पश्चिम बंगाल के आसनसोल में दो महीने 13 दिन के बच्चे को कथित तौर पर एक लाख रुपये में खरीदने के मामले में पुलिस ने दंपती और एक बिचौलिए को गिरफ्तार किया है। बच्चे को CWC के समक्ष भेजकर पुलिस नेटवर्क की जांच कर रही है।
आसनसोल: पश्चिम बंगाल के आसनसोल में दो महीने से अधिक उम्र के एक बच्चे को कथित तौर पर एक लाख रुपये में खरीदने का मामला सामने आने के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी है। आसनसोल उत्तर थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक दंपती और कथित बिचौलिए को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने दंपती के कब्जे से 2 महीने 13 दिन के बच्चे को बरामद किया है। मामले की जांच अब बच्चे की वास्तविक पहचान, उसके जैविक माता-पिता और कथित लेन-देन से जुड़े लोगों तक पहुंचने पर केंद्रित है।
शिकायत मिलने के बाद शुरू हुई जांच
पुलिस के अनुसार, मामले की शुरुआत ई-मेल के जरिए मिली शिकायत से हुई। शिकायत में बच्चे की कथित खरीद-फरोख्त से जुड़ी जानकारी दी गई थी। इसके बाद आसनसोल उत्तर थाना पुलिस ने जांच शुरू की और उत्तर धादका इलाके में रहने वाले एक दंपती पर नजर रखी।
जांच के दौरान पुलिस ने दंपती के कब्जे से बच्चे को बरामद किया। इसके बाद पूछताछ में बच्चे को लेकर दंपती के दावे और पुलिस को मिली जानकारी के बीच अंतर सामने आया। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दंपती के साथ एक कथित बिचौलिए को भी गिरफ्तार कर लिया।
दंपती और कथित बिचौलिए की गिरफ्तारी
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान विनोद कुमार गुप्ता, उम्र 47 वर्ष, उनकी पत्नी बबीता गुप्ता, उम्र 37 वर्ष, और अशोक भवालका के रूप में हुई है। विनोद और बबीता आसनसोल के उत्तर धादका लाल बंगला इलाके के निवासी बताए गए हैं, जबकि अशोक भवालका धादका रोड का रहने वाला है।
पुलिस के मुताबिक, विनोद सरकारी राशन की दुकान चलाता है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि बच्चे को दंपती तक पहुंचाने में अशोक भवालका की क्या भूमिका थी और क्या इस कथित व्यवस्था में अन्य लोग भी शामिल थे।
शुरुआत में बच्चे को अपना बताया
पुलिस सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के शुरुआती चरण में दंपती ने बच्चे को अपना जैविक पुत्र बताया था। हालांकि, जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिस के सामने कथित तौर पर अलग जानकारी आई। आरोप है कि बच्चे को बीरभूम जिले के सिउड़ी स्थित एक निजी नर्सिंग होम से करीब एक लाख रुपये के बदले हासिल किया गया था।
पुलिस अब इस दावे की स्वतंत्र रूप से जांच कर रही है। जांच का एक प्रमुख हिस्सा यह पता लगाना है कि बच्चे को वास्तव में किस व्यक्ति या माध्यम के जरिए दंपती तक पहुंचाया गया और कथित तौर पर एक लाख रुपये का भुगतान किसे किया गया था।
गोद लेने की कानूनी प्रक्रिया भी जांच के घेरे में
जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि बच्चे को दंपती के पास पहुंचाने के दौरान देश में लागू कानूनी गोद लेने की प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं। यदि किसी बच्चे को कानूनी प्रक्रिया के बाहर किसी व्यक्ति को सौंपा गया हो, तो मामला गंभीर कानूनी रूप ले सकता है।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि बच्चे की पहचान से संबंधित कोई दस्तावेज तैयार किया गया था या नहीं। जन्म प्रमाणपत्र और अन्य रिकॉर्ड की सत्यता की भी जांच की जा सकती है। जांचकर्ताओं को यह पता लगाना है कि कहीं बच्चे को दंपती का जैविक पुत्र बताने के लिए गलत दस्तावेजों का इस्तेमाल तो नहीं किया गया।
सिउड़ी के निजी नर्सिंग होम की भूमिका की जांच
मामले की जांच का दायरा आसनसोल से आगे बढ़कर बीरभूम के सिउड़ी तक पहुंच गया है। पुलिस कथित तौर पर उस निजी नर्सिंग होम की भूमिका की भी जांच कर रही है, जहां से बच्चे को हासिल किए जाने का आरोप सामने आया है।
जांचकर्ताओं के सामने कई सवाल हैं। बच्चे का जन्म कहां हुआ, जन्म से संबंधित रिकॉर्ड किसके नाम पर दर्ज हैं, उसे कथित तौर पर किसने दंपती को सौंपा और इस प्रक्रिया में किन लोगों ने मध्यस्थता की—इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
बच्चे को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के समक्ष भेजा गया
पुलिस ने बरामद बच्चे को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) के चेयरमैन के समक्ष भेज दिया है। अब संबंधित बाल संरक्षण प्राधिकरण बच्चे की सुरक्षा, देखभाल और संरक्षण से जुड़े फैसले करेगा।
फिलहाल पुलिस की प्राथमिकता बच्चे की पहचान और उसके जैविक माता-पिता का पता लगाना है। जांच में यह भी देखा जाएगा कि बच्चे की वर्तमान स्थिति से जुड़े दस्तावेज वास्तविक हैं या उनमें किसी प्रकार की हेराफेरी की गई है।
मानव तस्करी के संभावित नेटवर्क पर नजर
पुलिस इस मामले को केवल एक बच्चे के कथित अवैध लेन-देन तक सीमित मानकर नहीं चल रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या इसके पीछे बच्चों या मानव तस्करी से जुड़ा कोई व्यापक नेटवर्क सक्रिय है।
यदि जांच में अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश करेगी कि क्या पहले भी इसी तरह बच्चों को कथित तौर पर दूसरे लोगों को सौंपा गया था।
अदालत में पेश होंगे आरोपी
मामले में गिरफ्तार तीनों आरोपियों को अदालत में पेश कर पुलिस हिरासत की मांग किए जाने की बात सामने आई है। पूछताछ के दौरान पुलिस कथित लेन-देन, बच्चे को दंपती तक पहुंचाने वाले लोगों और दस्तावेजों से संबंधित जानकारी जुटाने का प्रयास करेगी।
पुलिस के अनुसार, मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और जुवेनाइल जस्टिस (केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन) एक्ट, 2015 की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोपों की पुष्टि अभी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
बच्चे के जैविक माता-पिता की तलाश
इस मामले का सबसे अहम सवाल बच्चे की वास्तविक पहचान और उसके जैविक माता-पिता से जुड़ा है। पुलिस जन्म रिकॉर्ड, नर्सिंग होम से संबंधित दस्तावेज और कथित आर्थिक लेन-देन की कड़ियों को जोड़कर इस सवाल का जवाब तलाश रही है।
जांच में यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि बच्चे को कथित तौर पर एक लाख रुपये में दिए जाने का दावा कितना सही है और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे। पुलिस का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ मामले में और तथ्य सामने आ सकते हैं।
फिलहाल बच्चे को संरक्षण में लेकर संबंधित बाल कल्याण प्राधिकरण के समक्ष भेजा गया है। वहीं, गिरफ्तार तीनों आरोपियों से पूछताछ के जरिए पुलिस कथित नेटवर्क की पूरी कड़ी तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।












