भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement) के पहले चरण को आगे बढ़ाने के लिए इस सप्ताह अहम प्रगति की उम्मीद जताई जा रही है।
नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement) को लेकर बातचीत अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है। इस सप्ताह नई दिल्ली में होने वाली दो दिवसीय उच्च स्तरीय बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिसमें दोनों देश समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप देने की दिशा में ठोस प्रगति कर सकते हैं।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि Jamieson Greer और भारत के केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Piyush Goyal 23 से 24 जून के बीच नई दिल्ली में वार्ता करेंगे। इससे पहले जून के पहले सप्ताह में दोनों देशों के मुख्य वार्ताकारों के बीच विस्तृत चर्चा हो चुकी है, जिसने आगे की बातचीत की नींव तैयार की है।
व्यापार समझौते का लक्ष्य और रणनीतिक महत्व
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, इस वार्ता का मुख्य उद्देश्य व्यापार समझौते के ढांचे को अंतिम रूप देना और उन मुद्दों को सुलझाना है जिन पर अब तक सहमति नहीं बन पाई है। वाणिज्य सचिव के अनुसार, भारत और अमेरिका अगले महीने के मध्य तक समझौते के पहले चरण को लागू करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
यह वार्ता ऐसे समय हो रही है जब वैश्विक व्यापार व्यवस्था कई बदलावों से गुजर रही है और अमेरिका की नई टैरिफ नीति की समय-सीमा भी नजदीक है। ऐसे में दोनों देशों के लिए यह समझौता आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत की प्रमुख मांगें: प्रतिस्पर्धी देशों से बेहतर स्थिति
भारत की सबसे बड़ी मांग यह है कि उसे अमेरिकी बाजार में अपने प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बेहतर शुल्क (tariff) लाभ मिले। भारत चाहता है कि उसके उत्पादों को वियतनाम, बांग्लादेश, पाकिस्तान और ASEAN देशों की तुलना में अधिक अनुकूल व्यापारिक स्थिति प्राप्त हो। नई दिल्ली का मानना है कि वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है और ऐसे में समान या कम शुल्क संरचना भारत के निर्यात को मजबूत कर सकती है। विशेष रूप से टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, आईटी सेवाएं और औद्योगिक उत्पादों के लिए यह समझौता महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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ऊर्जा और निवेश प्रस्तावों पर भी चर्चा
भारत ने इस वार्ता के दौरान अमेरिका से बड़े पैमाने पर ऊर्जा और तकनीकी उत्पादों की खरीद का प्रस्ताव भी रखा है। फरवरी में भारत ने संकेत दिया था कि वह अगले पांच वर्षों में अमेरिका से लगभग 500 अरब डॉलर मूल्य के ऊर्जा उत्पाद, विमान, तकनीकी उपकरण और कोकिंग कोल खरीदने के लिए तैयार है।इस कदम को दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन सुधारने और रणनीतिक आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि दोनों देशों के बीच समझौते की रूपरेखा तैयार हो चुकी है, लेकिन टैरिफ (शुल्क) से जुड़े कुछ मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने पहले ही स्पष्ट किया था कि जब तक भारत को प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले बेहतर व्यापारिक लाभ नहीं मिलेगा, तब तक समझौते को अंतिम रूप नहीं दिया जाएगा।
सरकार का मानना है कि अमेरिकी बाजार में भारत के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है, ताकि भारतीय उत्पाद वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें।
वैश्विक व्यापार पर प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता सफलतापूर्वक अंतिम रूप ले लेता है, तो इसका असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक व्यापार व्यवस्था पर भी दिखाई देगा। भारत और अमेरिका दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं, और इनके बीच बेहतर व्यापारिक सहयोग से आपूर्ति श्रृंखला, निवेश और तकनीकी साझेदारी को नई दिशा मिल सकती है।










