केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि सोशल मीडिया और टेक प्लेटफॉर्म्स अब AI से बने फेक फोटो, वीडियो और कंटेंट के लिए पूरी जिम्मेदारी लेंगे। डीपफेक और भ्रामक जानकारी समाज और लोकतंत्र के लिए खतरा हैं। किसी भी व्यक्ति से जुड़ा AI कंटेंट बनाने से पहले उसकी स्पष्ट सहमति लेना अनिवार्य होगा।
AI Content and Digital Security: केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दिल्ली में आयोजित डीएनपीए कार्यक्रम में स्पष्ट किया कि अब टेक और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद सामग्री की पूरी जिम्मेदारी लेनी होगी। उन्होंने कहा कि डीपफेक और फेक वीडियो समाज और लोकतांत्रिक संस्थाओं के भरोसे पर असर डाल रहे हैं, इसलिए किसी का फोटो, वीडियो या आवाज़ AI द्वारा बनाने से पहले उसकी सहमति अनिवार्य होगी। यह कदम आम नागरिकों के डिजिटल अधिकार और ऑनलाइन सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
AI कंटेंट पर अब प्लेटफॉर्म्स होंगे जवाबदेह
केंद्रीय सूचना और प्रसारण तथा आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दिल्ली में आयोजित डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA) कार्यक्रम में कहा कि अब टेक और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद कंटेंट की पूरी जिम्मेदारी लेनी होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि डीपफेक और फेक न्यूज समाज और लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा हैं, इसलिए किसी व्यक्ति का एआई द्वारा फोटो, वीडियो या आवाज़ बनाने से पहले उसकी स्पष्ट सहमति अनिवार्य होगी।
डीपफेक और फेक न्यूज का खतरा
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से किसी का चेहरा या आवाज़ बदलकर वीडियो बनाना आसान हो गया है। इसके चलते आम नागरिकों की निजता और सुरक्षा खतरे में हैं। अश्विनी वैष्णव ने कहा कि समाज में भरोसा तभी टिक सकता है जब मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स सच्ची और सुरक्षित सामग्री प्रदान करें। उन्होंने जोर दिया कि जनता को सही जानकारी मिलना उनका बुनियादी अधिकार है।
डीपफेक वीडियो और भ्रामक कंटेंट बच्चों की सुरक्षा, राजनीतिक विश्वसनीयता और आम जनता के भरोसे पर असर डाल रहे हैं। इसलिए सरकार ने स्पष्ट किया कि भविष्य की नीतियों में ऑनलाइन सामग्री की प्रामाणिकता और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।

प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी और सहमति का नियम
अब किसी भी व्यक्ति से जुड़ा एआई कंटेंट बनाने से पहले उसकी स्पष्ट सहमति लेना जरूरी होगा। इसका मतलब है कि बिना अनुमति कोई भी आपका डिजिटल अवतार नहीं बना पाएगा। इस कदम का उद्देश्य आम नागरिक के डिजिटल अधिकारों और निजता की रक्षा करना है।
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि प्लेटफॉर्म्स को अपनी तकनीक और कंटेंट मॉडरेशन के जरिए फेक और सिंथेटिक कंटेंट पर लगाम लगानी होगी। यह कदम मीडिया विश्वसनीयता बनाए रखने और जनता का भरोसा मजबूत करने के लिए जरूरी है।
समाज में भरोसा और डिजिटल सुरक्षा
मंत्री ने समाज में भरोसे का महत्व रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका, विधायिका और मीडिया जैसी संस्थाओं के भरोसे पर ही समाज टिकता है। ऑनलाइन खतरों ने इस भरोसे को चुनौती दी है। बच्चों की सुरक्षा और डिजिटल सामग्री की प्रामाणिकता सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है।
वैष्णव ने बताया कि डिजिटल दुनिया में जनता के भरोसे और सुरक्षा को बनाए रखना प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी है। यह न केवल कानूनी दृष्टि से जरूरी है बल्कि सामाजिक और नैतिक दायित्व भी है।











