कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर एक बार फिर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी के अध्यक्ष पद की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने कहा कि पहले अध्यक्ष घोषित कर दिया गया और फिर चुनाव का ऐलान किया गया, लेकिन चुनाव हुआ ही नहीं।
नई दिल्ली: कांग्रेस ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी पर कड़ा हमला बोला है। नितिन नबीन को बीजेपी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित किए जाने के बाद कांग्रेस ने सत्तारूढ़ दल पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पार्टी ने अध्यक्ष की घोषणा तो पहले कर दी, लेकिन चुनाव का ऐलान अभी तक नहीं हुआ। कांग्रेस ने इसे बीजेपी की गैर-जिम्मेदाराना राजनीति और संगठनात्मक खामियों के रूप में पेश किया है।
मंगलवार, 19 जनवरी 2026 को बीजेपी ने नितिन नबीन को औपचारिक रूप से राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित किया। वे जेपी नड्डा का स्थान ले रहे हैं। बीजेपी के इस कदम को कांग्रेस ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया की अनदेखी बताते हुए कटाक्ष किया। कांग्रेस ने कहा कि अगर चुनाव होना था, तो उसे पहले कराना चाहिए था।
कांग्रेस का कटाक्ष

कांग्रेस के मीडिया विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने संवाददाताओं से कहा, “चुनाव कहां हुआ है, इसे चुनाव क्यों कहा जाए? आपने अध्यक्ष पहले घोषित कर दिया और फिर कहा कि चुनाव होगा, लेकिन चुनाव नहीं हुआ। यह प्रक्रिया लोकतंत्र की मूल भावना के विपरीत है। उन्होंने आगे कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस पूरे मामले से निराश हैं और अब वे इस्तीफा देने की सोच रहे हैं। पवन खेड़ा के मुताबिक, ज्ञानेश कुमार को न तो चुनाव प्रक्रिया में भूमिका दी गई और न ही उन्हें चुनाव को प्रभावित करने का अवसर मिला।
पवन खेड़ा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी कटाक्ष करते हुए कहा कि बीजेपी के लोग अब ‘बिग बॉस’ का गेम खेल रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की आंखों से आंसू निकल रहे हैं, जो इस पूरी प्रक्रिया की नाजुकता को दिखाता है। कांग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों का मजाक बताया।
बीजेपी अध्यक्ष पद की प्रक्रिया
बीजेपी का अध्यक्ष पद पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में अहम स्थान रखता है। परंपरागत तौर पर इस पद के लिए चुनाव आयोजित होते हैं, जिसमें विभिन्न स्तरों के पार्टी प्रतिनिधि भाग लेते हैं। लेकिन इस बार पार्टी ने अध्यक्ष का चुनाव किए बिना ही नितिन नबीन को घोषित कर दिया, जिससे कांग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया की अनदेखी करार दिया।
बीजेपी के संगठनात्मक ढांचे में यह कदम राजनीतिक विश्लेषकों के लिए भी चर्चा का विषय बन गया है। चुनाव की प्रक्रिया के बिना अध्यक्ष घोषित करना संगठनात्मक निर्णयों पर सवाल खड़ा कर सकता है। कांग्रेस का कहना है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं और प्रक्रिया का सम्मान होना चाहिए। पवन खेड़ा ने कहा, “यदि चुनाव नहीं हुए और अध्यक्ष घोषित कर दिया गया, तो यह जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ अन्याय है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त जैसे संवैधानिक अधिकारी भी इससे असंतुष्ट हैं।











