बीएमसी मेयर और पार्षदों की सैलरी को लेकर अक्सर भ्रम होता है। वास्तविकता यह है कि मेयर का मासिक मानदेय करीब 6,000 रुपये है, जबकि भत्तों और सुविधाओं को जोड़कर कुल आय 50,000-55,000 रुपये तक पहुंचती है। पार्षदों की आमदनी 25,000 रुपये से शुरू होती है और सक्रियता के आधार पर बढ़ सकती है।
BMC मेयर सैलरी जानकारी: मुंबई महानगरपालिका में बीएमसी मेयर और पार्षदों की आय को लेकर आम लोगों में अक्सर भ्रम रहता है। बीएमसी मेयर को मासिक 6,000 रुपये का मानदेय मिलता है, जबकि भत्तों और सरकारी सुविधाओं को जोड़कर उनकी कुल मासिक आय 50,000 से 55,000 रुपये के बीच होती है। पार्षदों का मानदेय 25,000 रुपये है, जो बैठकों और सक्रियता के आधार पर बढ़ सकता है। यह मामला आम जनता के लिए पारदर्शिता और नगर निगम के वित्तीय ढांचे को समझने में अहम है।
बीएमसी मेयर की सैलरी कितनी होती है
बीएमसी मेयर को हर महीने करीब 6,000 रुपये का मानदेय मिलता है। यह रकम सुनने में कम जरूर लगती है, लेकिन मेयर की कुल मासिक आय सिर्फ इसी तक सीमित नहीं रहती। आधिकारिक बैठकों, कार्यक्रमों और जिम्मेदारियों के आधार पर उन्हें अलग-अलग भत्ते भी दिए जाते हैं।
इन भत्तों को जोड़ने के बाद मेयर की औसतन मासिक आय करीब 50,000 से 55,000 रुपये के आसपास पहुंच जाती है। सालाना तौर पर यह आय लगभग 6 से 6.5 लाख रुपये के बीच रहती है। इसके अलावा मेयर को सरकारी आवास, गाड़ी, ड्राइवर, सुरक्षा और स्टाफ जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं, जिनका सीधा असर उनकी व्यक्तिगत खर्च क्षमता पर पड़ता है।

बीएमसी पार्षदों को कितना मिलता है मानदेय
बीएमसी पार्षदों को भी वेतन नहीं, बल्कि मानदेय दिया जाता है। साल 2017 में महंगाई और काम के बढ़ते दबाव को देखते हुए पार्षदों के मानदेय में बढ़ोतरी की गई थी। इसके बाद उनका मासिक मानदेय 25,000 रुपये तय किया गया।
हालांकि पार्षदों की कमाई यहीं खत्म नहीं होती। नगर निगम की आम सभा, स्थायी समिति और अन्य बैठकों में सक्रिय भागीदारी करने वाले पार्षदों को अतिरिक्त भत्ता मिलता है। इस वजह से कई सक्रिय पार्षदों की कुल मासिक आय मेयर के करीब या कभी-कभी उससे ज्यादा भी हो सकती है।
जिम्मेदारी के हिसाब से फर्क
पैसे के नजरिए से देखा जाए तो मेयर और पार्षदों की आमदनी में बहुत बड़ा अंतर नहीं दिखता। लेकिन जिम्मेदारी और पद की अहमियत के मामले में फर्क साफ है। मेयर पूरे नगर निगम का प्रतिनिधित्व करते हैं और बड़े प्रशासनिक व नीतिगत फैसलों में उनकी भूमिका निर्णायक होती है।
वहीं पार्षद अपने-अपने वार्ड और समितियों तक सीमित जिम्मेदारियां निभाते हैं। इसलिए भले ही कुछ मामलों में पार्षदों की आय मेयर के बराबर दिखे, लेकिन पद की गरिमा और जिम्मेदारी मेयर के पक्ष में कहीं ज्यादा होती है।









