बीजापुर के काऊरगट्टा गांव में नक्सलियों ने पूर्व सरपंच भीमा मड़कम की गोली मारकर हत्या कर दी। जवानों को सूचना देने के शक में वारदात को अंजाम दिया गया। पुलिस ने जांच शुरू कर अतिरिक्त बल तैनात किया है।
Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में नक्सलियों ने एक बार फिर खूनी वारदात को अंजाम दिया है। पामेड़ थाना क्षेत्र के ग्राम काऊरगट्टा में मंगलवार, 20 जनवरी को पूर्व सरपंच भीमा मड़कम (29) की गोली मारकर हत्या कर दी गई। जानकारी के अनुसार, भीमा गांव के पास खेतों की ओर मछली पकड़ने गए थे। उसी दौरान नक्सलियों ने उन्हें निशाना बना लिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटनास्थल पर और भी लोग मौजूद थे। इसी भीड़ के बीच नक्सलियों ने भीमा पर गोली चला दी। गोली उनके पेट में लगी, जिससे वह मौके पर ही गिर पड़े। लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
CRPF कैंप के पास था घर
भीमा मड़कम कंचाल गांव के निवासी थे और 2020 से 2025 तक सरपंच रहे। वे निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुने गए थे और किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े नहीं थे। सरपंच रहते हुए भी वे गांव में ही रहते थे। उनके घर से लगभग 500 मीटर की दूरी पर CRPF की 151वीं बटालियन का कैंप स्थित है, जो कोंटा रेंज के अंतर्गत आता है।
बताया जा रहा है कि इसी नजदीकी के कारण नक्सलियों को शक था कि भीमा जवानों को उनकी गतिविधियों की जानकारी देते हैं। करीब दो महीने पहले भी नक्सलियों ने उन्हें घेरकर हमला करने की कोशिश की थी, लेकिन CRPF जवानों ने समय रहते उन्हें बचा लिया था। उस घटना के बाद भीमा कुछ समय तक दंतेवाड़ा-बचेली में रह रहे थे और बीच-बीच में गांव आते-जाते थे।
मुखबिरी के शक में नक्सली थे नाराज

पुलिस के अनुसार, सरपंच रहते हुए भीमा मड़कम ग्रामीणों और सुरक्षा बलों दोनों से संपर्क में रहते थे। वे अक्सर जवानों से बातचीत करते थे और इलाके की समस्याओं को लेकर चर्चा भी करते थे। इसी वजह से नक्सलियों को उन पर मुखबिरी का शक था।
हालांकि पुलिस ने अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है कि हत्या का कारण केवल मुखबिरी का शक ही था, लेकिन प्रारंभिक जांच में यही बात सामने आ रही है। इससे पहले भी नक्सली इसी तरह के आरोप लगाकर कई ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों को निशाना बना चुके हैं।
इलाके में बढ़ाई गई सुरक्षा
जिस स्थान पर यह वारदात हुई, वह छत्तीसगढ़ और तेलंगाना की सीमा से सटा हुआ इलाका है। यह क्षेत्र पहले से ही नक्सल गतिविधियों के लिए संवेदनशील माना जाता है। घटना की सूचना मिलते ही पामेड़ थाना प्रभारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया और पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया।
पुलिस ने एहतियात के तौर पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किया है। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों की पहचान कर जल्द कार्रवाई की जाएगी।
बीजापुर में बढ़ती नक्सली हिंसा
बीजापुर जिले में बीते कुछ वर्षों से नक्सली हिंसा लगातार बढ़ी है। इससे पहले भी सड़क निर्माण से जुड़े एक ठेकेदार और भाजपा कार्यकर्ता सत्यम पुनेम की हत्या की जा चुकी है। नक्सलियों ने उन मामलों में भी मुखबिरी का आरोप लगाते हुए पर्चे छोड़े थे।
बीते दो साल में बस्तर संभाग में नक्सलियों द्वारा भाजपा के 10 नेताओं की हत्या की जा चुकी है, जिनमें से सबसे ज्यादा घटनाएं बीजापुर जिले में हुई हैं। इस वजह से स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों में डर का माहौल है।











