भीलवाड़ा में युवक के अपहरण और मारपीट के मामले में पुलिस ने 3 हिस्ट्रीशीटरों की सार्वजनिक परेड निकाली। आरोपियों ने फिरौती मांगी थी। पुलिस ने उन्हें पैदल बाजार में घुमाकर सख्त संदेश दिया और मामले की जांच जारी है।
भीलवाड़ा: राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में एक गंभीर आपराधिक मामले के बाद पुलिस ने सख्त कार्रवाई करते हुए तीन कुख्यात हिस्ट्रीशीटरों की सार्वजनिक परेड निकाली। यह मामला उस समय सामने आया जब एक युवक का अपहरण कर उसके साथ बेरहमी से मारपीट की गई और फिरौती की मांग की गई थी। यह घटना इलाके में कानून-व्यवस्था और अपराध पर पुलिस की सख्ती को लेकर चर्चा का विषय बन गई है।
अपहरण और फिरौती का पूरा मामला
घटना भीलवाड़ा जिले के Gulabpura थाना क्षेत्र की है। 18 जून को दिल्ली से लौटे एक युवक का कथित तौर पर अपहरण कर लिया गया। आरोप है कि उसे जबरन गाड़ी में डालकर गंगापुर क्षेत्र ले जाया गया, जहां उसके साथ गंभीर मारपीट की गई।
पीड़ित के अनुसार, आरोपियों ने उसे छोड़ने के बदले 5 लाख रुपये की फिरौती की मांग की। बाद में 19 जून की शाम उसे भीलवाड़ा बाईपास क्षेत्र में घायल अवस्था में छोड़ दिया गया। किसी तरह वह रात करीब 11 बजे अपने घर पहुंचा, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस घटना ने स्थानीय लोगों में भय और आक्रोश दोनों पैदा किया।
गिरफ्तार आरोपी और उनकी पहचान
पुलिस ने इस मामले में तीन हिस्ट्रीशीटरों को गिरफ्तार किया है, जिनकी पहचान सिकंदर लॉटरी, समीर पठान और काला के रूप में हुई है। ये सभी अलग-अलग थानों के हिस्ट्रीशीटर बताए जा रहे हैं और इनके खिलाफ पहले से भी आपराधिक रिकॉर्ड दर्ज हैं। पुलिस का कहना है कि यह मामला केवल अपहरण और मारपीट का नहीं, बल्कि संगठित अपराध और जबरन वसूली से भी जुड़ा हुआ है।
पुलिस की सख्त कार्रवाई: सार्वजनिक परेड
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपियों को मौके की तस्दीक के लिए ले जाने के दौरान सार्वजनिक रूप से पैदल परेड कराई। उन्हें थाने से लगभग 1 किलोमीटर दूर तक पैदल चलाया गया, जहां बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात था। इस दौरान आरोपी काफी कमजोर और असहज हालत में दिखाई दिए। कई बार वे चलते-चलते सड़क पर बैठने लगे, जबकि पुलिस उन्हें आगे बढ़ने के लिए कहती रही। कुछ मौकों पर उन्हें संभालकर फिर से खड़ा किया गया।
जनता के सामने प्रदर्शन और प्रतिक्रिया
परेड के दौरान सड़क पर बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। राहगीर, दुकानदार और वाहन चालकों ने रुक-रुक कर इस दृश्य को देखा। कई लोगों ने इसे अपराध के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में देखा, जबकि कुछ ने इस तरह की सार्वजनिक परेड को लेकर अलग-अलग राय भी जताई। स्थानीय लोगों का कहना था कि इन आरोपियों के कारण इलाके में पहले भी डर का माहौल रहा है, इसलिए पुलिस की यह कार्रवाई एक मजबूत संदेश देती है।
पुलिस का आधिकारिक बयान
भीलवाड़ा पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपी लंबे समय से आपराधिक गतिविधियों में शामिल थे और इलाके में भय का माहौल बनाने की कोशिश करते थे।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह परेड किसी दंड के रूप में नहीं बल्कि जांच प्रक्रिया के तहत ‘मौका तस्दीक’ (crime scene verification) का हिस्सा थी। इसका उद्देश्य घटना से जुड़े तथ्यों की पुष्टि करना और अपराध की परिस्थितियों को समझना था। अधिकारियों ने यह भी कहा कि अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और किसी भी तरह की आपराधिक गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
संगठित अपराध और हिस्ट्रीशीटर नेटवर्क पर कार्रवाई
यह मामला इस बात की ओर इशारा करता है कि कुछ क्षेत्रों में संगठित अपराध और हिस्ट्रीशीटर गैंग सक्रिय हैं। ऐसे समूह अक्सर अपहरण, धमकी और फिरौती जैसे मामलों में शामिल पाए जाते हैं। पुलिस का कहना है कि इन नेटवर्क को खत्म करने के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं और ऐसे अपराधियों की पहचान कर उन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत सजा दिलाई जाएगी।
कानून-व्यवस्था और पुलिस रणनीति
भीलवाड़ा पुलिस की इस कार्रवाई को कानून-व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में एक सख्त संदेश माना जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि ऐसे कदमों से अपराधियों में डर पैदा होता है और आम जनता का भरोसा पुलिस पर बढ़ता है। हालांकि, विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि ऐसी कार्रवाइयों को पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया और मानवाधिकार नियमों के तहत ही किया जाना चाहिए।
पीड़ित की स्थिति और जांच आगे जारी
अपहृत युवक अभी भी चिकित्सा देखरेख में है। डॉक्टरों के अनुसार, उसे गंभीर चोटें आई हैं, जिनका इलाज जारी है। पुलिस ने बताया कि मामले की विस्तृत जांच की जा रही है और अन्य संभावित सहयोगियों की तलाश भी जारी है।












