असम बाढ़ 2026: मृतकों की संख्या 75 पहुंची, लाखों लोग अब भी प्रभावित, सरकार ने राहत मुआवजा बढ़ाया

असम में बाढ़ से अब तक 75 लोगों की मौत हो चुकी है। 3.32 लाख लोग प्रभावित हैं। सरकार ने मृतकों के परिजनों के लिए ₹9 लाख मुआवजा घोषित किया और राहत कार्य तेज किए।

असम में मानसूनी बाढ़ का संकट अभी भी बना हुआ है। राज्य में मृतकों की संख्या 75 हो गई है, जबकि 3.32 लाख लोग अब भी प्रभावित हैं। सरकार ने मृतकों के परिजनों के लिए अनुग्रह राशि बढ़ाकर ₹9 लाख कर दी है और राहत कार्य तेज कर दिए हैं।

गुवाहाटी: पूर्वोत्तर भारत का राज्य असम एक बार फिर भीषण बाढ़ की चपेट में है। लगातार हो रही भारी बारिश और नदियों के उफान के कारण राज्य के कई जिले गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, बाढ़ से अब तक 75 लोगों की जान जा चुकी है। पिछले 24 घंटों के दौरान सात नई मौतों की पुष्टि हुई है। हालांकि प्रभावित लोगों की संख्या पहले की तुलना में घटी है, लेकिन अब भी लगभग 3.32 लाख लोग बाढ़ की मार झेल रहे हैं। राज्य सरकार और आपदा प्रबंधन एजेंसियां राहत एवं बचाव कार्यों में जुटी हुई हैं। प्रभावित क्षेत्रों में खाद्य सामग्री, स्वच्छ पेयजल, दवाइयां और अस्थायी आश्रय उपलब्ध कराने के प्रयास लगातार जारी हैं।

सात जिले अब भी सबसे अधिक प्रभावित

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, शिवसागर, चराइदेव, गोलाघाट, जोरहाट, नगांव, सोनितपुर और कामरूप महानगर जिले अभी भी बाढ़ से गंभीर रूप से प्रभावित हैं। इन क्षेत्रों में कई गांव जलमग्न हैं और सामान्य जनजीवन पूरी तरह बाधित हो गया है। बाढ़ का असर 21 राजस्व सर्किलों तक पहुंच चुका है। कुल 622 गांव जलमग्न हो गए हैं, जिससे हजारों परिवारों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है।

राहत शिविरों में रह रहे हजारों लोग

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। प्रशासन द्वारा राहत शिविरों और अस्थायी आश्रयों का संचालन किया जा रहा है, जहां प्रभावित परिवारों को भोजन, पेयजल, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं और आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। स्वास्थ्य विभाग ने जलजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए विशेष मेडिकल टीमें भी तैनात की हैं। बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के लिए अतिरिक्त स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था की गई है।

मृतकों के परिजनों के लिए बढ़ाई गई आर्थिक सहायता

असम सरकार ने बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों के लिए अनुग्रह राशि (Ex Gratia Compensation) बढ़ाकर ₹9 लाख कर दी है। सरकार का कहना है कि सहायता राशि मिलने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए पात्रता संबंधी नियमों को भी सरल बनाया गया है। इस फैसले का उद्देश्य प्रभावित परिवारों को जल्द आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना और कठिन समय में उन्हें राहत पहुंचाना है।

कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर

लगातार बाढ़ के कारण बड़ी मात्रा में कृषि भूमि पानी में डूब गई है। धान और अन्य खरीफ फसलों को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका है। ग्रामीण क्षेत्रों में पशुधन, सिंचाई व्यवस्था और स्थानीय बाजार भी प्रभावित हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पानी जल्दी नहीं उतरता, तो किसानों को लंबे समय तक आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है। राज्य सरकार कृषि नुकसान का आकलन भी कर रही है ताकि भविष्य में मुआवजा और पुनर्वास योजनाएं लागू की जा सकें।

सड़क और परिवहन व्यवस्था प्रभावित

कई स्थानों पर सड़कें जलमग्न होने और पुलों को नुकसान पहुंचने के कारण यातायात बाधित है। कुछ इलाकों में नाव ही आवागमन का प्रमुख साधन बन गई है। बचाव दलों को दूर-दराज के गांवों तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन लगातार सड़कों की मरम्मत और आवश्यक मार्गों को बहाल करने का प्रयास कर रहा है।

हर वर्ष क्यों आती है असम में बाढ़?

असम भौगोलिक रूप से ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों के विशाल नदी तंत्र में स्थित है। मानसून के दौरान भारी वर्षा और ऊपरी इलाकों से आने वाले अतिरिक्त जल प्रवाह के कारण नदियां उफान पर आ जाती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, नदी कटाव, गाद जमने, अनियोजित विकास और जलवायु परिवर्तन जैसे कारण बाढ़ की तीव्रता को बढ़ा रहे हैं। यही वजह है कि राज्य को लगभग हर वर्ष व्यापक बाढ़ का सामना करना पड़ता है।

राहत और बचाव अभियान जारी

राज्य सरकार, जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और विभिन्न राहत एजेंसियां मिलकर प्रभावित लोगों तक सहायता पहुंचाने में जुटी हैं। जरूरतमंद परिवारों को राशन, दवाइयां, स्वच्छ पानी और अन्य आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अनावश्यक यात्रा से बचें और केवल आधिकारिक निर्देशों का पालन करें।

मौसम और आगे की चुनौती

मौसम विभाग की निगरानी जारी है क्योंकि आने वाले दिनों में कुछ क्षेत्रों में और बारिश होने की संभावना बनी हुई है। यदि वर्षा का दौर जारी रहता है, तो नदियों का जलस्तर फिर बढ़ सकता है और राहत कार्यों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बाढ़ से निपटने के लिए केवल आपातकालीन राहत पर्याप्त नहीं है। दीर्घकालिक समाधान के लिए नदी प्रबंधन, मजबूत तटबंध, आधुनिक जल निकासी प्रणाली और जलवायु अनुकूल बुनियादी ढांचे पर निवेश बढ़ाने की आवश्यकता है।

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