बांग्लादेश की शर्त के बीच तारिक रहमान की भारत यात्रा पर नजर, शेख हसीना का मुद्दा बना बड़ी चुनौती

तारिक रहमान की संभावित भारत यात्रा से पहले बांग्लादेश ने शेख हसीना की राजनीतिक गतिविधियों पर रोक की मांग की है। दोनों देशों के बीच कई अहम मुद्दों पर चर्चा

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की 21 अगस्त को संभावित भारत यात्रा से पहले शेख हसीना का मुद्दा प्रमुख बन गया है। ढाका चाहता है कि भारत में रह रहीं हसीना बांग्लादेश की राजनीति को प्रभावित करने वाले बयान न दें।

ढाका: बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की संभावित भारत यात्रा से पहले दोनों देशों के बीच कूटनीतिक स्तर पर कई अहम मुद्दों पर बातचीत चल रही है। इनमें भारत में रह रहीं पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की राजनीतिक गतिविधियों का मुद्दा सबसे संवेदनशील माना जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, ढाका चाहता है कि भारत में रहते हुए शेख हसीना ऐसी राजनीतिक गतिविधियों या सार्वजनिक बयानों से दूर रहें, जिनका असर बांग्लादेश की घरेलू राजनीति पर पड़ सकता है।

21 अगस्त को दिल्ली पहुंच सकते हैं तारिक रहमान

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के 21 अगस्त को नई दिल्ली पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। यह उनका भारत का पहला आधिकारिक दौरा होगा। दोनों देशों के बीच इस यात्रा को लेकर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं, हालांकि अंतिम कार्यक्रम और तारीख को लेकर अभी कुछ स्तरों पर सहमति बनना बाकी बताई जा रही है।

तारिक रहमान की भारत यात्रा ऐसे समय में प्रस्तावित है, जब भारत और बांग्लादेश के संबंध कई संवेदनशील मुद्दों से गुजर रहे हैं। राजनीतिक संबंधों के साथ-साथ व्यापार, ऊर्जा, सीमा सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग भी दोनों देशों के एजेंडे में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। ऐसे में यात्रा को दोनों देशों के बीच संबंधों को नए सिरे से व्यवस्थित करने के अवसर के तौर पर देखा जा रहा है।

शेख हसीना को लेकर ढाका की चिंता

बांग्लादेश की सबसे बड़ी चिंता पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को लेकर बताई जा रही है। अगस्त 2024 में सत्ता से हटने के बाद शेख हसीना भारत में रह रही हैं। बांग्लादेश का आरोप है कि भारत में रहते हुए वह समय-समय पर देश की राजनीतिक परिस्थितियों पर बयान देती रही हैं।

ढाका का मानना है कि ऐसे बयान बांग्लादेश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को प्रभावित कर सकते हैं। बांग्लादेशी अधिकारियों की इच्छा है कि नई दिल्ली यह स्पष्ट करे कि शेख हसीना भारत की धरती से ऐसी राजनीतिक गतिविधियां नहीं करेंगी, जिन्हें बांग्लादेश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप के रूप में देखा जा सकता है।

रिपोर्टों के अनुसार, भारत की ओर से इस मुद्दे पर कुछ सकारात्मक संकेत दिए गए हैं, लेकिन बांग्लादेश चाहता है कि तारिक रहमान की यात्रा से पहले दोनों पक्षों के बीच स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाए।

5 अगस्त की प्रेस कॉन्फ्रेंस से बढ़ा विवाद

शेख हसीना की 5 अगस्त को हुई वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस ने दोनों देशों के बीच इस मुद्दे को और संवेदनशील बना दिया। यह कार्यक्रम 2024 में उनके सत्ता से हटने की दूसरी वर्षगांठ के मौके पर आयोजित किया गया था। इस दौरान उन्होंने पत्रकारों के सवालों का जवाब दिया और बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिति पर अपनी राय रखी।

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस पर बांग्लादेश सरकार ने आपत्ति जताई। ढाका का कहना था कि भारत में रहते हुए शेख हसीना का सार्वजनिक राजनीतिक बयान देना दोनों देशों के संबंधों को सामान्य बनाने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।

भारत की ओर से इस मामले में यह रुख सामने आया कि कार्यक्रम एक निजी मीडिया संस्था की ओर से आयोजित किया गया था और इसमें भारतीय सरकार की कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं थी। इसी वजह से भारत ने कार्यक्रम को रोकने की कार्रवाई नहीं की।

यह घटनाक्रम इस बात का संकेत माना जा रहा है कि शेख हसीना का मुद्दा आने वाले समय में भारत-बांग्लादेश संबंधों में सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक विषयों में बना रह सकता है।

बांग्लादेश में भी यात्रा को लेकर विरोध

तारिक रहमान की भारत यात्रा को लेकर बांग्लादेश के भीतर भी राजनीतिक मतभेद सामने आए हैं। कुछ राजनीतिक नेताओं का कहना है कि भारत दौरे से पहले शेख हसीना के भविष्य और भारत-बांग्लादेश संबंधों की दिशा को लेकर स्पष्टता जरूरी है।

2024 के राजनीतिक आंदोलन के बाद उभरी नेशनल सिटिजन पार्टी यानी NCP ने भी प्रस्तावित यात्रा पर सवाल उठाए हैं। पार्टी के नेताओं का तर्क है कि जब तक शेख हसीना के प्रत्यर्पण और दोनों देशों के संबंधों के नए ढांचे को लेकर स्पष्ट निर्णय नहीं होता, तब तक भारत यात्रा पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।

NCP नेता नाहिद इस्लाम ने शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर भी भारत पर सवाल उठाए। उनका आरोप रहा कि दिल्ली से दिए गए राजनीतिक बयानों को केवल निजी गतिविधि मानना उचित नहीं होगा। हालांकि, भारत की ओर से कार्यक्रम में सरकार की प्रत्यक्ष भूमिका से इनकार किया गया है।

यात्रा के एजेंडे में ऊर्जा और व्यापार भी अहम

राजनीतिक विवादों के बीच भारत और बांग्लादेश के संबंधों में ऊर्जा सहयोग भी एक महत्वपूर्ण विषय है। बांग्लादेश इस समय बिजली और ईंधन से जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, देश के कई हिस्सों में बिजली कटौती की स्थिति गंभीर बनी हुई है।

इसी बीच बांग्लादेश ने भारत से अतिरिक्त डीजल आपूर्ति की मांग की है। बांग्लादेश के ऊर्जा मंत्री इकबाल हसन महमूद ने भारतीय उच्चायुक्त के साथ बैठक के दौरान डीजल की अतिरिक्त आपूर्ति का मुद्दा उठाया था। दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग पहले से मौजूद है और भारत पाइपलाइन के माध्यम से बांग्लादेश को डीजल की आपूर्ति करता रहा है।

भारत-बांग्लादेश फ्रेंडशिप पाइपलाइन दोनों देशों के ऊर्जा संबंधों की प्रमुख परियोजनाओं में शामिल है। वर्ष 2017 में शुरू हुई इस व्यवस्था के तहत भारत से बांग्लादेश को डीजल की आपूर्ति की जाती है। पश्चिम एशिया में हालिया संकट के दौरान भी भारत ने बांग्लादेश को अतिरिक्त डीजल उपलब्ध कराया था।

संबंधों को सामान्य बनाने की चुनौती

तारिक रहमान की प्रस्तावित भारत यात्रा केवल एक द्विपक्षीय दौरा नहीं, बल्कि बदलते क्षेत्रीय समीकरणों के बीच दोनों देशों के संबंधों की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण अवसर हो सकती है। भारत के लिए बांग्लादेश रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पड़ोसी है, जबकि बांग्लादेश के लिए भारत व्यापार, ऊर्जा, संपर्क और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी का प्रमुख साझेदार है।

हालांकि, शेख हसीना का मुद्दा दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। ढाका चाहता है कि भारत उसके आंतरिक राजनीतिक मामलों को लेकर संवेदनशीलता दिखाए, जबकि नई दिल्ली के लिए शेख हसीना की मौजूदगी और उनकी गतिविधियां एक जटिल कूटनीतिक विषय बनी हुई हैं।

यदि तारिक रहमान का भारत दौरा तय कार्यक्रम के अनुसार होता है, तो दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक मतभेदों के साथ-साथ ऊर्जा, व्यापार, सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग पर भी चर्चा होने की संभावना है। ऐसे में इस यात्रा से यह संकेत मिल सकता है कि भारत और बांग्लादेश अपने संबंधों को पुराने विवादों से आगे ले जाकर किस दिशा में बढ़ाना चाहते हैं।

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