8वें वेतन आयोग में ₹30 हजार पार हो सकता है न्यूनतम बेसिक पे, 80 साल में ऐसे बढ़ी सरकारी सैलरी

8वें वेतन आयोग में न्यूनतम बेसिक पे ₹30 हजार से अधिक होने का अनुमान है। जानें 1946 से अब तक सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में कितना बदलाव हुआ।

नई दिल्ली में केंद्र सरकार के कर्मचारी 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। 1946-47 में न्यूनतम बेसिक पे ₹55 था, जो 7वें वेतन आयोग में बढ़कर ₹18,000 हो गया। अब आगे बढ़ोतरी की उम्मीद है।

Business: केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारी और पेंशनर्स 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का इंतजार कर रहे हैं। आयोग के तहत न्यूनतम बेसिक पे में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है, हालांकि अंतिम राशि अभी तय नहीं हुई है। अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर के आधार पर ₹30 हजार से अधिक बेसिक पे के अनुमान लगाए जा रहे हैं, लेकिन इन्हें आधिकारिक आंकड़ा नहीं माना जा सकता।

₹55 से ₹18,000 तक पहुंचा न्यूनतम बेसिक पे

केंद्र सरकार के कर्मचारियों के वेतन में पिछले करीब 80 वर्षों के दौरान बड़ा बदलाव आया है। जब भारत में पहला वेतन आयोग लागू हुआ था, तब सरकारी कर्मचारियों का न्यूनतम मूल वेतन महज ₹55 प्रति माह था। समय के साथ अलग-अलग वेतन आयोगों की सिफारिशों के आधार पर वेतन संरचना में बदलाव किया गया और न्यूनतम बेसिक पे लगातार बढ़ता गया।

पहले वेतन आयोग के दौरान 1946-47 में न्यूनतम बेसिक पे ₹55 और अधिकतम ₹2,000 था। इसके बाद दूसरे वेतन आयोग में न्यूनतम वेतन ₹80 किया गया। तीसरे वेतन आयोग में यह बढ़कर ₹196 हुआ, जबकि चौथे वेतन आयोग में न्यूनतम बेसिक पे ₹750 तय की गई।

पांचवें वेतन आयोग के समय न्यूनतम मूल वेतन ₹2,550 पहुंचा। छठे वेतन आयोग में इसमें बड़ी बढ़ोतरी हुई और न्यूनतम बेसिक पे ₹7,000 हो गई। इसके बाद सातवें वेतन आयोग ने इसे बढ़ाकर ₹18,000 कर दिया।

फिटमेंट फैक्टर से तय होगी नई बेसिक सैलरी

अब कर्मचारियों की निगाह 8वें वेतन आयोग पर है। नए वेतन ढांचे में न्यूनतम बेसिक पे कितनी होगी, इसका एक बड़ा आधार फिटमेंट फैक्टर होगा। कर्मचारी संगठन 3.83 तक के फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहे हैं, जबकि कुछ अनुमानों में यह 1.82 से 2.86 के बीच रहने की संभावना जताई गई है।

मौजूदा न्यूनतम बेसिक पे ₹18,000 को अलग-अलग संभावित फिटमेंट फैक्टर से गुणा करने पर कई अनुमान सामने आते हैं। उदाहरण के तौर पर 1.92 के फैक्टर पर बेसिक पे ₹34,560, 2.28 पर ₹41,040 और 2.57 पर करीब ₹46,260 हो सकती है। वहीं 2.86 के फिटमेंट फैक्टर पर यह रकम करीब ₹51,480 तक पहुंच सकती है।

हालांकि, ये केवल संभावित गणनाएं हैं। सरकार या 8वें वेतन आयोग ने अभी इनमें से किसी राशि को नई न्यूनतम बेसिक पे के रूप में मंजूरी नहीं दी है। वास्तविक वेतन वृद्धि आयोग की सिफारिश और सरकार के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगी।

8वां वेतन आयोग कब से लागू होगा?

8वें केंद्रीय वेतन आयोग के लिए 1 जनवरी 2026 को संभावित प्रभावी तारीख माना जा रहा है। इसका मतलब यह नहीं है कि कर्मचारियों को उसी तारीख से बढ़ी हुई सैलरी मिलना शुरू हो जाएगी। वास्तविक भुगतान आयोग की रिपोर्ट, सरकार की समीक्षा और कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही तय होगा।

वेतन आयोग अपनी सिफारिशों में मूल वेतन के अलावा कर्मचारियों के वेतन ढांचे से जुड़े अन्य पहलुओं पर भी विचार कर सकता है। इसलिए केवल बेसिक पे में संभावित बढ़ोतरी देखकर कुल सैलरी में होने वाले बदलाव का सटीक अनुमान लगाना अभी संभव नहीं है।

अगर सरकार फिटमेंट फैक्टर को मौजूदा स्तर से ऊपर रखती है, तो न्यूनतम बेसिक पे ₹30 हजार से अधिक होने की संभावना बन सकती है। लेकिन अंतिम आंकड़ा अभी स्पष्ट नहीं है और कर्मचारियों को आधिकारिक सिफारिशों का इंतजार करना होगा।

इसलिए ₹30 हजार, ₹40 हजार या ₹50 हजार से अधिक की बेसिक पे से जुड़े आंकड़ों को फिलहाल अनुमान के तौर पर ही देखना चाहिए। 8वें वेतन आयोग की अंतिम सिफारिश और केंद्र सरकार के निर्णय के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि लाखों केंद्रीय कर्मचारियों के न्यूनतम मूल वेतन में वास्तविक रूप से कितनी बढ़ोतरी होगी।

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