कांग्रेस नेता पवन खेड़ा से असम क्राइम ब्रांच ने करीब 10 घंटे पूछताछ की और उन्हें आज फिर बुलाया गया है। मामला सीएम हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी पर लगाए गए पासपोर्ट और संपत्ति से जुड़े आरोपों और FIR से संबंधित है।
गुवाहाटी: असम पुलिस की क्राइम ब्रांच ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा से बुधवार को लगभग 10 घंटे तक पूछताछ की। यह पूछताछ एक हाई-प्रोफाइल राजनीतिक और कानूनी विवाद से जुड़ी है, जिसमें असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी पर लगाए गए आरोप शामिल हैं।
पुलिस ने संकेत दिया है कि मामले में आगे की जांच के लिए पवन खेड़ा को फिर से बुलाया जाएगा।
विवाद की शुरुआत: प्रेस कॉन्फ्रेंस से बढ़ा राजनीतिक टकराव
यह पूरा मामला 5 अप्रैल को शुरू हुआ, जब पवन खेड़ा ने दिल्ली और गुवाहाटी में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा के पास कथित रूप से तीन विदेशी पासपोर्ट हैं और अमेरिका में लगभग 50 हजार करोड़ रुपये की कंपनी से जुड़े आर्थिक हित हैं।

इन आरोपों के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया और विवाद तेजी से कानूनी मोड़ में बदल गया।
FIR और असम पुलिस की कार्रवाई
प्रेस कॉन्फ्रेंस के तुरंत बाद रिनिकी भुइयां सरमा ने गुवाहाटी क्राइम ब्रांच में पवन खेड़ा के खिलाफ मानहानि और अन्य धाराओं में FIR दर्ज कराई।
इसके बाद 7 अप्रैल को असम पुलिस ने दिल्ली स्थित पवन खेड़ा के आवास पर छापेमारी भी की। पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई जांच प्रक्रिया का हिस्सा थी।
जवाबी बयान और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए दावे झूठे और भ्रामक हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि केंद्र सरकार की जांच एजेंसियों के अनुसार, खेड़ा द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों में अनियमितताएं पाई गई हैं। सरमा ने कहा कि कानून अपना काम करेगा और जांच निष्पक्ष रूप से आगे बढ़ेगी।
पवन खेड़ा का रुख: सहयोग करने की बात
पूछताछ के बाद पवन खेड़ा ने कहा कि वह कानून का पालन करने वाले नागरिक हैं और जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करेंगे। उन्होंने कहा कि संविधान के तहत सभी प्रक्रियाओं का सम्मान किया जाएगा और वे जांच में शामिल होते रहेंगे। आज उन्हें फिर से पूछताछ के लिए बुलाया गया है, जिससे मामला और आगे बढ़ सकता है।
इस मामले में कई स्तरों पर कानूनी प्रक्रिया चल रही है।
10 अप्रैल को तेलंगाना हाईकोर्ट ने पवन खेड़ा को एक सप्ताह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी, ताकि वे असम में कानूनी प्रक्रिया का सामना कर सकें
इसके बाद असम सरकार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी
15 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी
- 17 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत बढ़ाने की मांग खारिज कर दी
- कोर्ट ने कहा कि खेड़ा को असम की अदालत में ही अपनी याचिका दाखिल करनी चाहिए
- इसके बाद मामला पूरी तरह असम की न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में आ गया।
गुवाहाटी हाईकोर्ट का अहम फैसला
24 अप्रैल को गुवाहाटी हाईकोर्ट ने पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। यह उनके लिए एक बड़ा कानूनी झटका माना गया।
इसके बाद उन्होंने फिर से सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जिससे मामला एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया।
राजनीतिक प्रभाव और टकराव
यह पूरा मामला भारत की दो प्रमुख राजनीतिक शक्तियों के बीच बढ़ते तनाव को भी दर्शाता है। एक ओर कांग्रेस विपक्ष में सरकार पर सवाल उठा रही है, वहीं दूसरी ओर असम सरकार और भाजपा नेतृत्व आरोपों को खारिज कर कानूनी कार्रवाई पर जोर दे रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आने वाले समय में और अधिक तीखा हो सकता है, खासकर जब इसमें चुनावी राजनीति और व्यक्तिगत आरोपों का मिश्रण शामिल हो।
डिजिटल और सार्वजनिक विमर्श में बढ़ा विवाद
सोशल मीडिया पर भी यह मामला तेजी से चर्चा में है। दोनों पक्षों के समर्थक अपने-अपने दावों के समर्थन में तर्क दे रहे हैं।
हालांकि, जांच एजेंसियों का कहना है कि वे केवल तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर आगे बढ़ रही हैं और किसी राजनीतिक दबाव में काम नहीं किया जाएगा।









