भारत–कनाडा संबंधों में नई शुरुआत: डोभाल-ड्रोइन वार्ता के बाद सुरक्षा सहयोग पर बनी व्यापक सहमति

एनएसए अजीत डोभाल और कनाडा के सुरक्षा सलाहकार डेविड ड्रोइन की वार्ता के बाद भारत–कनाडा संबंधों में नई शुरुआत के संकेत मिले हैं। दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग

भारत और कनाडा के संबंधों में लंबे समय बाद सकारात्मक मोड़ आता दिख रहा है। कनाडा में राजनीतिक बदलाव और जस्टिन ट्रूडो के सत्ता से हटने के बाद दोनों देशों के बीच जमी हुई कूटनीतिक बर्फ पिघलती नजर आ रही है।

नई दिल्ली: कनाडा और भारत के रिश्ते नए आयाम की ओर बढ़ते दिख रहे हैं, क्योंकि भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल की कनाडा यात्रा के दौरान दोनों देश राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून प्रवर्तन के क्षेत्र में सहयोग के लिए एक ‘साझा कार्य योजना’ तैयार करने पर सहमत हुए हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, ओटावा में शनिवार को डोभाल और उनकी कनाडाई समकक्ष नताली ड्रोइन के बीच हुई बैठक में दोनों पक्ष अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क जैसी पारस्परिक चिंताओं से निपटने के लिए व्यावहारिक और व्यापक सहयोग की रूपरेखा पर भी सहमत हुए।

सुरक्षा सहयोग पर बनी व्यापक सहमति

विदेश मंत्रालय के अनुसार, शनिवार को ओटावा में अजीत डोभाल और उनकी कनाडाई समकक्ष नताली ड्रोइन के बीच उच्चस्तरीय बैठक हुई। इस बैठक में दोनों पक्षों ने अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध, ड्रग तस्करी, साइबर अपराध और अवैध वित्तीय गतिविधियों जैसे पारस्परिक सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए ठोस और व्यावहारिक सहयोग ढांचे पर सहमति जताई।

दोनों देशों ने यह माना कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में सीमा-पार अपराध, साइबर खतरे और आतंकवाद जैसी चुनौतियों से अकेले नहीं निपटा जा सकता। इसलिए सूचना साझा करने, समन्वय बढ़ाने और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सीधा संपर्क स्थापित करने पर जोर दिया गया।

संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में बड़ा कदम

यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब 2023 में खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर भारत और कनाडा के बीच गंभीर राजनयिक तनाव पैदा हो गया था। उस विवाद के बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजनयिकों को निष्कासित किया था और द्विपक्षीय संबंध लगभग ठंडे पड़ गए थे। अब नई सरकार और बदले हुए माहौल में दोनों देश धीरे-धीरे संवाद की मेज पर लौट रहे हैं। 

डोभाल की यात्रा को इसी प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। इसके अलावा, अगले महीने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की संभावित भारत यात्रा की भी तैयारी चल रही है, जिसे लेकर यह बैठक और भी अहम हो जाती है।

क्या-क्या तय हुआ?

विदेश मंत्रालय के बयान के मुताबिक, बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए:

  • साझा कार्य योजना: राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून प्रवर्तन के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को दिशा देने के लिए एक संरचित ढांचा तैयार किया जाएगा।
  • संपर्क अधिकारी नियुक्ति: दोनों देश अपने-अपने सुरक्षा और कानून प्रवर्तन संपर्क अधिकारी नियुक्त करेंगे, ताकि समन्वय तेज और प्रभावी हो सके।
  • सूचना साझा करने की व्यवस्था: मादक पदार्थों की तस्करी, संगठित अपराध और वित्तीय अपराधों से जुड़ी समय पर जानकारी साझा करने पर सहमति बनी।
  • साइबर सुरक्षा सहयोग: साइबर सुरक्षा नीति और खतरों से जुड़ी सूचनाओं के आदान-प्रदान को औपचारिक रूप देने पर बात हुई।
  • आव्रजन और धोखाधड़ी मामलों में सहयोग: घरेलू कानूनों और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के अनुरूप आव्रजन प्रवर्तन और वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में मिलकर काम करने पर चर्चा जारी रखने का निर्णय लिया गया।

मंत्रालय ने इसे “महत्वपूर्ण कदम” बताते हुए कहा कि इससे द्विपक्षीय संवाद सुव्यवस्थित होगा और आपसी चिंता के मुद्दों पर तेजी से कार्रवाई संभव हो सकेगी।विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता सिर्फ द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक रणनीतिक दृष्टिकोण से भी अहम है। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियों और आतंकवाद के खतरे को देखते हुए भारत और कनाडा के बीच बेहतर सुरक्षा सहयोग दोनों देशों के हित में है।

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