माफिया अतीक अहमद के बेटे अली अहमद ने प्रयागराज की अदालत में एक पुराने कथित रंगदारी और जमीन विवाद मामले में अपना बयान दर्ज कराया है। इस दौरान अली ने शिकायतकर्ता अफजल से अपने पारिवारिक संबंधों का हवाला देते हुए आरोपों पर सवाल उठाए। अली के मुताबिक, उनके पिता अतीक अहमद ने अफजल को कुछ काम दिलाने के लिए कहा था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जिस व्यक्ति ने उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई, उसने उनकी जमीन बेचकर पैसे कमाए। अली का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब उनके खिलाफ दर्ज पुराने मामले में अदालत में सुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
यह मामला प्रयागराज के करेली थाना क्षेत्र में दर्ज शिकायत से जुड़ा है। शिकायतकर्ता अफजल ने अगस्त 2023 में अली अहमद और अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि जमीन को लेकर विवाद के दौरान उसे रास्ते में रोका गया, उसके साथ मारपीट की गई और जमीन अली के नाम करने या 30 लाख रुपये देने का दबाव बनाया गया। शिकायत के अनुसार, जमीन पर प्लॉटिंग करने के उद्देश्य से उसे अपनी संपत्ति हस्तांतरित करने के लिए कहा गया था। हालांकि, ये शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोप हैं और इन्हें अदालत में साबित किया जाना बाकी है।
अली अहमद ने अदालत में अपने बयान के दौरान शिकायतकर्ता की भूमिका पर सवाल उठाए। उनका पक्ष है कि अफजल के साथ उनके परिवार के संबंध रहे हैं और उनके पिता ने उसे काम दिलाने की बात कही थी। अली ने शिकायतकर्ता पर जमीन बेचकर आर्थिक लाभ लेने का आरोप भी लगाया। इस तरह मामले में दोनों पक्षों के दावों के बीच जमीन के स्वामित्व, पुराने संबंधों और कथित लेन-देन का सवाल अहम हो गया है। अली की ओर से कही गई बात उनका पक्ष है; इसकी पुष्टि और आरोपों की सच्चाई का निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होगा।
मामले की जड़ जमीन को लेकर हुए विवाद में बताई जाती है। प्राथमिकी के मुताबिक, अफजल ने आरोप लगाया था कि वह अपने भतीजे के साथ लौट रहा था, तभी कुछ लोगों ने उसे रास्ते में रोक लिया। शिकायत में कहा गया कि आरोपितों ने जमीन अली के नाम करने की बात कही और ऐसा नहीं करने पर 30 लाख रुपये देने का दबाव बनाया। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया था कि उसके हस्ताक्षर सादे स्टांप पेपर पर जबरन कराए गए और जमीन के संबंध में दस्तावेज तैयार करने की धमकी दी गई। इन आरोपों के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।
इस प्रकरण में अली अहमद के अलावा असाद कालिया और अन्य लोगों के नाम भी सामने आए थे। पुलिस की ओर से दर्ज मामले में कथित रंगदारी, हमला और धमकी जैसे आरोप शामिल रहे। शिकायत के अनुसार, कथित घटना में कुछ लोगों ने अफजल के साथ मारपीट की थी। पुलिस ने मामले की जांच के दौरान आरोपितों की भूमिका की पड़ताल की। हालांकि, किसी व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होना अपने आप में अपराध साबित होना नहीं है। मामले में आरोपों और बचाव पक्ष की दलीलों पर अदालत की प्रक्रिया के अनुसार विचार किया जाएगा।
21 सितंबर 2026 को अली अहमद को झांसी जेल से कड़ी सुरक्षा के बीच प्रयागराज की जिला अदालत में पेश किया गया था। इसी मामले में असाद कालिया को भी अदालत में पेश किया गया और उसका बयान दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई। सुनवाई के दौरान सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। अदालत में बयान दर्ज होने के बाद अली को पुलिस की निगरानी में वापस जेल ले जाया गया। इस पेशी के बाद उनके बयान और मामले में लगाए गए आरोपों को लेकर चर्चा तेज हो गई।
अली अहमद लंबे समय से जेल में बंद हैं। उनके खिलाफ दर्ज यह मामला जमीन विवाद और कथित रंगदारी के आरोपों से संबंधित है। शिकायतकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया था कि जेल में बंद अली और असाद के कहने पर उनके सहयोगियों ने जमीन को लेकर दबाव बनाया। दूसरी ओर, अली ने अपने बयान में शिकायतकर्ता की मंशा और जमीन से जुड़े घटनाक्रम पर सवाल उठाए हैं। अब मामले में यह महत्वपूर्ण होगा कि दोनों पक्षों की ओर से अदालत के सामने कौन से तथ्य और साक्ष्य प्रस्तुत किए जाते हैं।
जमीन से जुड़े विवादों में स्वामित्व के दस्तावेज, रजिस्ट्री, कब्जे की स्थिति और किसी कथित समझौते की वैधता जैसे पहलू अहम होते हैं। यदि किसी पक्ष का दावा है कि जमीन बेचकर पैसे कमाए गए, तो इस दावे की जांच संबंधित दस्तावेजों और लेन-देन के रिकॉर्ड के आधार पर की जा सकती है। इसी तरह, कथित रंगदारी या धमकी के आरोपों को साबित करने के लिए भी उपलब्ध साक्ष्य और गवाहों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। इस मामले में अली और शिकायतकर्ता के परस्पर विरोधी दावों की जांच न्यायालयीन प्रक्रिया के तहत होनी है।
अतीक अहमद की मृत्यु के बाद उनके परिवार से जुड़े कई पुराने आपराधिक और संपत्ति संबंधी मामले चर्चा में रहे हैं। ऐसे मामलों में आरोपों, पुलिस की जांच और अदालत में दर्ज बयानों के बीच अंतर समझना जरूरी है। अली अहमद के इस बयान में जहां उन्होंने अपने पिता की ओर से अफजल को काम दिलाने की बात कही, वहीं शिकायतकर्ता पर जमीन बेचकर पैसा कमाने का आरोप भी लगाया। दूसरी तरफ, प्राथमिकी में अफजल ने जमीन के लिए दबाव, 30 लाख रुपये की कथित मांग और मारपीट के आरोप लगाए थे। दोनों पक्षों के इन दावों पर अंतिम निष्कर्ष अदालत के फैसले और रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निकलेगा।
फिलहाल इस मामले में अली अहमद के बयान ने जमीन विवाद के पुराने घटनाक्रम को फिर सामने ला दिया है। सुनवाई के दौरान उनके पक्ष की दलीलों और शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच महत्वपूर्ण बनी हुई है। आगे की न्यायिक प्रक्रिया में यह स्पष्ट होना बाकी है कि जमीन को लेकर विवाद किन परिस्थितियों में हुआ, कथित आर्थिक लेन-देन का क्या आधार है और शिकायत में लगाए गए आरोपों के समर्थन में क्या साक्ष्य प्रस्तुत किए जाते हैं।











