अयोध्या में 12 करोड़ रुपये की लागत से शुरू की गई वाटर मेट्रो परियोजना सरयू नदी में सिल्ट और बदलते जलस्तर के कारण सफल नहीं हो सकी। अब स्थायी संचालन के लिए 29 हजार करोड़ रुपये के बैराज प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया गया है।
अयोध्या: Ayodhya Water Metro Project शुरुआती उत्साह के बावजूद संचालन स्तर पर सफल नहीं हो पाया। जनवरी 2024 में कोच्चि से लाई गई वाटर मेट्रो को सरयू नदी में अयोध्या से गुप्तारघाट तक चलाने की योजना थी, लेकिन नदी के बदलते स्वरूप, सिल्ट और जलस्तर में उतार-चढ़ाव के कारण परियोजना लगातार प्रभावित होती रही। अब सरकार बैराज निर्माण के जरिए इस समस्या का स्थायी समाधान तलाश रही है।
शुरुआती तैयारी के बावजूद सफल नहीं हो सका संचालन
वाटर मेट्रो परियोजना को अयोध्या पर्यटन के बड़े आकर्षण के रूप में तैयार किया गया था। अयोध्या से गुप्तारघाट तक करीब 10 किलोमीटर के रूट पर संचालन के लिए कई चरणों में सर्वे कराया गया। घाटों पर जेटी और चार्जिंग स्टेशन भी स्थापित किए गए।

करीब 12 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह वाटर मेट्रो जनवरी 2024 में अयोध्या पहुंची थी। शुरुआत में इसे देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ी, लेकिन तकनीकी और प्राकृतिक चुनौतियों के चलते नियमित संचालन संभव नहीं हो पाया।
सरयू नदी की सिल्ट और बदलते स्वरूप ने बढ़ाई परेशानी
विशेषज्ञों के अनुसार सरयू नदी में भारी मात्रा में सिल्ट जमा होती है, जिससे तय जलमार्ग बार-बार प्रभावित होता रहा। गर्मियों में नदी का जलस्तर काफी नीचे चला जाता है, जबकि बारिश और बाढ़ के दौरान नदी का बहाव और सिल्ट दोनों बढ़ जाते हैं।
इसी कारण वाटर मेट्रो निर्धारित चैनल पर लगातार नहीं चल सकी। ड्रेजिंग का काम भी शुरू किया गया, लेकिन उसका असर सीमित क्षेत्रों तक ही रह गया। कुछ समय तक पर्यटकों को घाटों के आसपास सैर कराई गई, मगर बाद में वह सेवा भी बंद करनी पड़ी।
बैराज परियोजना से फिर जगी उम्मीद
अब सरयू नदी पर करीब 29 हजार करोड़ रुपये की लागत से बैराज निर्माण की तैयारी चल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि बैराज बनने के बाद नदी में जलस्तर नियंत्रित रहेगा और वाटर मेट्रो सहित अन्य जल परिवहन सेवाओं का संचालन आसान हो जाएगा।
सरकार की योजना राष्ट्रीय जलमार्ग संख्या-40 को भी सक्रिय बनाने की है, ताकि भविष्य में यात्री और मालवाहक जल परिवहन को बढ़ावा मिल सके।











