बल्कि व्यवसाय, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे आवश्यक कामों के लिए भी जरूरी है।

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