एशियन गेम्स 2026 के महिला हॉकी फाइनल में भारतीय टीम ने चीन को 1-0 से हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया। भारत की ओर से मैच का एकमात्र गोल 10वें मिनट में किया गया, जिसके बाद दोनों टीमों की ओर से कोई और गोल नहीं हो सका।
Women’s Hockey: भारतीय महिला हॉकी टीम ने एशियन गेम्स 2026 में इतिहास रच दिया। फाइनल में डिफेंडिंग चैंपियन चीन को 1-0 से हराकर भारत ने 44 साल बाद महिला हॉकी का स्वर्ण पदक जीता। लालरेमसियामी ने 10वें मिनट में निर्णायक गोल किया, जबकि गोलकीपर सविता पूनिया के शानदार बचाव और भारतीय डिफेंस ने आखिरी सीटी तक चीन को बराबरी करने से रोके रखा। इस जीत के साथ भारत ने 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक के लिए सीधे क्वालीफाई भी कर लिया।
10वें मिनट में लालरेमसियामी ने दिलाई बढ़त
भारत और चीन के बीच महिला हॉकी का फाइनल जापान में खेला गया। चीन ने शुरुआत में गेंद पर कब्जा बनाए रखने की कोशिश की, लेकिन भारतीय टीम ने जल्द ही आक्रामक रुख अपनाया। मुकाबले के 10वें मिनट में लालरेमसियामी ने शानदार रिवर्स हिट के जरिए गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचा दिया। यह गोल उनके लिए व्यक्तिगत रूप से भी खास रहा, क्योंकि वह फाइनल में अपना 200वां अंतरराष्ट्रीय मुकाबला खेल रही थीं। उनका यह गोल पूरे मैच का निर्णायक गोल साबित हुआ।
गोल के बाद भारत को एक और मौका मिला, लेकिन पेनल्टी कॉर्नर को टीम गोल में नहीं बदल सकी। चीन ने भी पहले क्वार्टर के बाकी हिस्से में दबाव बनाने की कोशिश की, मगर भारतीय डिफेंस ने बढ़त बरकरार रखी।
सविता पूनिया ने बचाया पेनल्टी स्ट्रोक
दूसरे क्वार्टर में चीन ने अपनी रणनीति बदली और भारतीय सर्कल में लगातार प्रवेश करने लगा। इस दौरान चीन को बराबरी करने का बड़ा मौका मिला, जब उसे पेनल्टी स्ट्रोक दिया गया। चीन की खिलाड़ी झांग यिंग के पास स्कोर बराबर करने का सुनहरा अवसर था, लेकिन भारतीय गोलकीपर सविता पूनिया ने शानदार डाइव लगाकर पेनल्टी स्ट्रोक बचा लिया। उनका यह बचाव मैच के सबसे महत्वपूर्ण क्षणों में से एक रहा।
सविता के इस शानदार प्रदर्शन के बाद भारतीय डिफेंस का आत्मविश्वास और मजबूत हुआ। चीन लगातार हमले करता रहा, लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने गोल के सामने मजबूत दीवार खड़ी कर दी और हाफ टाइम तक 1-0 की बढ़त कायम रखी।

तीसरे और चौथे क्वार्टर में डिफेंस ने संभाला मोर्चा
दूसरे हाफ में चीन ने बराबरी के लिए दबाव और बढ़ा दिया। भारतीय टीम को कई मौकों पर अपने डिफेंस के साथ-साथ गोलकीपर पर भी निर्भर रहना पड़ा। चीन को सर्कल के अंदर मौके मिले, लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने समय रहते गेंद को क्लियर कर दिया। कप्तान सलीमा टेटे के नेतृत्व में भारतीय टीम ने खेल को नियंत्रित करने की कोशिश की। तीसरे क्वार्टर में चीन को पेनल्टी कॉर्नर भी मिले, लेकिन भारत ने उन्हें गोल में तब्दील नहीं होने दिया।
आखिरी क्वार्टर में चीन ने बराबरी के लिए पूरी ताकत लगा दी। दबाव बढ़ने के बावजूद भारतीय डिफेंस ने धैर्य नहीं खोया। खिलाड़ियों ने जरूरी मौकों पर गेंद को दूर किया और चीन को गोल करने का मौका नहीं दिया। अंतिम सीटी बजते ही भारत ने 1-0 से मुकाबला अपने नाम कर लिया और 44 साल से चले आ रहे स्वर्ण पदक के इंतजार को खत्म कर दिया।
1982 के बाद पहली बार महिला हॉकी में गोल्ड
एशियन गेम्स में भारत ने इससे पहले महिला हॉकी का स्वर्ण पदक 1982 में जीता था। उसके बाद लंबे समय तक टीम इस उपलब्धि को दोहरा नहीं सकी। 2026 में चीन को हराकर भारत ने दूसरी बार महिला हॉकी में एशियन गेम्स गोल्ड अपने नाम किया। भारत इससे पहले 1998 और 2018 में भी फाइनल तक पहुंचा था, लेकिन दोनों मौकों पर उसे रजत पदक से संतोष करना पड़ा था। इस बार टीम ने फाइनल में मौजूदा चैंपियन चीन को हराकर खिताब अपने नाम किया।
एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने का एक और बड़ा फायदा भारतीय महिला हॉकी टीम को मिला। इस जीत के साथ भारत ने 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक के लिए सीधे क्वालीफाई कर लिया है।









