रक्षाबंधन पर भाई को राखी बांधने के साथ तिलक लगाने की परंपरा है। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, कुमकुम, अक्षत, हल्दी, सिंदूर और केसर का इस्तेमाल सुख-समृद्धि और आपसी प्रेम से जोड़ा जाता है।
रक्षाबंधन: रक्षाबंधन पर भाई के तिलक में कुछ शुभ चीजों का इस्तेमाल करने की परंपरा बताई गई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुमकुम, अक्षत, हल्दी, सिंदूर और केसर को तिलक में शामिल करने से सकारात्मकता, सुख-समृद्धि और पारिवारिक प्रेम की कामना की जाती है। हालांकि, ये बातें धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं।
कुमकुम से तिलक लगाने की मान्यता
रक्षाबंधन पर भाई की कलाई में राखी बांधने के बाद माथे पर तिलक लगाने की परंपरा है। तिलक के लिए कुमकुम का इस्तेमाल प्रमुख रूप से किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं में लाल रंग को ऊर्जा और शक्ति से जोड़ा जाता है। इसी आधार पर कुमकुम का तिलक भाई के जीवन में शक्ति और सकारात्मकता की कामना के लिए लगाया जाता है।

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, कुमकुम का संबंध मंगल ग्रह से माना जाता है। इसलिए तिलक में इसकी एक चुटकी मिलाने को ऊर्जा और आत्मविश्वास से जोड़कर देखा जाता है।
अक्षत और हल्दी का भी किया जाता है इस्तेमाल
अक्षत यानी बिना टूटे चावल का पूजा-पाठ में विशेष महत्व माना जाता है। रक्षाबंधन के तिलक में अक्षत लगाने की परंपरा भी कई परिवारों में देखने को मिलती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अक्षत को समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है।
इसी तरह हल्दी को भी शुभ और मांगलिक वस्तु माना जाता है। तिलक में हल्दी का इस्तेमाल परिवार में सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना से जोड़ा जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं में हल्दी का संबंध बृहस्पति ग्रह से माना जाता है।
सिंदूर और केसर से जुड़ी मान्यताएं
रक्षाबंधन पर कुछ परिवारों में भाई के तिलक के लिए सिंदूर का भी इस्तेमाल किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सिंदूर को शुभता और सौभाग्य से जोड़ा जाता है। इसे तिलक में शामिल करने को भाई के जीवन में सकारात्मकता और पारिवारिक प्रेम की कामना से जोड़ा जाता है।
केसर का तिलक भी शुभ माना जाता है। धार्मिक परंपराओं में केसर को पवित्रता, ऊर्जा और समृद्धि से संबंधित माना जाता है। इसी वजह से रक्षाबंधन पर भाई के माथे पर केसर का तिलक लगाने की परंपरा कुछ स्थानों पर प्रचलित है।
तिलक में शुभ सामग्री का महत्व
रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम, स्नेह और विश्वास को मजबूत करने का अवसर माना जाता है। राखी बांधने के साथ तिलक लगाने की परंपरा इसी भावना का हिस्सा है। अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में तिलक लगाने की विधि और उसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री अलग हो सकती है।
कुमकुम, अक्षत, हल्दी, सिंदूर और केसर से जुड़ी उपरोक्त बातें धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए। रक्षाबंधन पर तिलक लगाते समय परिवार की परंपरा और आस्था के अनुसार सामग्री का चयन किया जा सकता है।










