असम में 100 दिनों में ₹300 करोड़ की ड्रग्स नष्ट, CM हिमंत बोले- कार्रवाई जारी रहेगी

गुवाहाटी: असम में भाजपा सरकार के पहले 100 दिनों में करीब ₹300 करोड़ की जब्त ड्रग्स नष्ट की गईं। नलबाड़ी की पहली समर्पित नारकोटिक्स फैसिलिटी में हुआ निपटान।

असम में नशीले पदार्थों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हुई है। सरकार ने मौजूदा भाजपा शासन के पहले 100 दिनों में करीब ₹300 करोड़ की जब्त ड्रग्स नष्ट कीं। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि तस्करी के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा।

गुवाहाटी: असम सरकार ने मादक पदार्थों के खिलाफ अपनी कार्रवाई को तेज करते हुए पिछले 100 दिनों में करीब 300 करोड़ रुपये मूल्य की जब्त ड्रग्स को नष्ट किया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 28 अगस्त को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि राज्य सरकार नशीले पदार्थों की तस्करी और अवैध कारोबार के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई कर रही है।

नष्ट की गई ड्रग्स को असम के नलबाड़ी जिले में स्थित राज्य की पहली समर्पित नारकोटिक्स डिस्पोजल फैसिलिटी में वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत नष्ट किया गया। सरकार के अनुसार, जब्त मादक पदार्थों का निपटान ड्रग तस्करी के नेटवर्क को कमजोर करने और कानून प्रवर्तन एजेंसियों की कार्रवाई को प्रभावी बनाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

100 दिनों में 300 करोड़ रुपये की ड्रग्स का निपटान

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए इस कार्रवाई की जानकारी साझा की। उन्होंने सरकार के अभियान को लगातार जारी रखने का संदेश देते हुए लिखा, “Tick tock on the clock, the crackdown doesn’t stop. 100 days, 100% action.”

सरकार के मुताबिक, मौजूदा भाजपा नीत सरकार के पहले 100 दिनों के दौरान जब्त किए गए मादक पदार्थों को नष्ट करने की प्रक्रिया पूरी की गई। इन ड्रग्स की अनुमानित कीमत करीब 300 करोड़ रुपये बताई गई है।

यह कार्रवाई केवल जब्त नशीले पदार्थों को खत्म करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे राज्य में ड्रग तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे व्यापक अभियान के एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। प्रशासन का जोर तस्करी के नेटवर्क को तोड़ने, अवैध सप्लाई चेन पर कार्रवाई करने और नशीले पदार्थों की उपलब्धता कम करने पर है।

नलबाड़ी में बनी असम की पहली समर्पित नारकोटिक्स डिस्पोजल फैसिलिटी

जब्त ड्रग्स को नष्ट करने के लिए नलबाड़ी जिले में असम की पहली समर्पित नारकोटिक्स डिस्पोजल फैसिलिटी का इस्तेमाल किया गया। इस तरह की विशेष सुविधा का उद्देश्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा जब्त किए गए मादक पदार्थों का सुरक्षित और नियंत्रित तरीके से निपटान करना है।

ड्रग्स की जब्ती के बाद उनका निपटान भी कानून प्रवर्तन प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण होता है। जब्त पदार्थों को लंबे समय तक स्टोर करने के बजाय निर्धारित प्रक्रिया के तहत नष्ट करने से सुरक्षा संबंधी जोखिमों को कम करने में मदद मिलती है।

असम में इस सुविधा की स्थापना को राज्य के एंटी-ड्रग अभियान को संस्थागत रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे अलग-अलग जिलों में जब्त किए गए मादक पदार्थों के निपटान की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिल सकती है।

ड्रग तस्करी के नेटवर्क पर सरकार की नजर

असम सरकार का ड्रग्स के खिलाफ अभियान केवल नशीले पदार्थों की बरामदगी तक सीमित नहीं है। प्रशासन का लक्ष्य उन नेटवर्क पर कार्रवाई करना है, जिनके जरिए मादक पदार्थों की तस्करी और सप्लाई की जाती है।

राज्य की भौगोलिक स्थिति भी इसे नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई के लिहाज से महत्वपूर्ण बनाती है। पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों में अंतरराष्ट्रीय सीमाएं हैं और क्षेत्र में अवैध तस्करी के रास्तों को लेकर सुरक्षा एजेंसियां लगातार सतर्क रहती हैं।

ऐसे में ड्रग्स की बड़ी खेप पकड़ना और उसके बाद उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत नष्ट करना सरकार की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अधिकारियों के अनुसार, जब्त मादक पदार्थों का निपटान यह सुनिश्चित करता है कि अवैध रूप से बरामद की गई सामग्री दोबारा बाजार में नहीं पहुंच सके।

नशे के खिलाफ अभियान को गति देने का दावा

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा लंबे समय से असम में नशीले पदार्थों के खिलाफ कड़े अभियान की बात करते रहे हैं। मौजूदा कार्रवाई को इसी नीति को आगे बढ़ाने के तौर पर देखा जा रहा है।

सरकार का कहना है कि ड्रग्स के खिलाफ प्रभावी अभियान के लिए पुलिस, प्रशासन और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच समन्वय जरूरी है। केवल ड्रग्स की बरामदगी से समस्या का समाधान नहीं होता, बल्कि तस्करों, सप्लायरों और पूरे नेटवर्क की पहचान कर उसके खिलाफ कार्रवाई करना भी जरूरी है।

इसी रणनीति के तहत जब्त मादक पदार्थों को नष्ट करने की प्रक्रिया को भी अभियान का अहम हिस्सा बनाया गया है। करीब 300 करोड़ रुपये मूल्य की ड्रग्स का नष्ट किया जाना इस अभियान के पैमाने को दर्शाता है।

सरकार ने कार्रवाई को बताया 100 फीसदी एक्शन

मुख्यमंत्री सरमा के सोशल मीडिया संदेश में सरकार ने अपने शुरुआती 100 दिनों की कार्रवाई को प्रमुखता से पेश किया। उनके “100 days, 100% action” संदेश का उद्देश्य यह बताना है कि ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई में सरकार अपनी गति बनाए रखना चाहती है।

मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि आने वाले समय में कार्रवाई को जारी रखा जाएगा। इसका फोकस नशीले पदार्थों की तस्करी पर अंकुश लगाने के साथ-साथ अवैध कारोबार से जुड़े लोगों और नेटवर्क के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई करने पर रहेगा।

राज्य सरकार के लिए यह अभियान सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। नशीले पदार्थों की लत युवाओं और परिवारों पर गंभीर असर डाल सकती है। इसलिए सरकार और कानून प्रवर्तन एजेंसियां एक तरफ तस्करी रोकने और दूसरी तरफ नशे के सामाजिक प्रभाव को कम करने की दिशा में काम करने की बात करती रही हैं।

जब्त ड्रग्स के निपटान की प्रक्रिया क्यों अहम?

किसी भी राज्य में मादक पदार्थों की बड़ी खेप जब्त होने के बाद उसका सुरक्षित निपटान महत्वपूर्ण होता है। जब्त सामग्री को लंबे समय तक रखने के दौरान सुरक्षा, भंडारण और दुरुपयोग से जुड़े जोखिम हो सकते हैं।

समर्पित डिस्पोजल सुविधा के जरिए इन पदार्थों को नियंत्रित तरीके से नष्ट किया जा सकता है। असम में ऐसी सुविधा का इस्तेमाल बड़ी मात्रा में जब्त ड्रग्स के निपटान के लिए किया गया है।

नशीले पदार्थों को नष्ट करने की प्रक्रिया न्यायिक और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप की जाती है, ताकि सबूत से संबंधित आवश्यकताओं को पूरा करने के बाद जब्त सामग्री का अंतिम निपटान किया जा सके। इससे पुलिस और अन्य एजेंसियों की कार्रवाई को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिलती है।

पूर्वोत्तर में ड्रग तस्करी बड़ी चुनौती

पूर्वोत्तर भारत में ड्रग तस्करी लंबे समय से सुरक्षा और सामाजिक चिंता का विषय रही है। भौगोलिक स्थिति, अंतरराष्ट्रीय सीमाओं और पड़ोसी देशों से जुड़े संभावित तस्करी मार्गों के कारण इस क्षेत्र में कानून प्रवर्तन एजेंसियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ती है।

असम इस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण राज्य है। यहां से गुजरने वाले परिवहन मार्गों के कारण राज्य की सुरक्षा एजेंसियां मादक पदार्थों की आवाजाही पर निगरानी रखती हैं। बड़े स्तर पर ड्रग्स की जब्ती और उसके बाद उनका निपटान सरकार के लिए कार्रवाई की सफलता के संकेत के तौर पर प्रस्तुत किया जा रहा है।

हालांकि, ड्रग्स की समस्या से निपटने के लिए केवल जब्ती और नष्ट करने की कार्रवाई पर्याप्त नहीं होती। इसके साथ तस्करी नेटवर्क की वित्तीय जांच, आरोपियों पर कानूनी कार्रवाई, सीमा निगरानी, जागरूकता और नशामुक्ति सेवाओं को मजबूत करना भी जरूरी है।

आगे भी जारी रहेगा अभियान

असम सरकार ने संकेत दिया है कि ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई आने वाले समय में भी जारी रहेगी। अधिकारियों का उद्देश्य अवैध मादक पदार्थों की सप्लाई चेन को कमजोर करना और तस्करी में शामिल नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई को तेज करना है।

करीब 300 करोड़ रुपये मूल्य की ड्रग्स का 100 दिनों के भीतर नष्ट किया जाना राज्य सरकार के एंटी-ड्रग अभियान की बड़ी कार्रवाई है। नलबाड़ी में स्थापित समर्पित सुविधा ने इस प्रक्रिया को एक निर्धारित और केंद्रीकृत व्यवस्था उपलब्ध कराई है।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के संदेश से साफ है कि सरकार इस अभियान को अपनी प्राथमिकताओं में बनाए रखना चाहती है। आने वाले दिनों में अभियान की प्रभावशीलता इस बात से भी तय होगी कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां तस्करी के स्रोतों और नेटवर्क तक कितनी प्रभावी ढंग से पहुंच पाती हैं।

Leave a comment