भारत में पेट्रोल-डीजल और CNG की कीमतों में बढ़ोतरी, विपक्ष ने केंद्र सरकार को घेरा

भारत में पेट्रोल, डीजल और CNG की बढ़ती कीमतों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष ने महंगाई और ईंधन दरों को लेकर केंद्र सरकार को घेरा है। बढ़ती

देश में पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में बड़ा इजाफा किया गया है। सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल के दाम में 3.14 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 3.11 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। वहीं, सीएनजी भी 2 रुपये प्रति किलो महंगी हो गई है। नई दरें शुक्रवार से लागू हो गई हैं।

नई दिल्ली: भारत में लंबे अंतराल के बाद पेट्रोल, डीजल और CNG की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी की गई है। सरकारी तेल कंपनियों ने शुक्रवार से पेट्रोल की कीमत में 3.14 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 3.11 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि लागू कर दी है। वहीं, CNG की कीमतों में भी 2 रुपये प्रति किलोग्राम तक का इजाफा किया गया है। नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं।

करीब चार वर्षों बाद ईंधनों की कीमतों में इस तरह का संशोधन होने से देशभर में राजनीतिक और आर्थिक बहस तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इसे आम जनता पर अतिरिक्त बोझ बताते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा है, जबकि तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की लगातार बढ़ती कीमतों के कारण यह फैसला जरूरी हो गया था।

कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना

मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार की आलोचना की है। पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि महंगाई लगातार आम लोगों की जिंदगी को प्रभावित कर रही है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि चुनाव समाप्त होने के तुरंत बाद ईंधन की कीमतें बढ़ा दी गईं, जिससे जनता पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ेगा। पार्टी ने पेट्रोल, डीजल और CNG की कीमतों में हुई बढ़ोतरी को आम उपभोक्ताओं, परिवहन क्षेत्र और मध्यम वर्ग के लिए चिंता का विषय बताया।

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए कहा कि “आगे बढ़ना है तो साइकिल ही विकल्प है। उनकी टिप्पणी को बढ़ती ईंधन कीमतों और महंगे परिवहन खर्च पर राजनीतिक प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है। भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों का असर सीधे तौर पर परिवहन, खाद्य पदार्थों और दैनिक जरूरतों की वस्तुओं की कीमतों पर पड़ता है।

क्यों बढ़ाए गए ईंधन के दाम?

सरकारी तेल कंपनियों — इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम — का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी के कारण उन्हें भारी वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ रहा था। पश्चिम एशिया में जारी तनाव, विशेष रूप से ईरान और क्षेत्रीय संघर्षों के कारण वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय क्रूड ऑयल बाजार पर पड़ा, जहां कीमतों में लगातार उछाल देखने को मिला।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए वैश्विक बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव का असर घरेलू ईंधन कीमतों पर पड़ना स्वाभाविक है।

तेल कंपनियों का क्या कहना है?

तेल विपणन कंपनियों का दावा है कि लंबे समय से खुदरा कीमतों में बदलाव नहीं होने के कारण उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पहले ही संकेत दिए थे कि तेल कंपनियों को प्रतिदिन 1000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो रहा है। सरकार के अनुसार, यदि कीमतों में संशोधन नहीं किया जाता, तो एक तिमाही के भीतर कंपनियों का कुल घाटा 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच सकता था। इसी आर्थिक दबाव को देखते हुए पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाने का फैसला लिया गया।

विशेषज्ञों का कहना है कि ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहेगा। परिवहन लागत बढ़ने से खाद्य पदार्थों, रोजमर्रा की वस्तुओं और लॉजिस्टिक्स खर्च में भी वृद्धि हो सकती है। CNG महंगी होने से टैक्सी, ऑटो और सार्वजनिक परिवहन सेवाओं का किराया भी बढ़ सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में महंगाई दर पर इसका असर देखने को मिल सकता है।

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