नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को बड़े कार्गो हब के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। एयर कार्गो और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को मजबूत करने के लिए AFCOM और AISATS के बीच समझौता हुआ है।
इस साझेदारी का उद्देश्य एयरपोर्ट पर आधुनिक और बेहतर लॉजिस्टिक इकोसिस्टम तैयार करना है, जिससे माल ढुलाई और सप्लाई चेन को नई गति मिल सके।
सूत्रों के मुताबिक, कार्गो संचालन को विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस किया जाएगा। इससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय व्यापार दोनों को फायदा मिलने की उम्मीद है।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को भविष्य में उत्तर भारत के प्रमुख एयर कार्गो सेंटर के रूप में विकसित करने की योजना है। यहां आधुनिक वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज और तेज कस्टम क्लियरेंस जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना से ई-कॉमर्स, फार्मा, कृषि उत्पाद और एक्सपोर्ट सेक्टर को बड़ा लाभ मिलेगा। कारोबारियों के लिए माल भेजना और प्राप्त करना अधिक आसान हो सकेगा।
उत्तर प्रदेश सरकार भी एयरपोर्ट आधारित औद्योगिक और लॉजिस्टिक विकास को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को इसी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
व्यापार जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि बड़ा कार्गो हब बनने से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ेंगी।
सोशल मीडिया पर भी इस समझौते को लेकर चर्चा तेज है। कई लोग इसे उत्तर भारत के आर्थिक विकास के लिए अहम कदम बता रहे हैं।
AISATS और AFCOM के बीच हुए इस समझौते से एयर कार्गो संचालन को नई तकनीक और बेहतर प्रबंधन का लाभ मिलने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में तेजी से बढ़ते ई-कॉमर्स और निर्यात बाजार को देखते हुए आधुनिक कार्गो हब की जरूरत लगातार बढ़ रही है।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पूरी तरह विकसित होने के बाद यह क्षेत्र देश के सबसे बड़े लॉजिस्टिक और एविएशन नेटवर्क में शामिल हो सकता है।
फिलहाल परियोजना को लेकर तैयारियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं और संबंधित एजेंसियां लॉजिस्टिक ढांचे को अंतिम रूप देने में जुटी हैं।









