भुवनेश्वर में Ola, Uber और Rapido से जुड़े ऑटो-टैक्सी ड्राइवरों का प्रदर्शन तीसरे दिन भी जारी रहा। यूनियन ने 30 सूत्रीय मांगों के साथ किराया नियमन, ईंधन कीमतों के अनुसार किराया, बोनस और प्रतीक्षा शुल्क बढ़ाने की मांग की है।
भुवनेश्वर: ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में ऑनलाइन कैब और ऑटो सेवाओं से जुड़े ड्राइवरों का विरोध प्रदर्शन बुधवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। ऑल ओडिशा गिग वर्कर्स यूनियन के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ड्राइवरों ने लोअर पीएमजी से मास्टर कैंटीन तक प्रदर्शन किया। ड्राइवरों की 30 सूत्रीय मांगों को लेकर चल रहा यह आंदोलन अब शहर की परिवहन व्यवस्था पर भी असर डालने लगा है। प्रदर्शन के कारण कुछ प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित हुआ और Ola, Uber तथा Rapido जैसी ऐप आधारित सेवाओं की उपलब्धता पर असर पड़ा।
30 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदर्शन
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए ऑटो और टैक्सी चलाने वाले ड्राइवर लंबे समय से किराया, ईंधन की बढ़ती कीमतों और आय में कमी जैसे मुद्दों को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर कर रहे हैं। यूनियन का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में ऐप कंपनियों द्वारा तय किराया और ड्राइवरों की वास्तविक लागत के बीच पर्याप्त संतुलन नहीं है।
इसी वजह से ड्राइवरों ने सरकार से 30 सूत्रीय मांगों पर तत्काल चर्चा करने और उनके लिए स्पष्ट नियम बनाने की मांग की है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अगर सरकार और संबंधित कंपनियां उनकी समस्याओं पर ठोस कदम नहीं उठातीं, तो आंदोलन को आगे भी जारी रखा जा सकता है।
किराया तय करने की मांग
प्रदर्शन कर रहे Ola, Uber और Rapido ड्राइवरों की प्रमुख मांग ऑनलाइन टैक्सी सेवाओं के किराये को सरकारी स्तर पर विनियमित करने की है। यूनियन ने यात्रियों के लिए एक निश्चित किराया संरचना लागू करने की मांग की है।
ड्राइवरों के प्रस्ताव के अनुसार, दिन के समय किराया 12 रुपये प्रति किलोमीटर और रात में 15 रुपये प्रति किलोमीटर होना चाहिए। उनका कहना है कि मौजूदा दरों में ईंधन, वाहन रखरखाव, बीमा, लोन की किस्त और अन्य परिचालन खर्च निकालना मुश्किल हो रहा है।
ड्राइवरों का तर्क है कि ऐप आधारित कैब सेवा में ग्राहक से लिया गया कुल किराया और ड्राइवर को मिलने वाली वास्तविक राशि अलग-अलग होती है। ऐसे में किराये की पारदर्शी और व्यावहारिक व्यवस्था जरूरी है, ताकि यात्रियों और ड्राइवरों दोनों के हितों की रक्षा हो सके।
ईंधन महंगा होने पर बढ़े किराये की मांग
ड्राइवरों ने ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ किराये में स्वत: संशोधन की मांग भी रखी है। उनका कहना है कि पेट्रोल और डीजल की कीमत बढ़ने पर वाहन चलाने की लागत सीधे प्रभावित होती है, लेकिन ड्राइवर की कमाई उसी अनुपात में नहीं बढ़ती।
यूनियन के मुताबिक, ईंधन कीमतों में बदलाव को किराया प्रणाली से जोड़ने के लिए स्पष्ट फॉर्मूला बनाया जाना चाहिए। इससे ड्राइवरों को अचानक बढ़ने वाली परिचालन लागत से राहत मिल सकती है।
यह मांग केवल भुवनेश्वर तक सीमित नहीं है। देश के कई शहरों में ऐप आधारित परिवहन सेवाओं से जुड़े ड्राइवर कमीशन, ईंधन लागत, किराया निर्धारण और काम के अस्थिर स्वरूप को लेकर समय-समय पर विरोध करते रहे हैं।
पीक ऑवर और वीकेंड बोनस की मांग
ड्राइवरों ने व्यस्त समय और सप्ताहांत के लिए अतिरिक्त बोनस की भी मांग की है। उनका कहना है कि पीक ऑवर में सड़क पर ट्रैफिक बढ़ने के कारण एक यात्रा पूरी करने में ज्यादा समय लगता है, जबकि ड्राइवर को मिलने वाली राशि हमेशा अतिरिक्त समय और ईंधन लागत के अनुरूप नहीं होती।
इसी तरह सप्ताहांत और छुट्टियों के दौरान यात्रियों की मांग बढ़ने पर ड्राइवरों को अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि देने की मांग की गई है। यूनियन का मानना है कि इससे ड्राइवरों को अधिक व्यस्त समय में सेवा देने के लिए उचित आर्थिक प्रोत्साहन मिलेगा।
लंबी दूरी की पिकअप के लिए मुआवजा
प्रदर्शनकारियों की एक अन्य प्रमुख मांग लंबी दूरी से यात्रियों को लेने जाने पर अतिरिक्त भुगतान की है। कई बार ड्राइवर को यात्री तक पहुंचने के लिए काफी दूरी खाली वाहन के साथ तय करनी पड़ती है।
ड्राइवरों का कहना है कि ऐसी स्थिति में वाहन का ईंधन और समय खर्च होता है, लेकिन उन्हें उस अतिरिक्त दूरी का पर्याप्त भुगतान नहीं मिलता। इसलिए यूनियन ने लंबी दूरी के पिकअप के लिए अलग मुआवजा तय करने की मांग की है।

इसके अलावा, यात्रियों के इंतजार में लगने वाले समय के लिए अधिक भुगतान की मांग भी की गई है। ड्राइवरों के अनुसार, कई बार उन्हें लंबे समय तक एक ही स्थान पर इंतजार करना पड़ता है, जिससे उनकी कमाई प्रभावित होती है।
ड्राइवरों ने सरकार पर लगाया आश्वासन पूरा न करने का आरोप
प्रदर्शन में शामिल एक ड्राइवर ने कहा कि सरकार की ओर से हर बार आश्वासन दिया जाता है, लेकिन जमीन पर स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं आता। ड्राइवरों का कहना है कि वाहन की किस्त, ईंधन, मरम्मत और परिवार के रोजमर्रा के खर्चों के बाद उनके पास पर्याप्त आय नहीं बचती।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका आंदोलन यात्रियों के खिलाफ नहीं है। वे चाहते हैं कि सरकार उनकी समस्याओं को समझे और ऐसी नीति तैयार करे जिससे ऐप आधारित परिवहन व्यवस्था में ड्राइवरों को बेहतर आर्थिक सुरक्षा मिल सके।
यात्रियों पर पड़ा असर
ड्राइवरों की हड़ताल और प्रदर्शन का सीधा असर भुवनेश्वर में कैब और ऑटो सेवाओं पर पड़ रहा है। ऑनलाइन टैक्सी बुक करने वाले यात्रियों को उपलब्धता कम होने, ज्यादा इंतजार और कुछ इलाकों में परिवहन विकल्पों की कमी का सामना करना पड़ सकता है।
प्रमुख मार्गों पर प्रदर्शन के कारण यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हुई। लोअर पीएमजी से मास्टर कैंटीन तक प्रदर्शन के दौरान सड़क पर बड़ी संख्या में ड्राइवरों की मौजूदगी से आवाजाही धीमी हुई।
भुवनेश्वर जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में ऐप आधारित टैक्सी और ऑटो सेवाएं सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी हैं। ऐसे में लंबे समय तक चलने वाला विरोध आम यात्रियों के लिए परेशानी बढ़ा सकता है।
गिग वर्कर्स की व्यापक समस्या
भुवनेश्वर का यह विरोध भारत में गिग इकॉनमी से जुड़े श्रमिकों की व्यापक चुनौतियों को भी सामने लाता है। ऐप आधारित काम में ड्राइवरों को अपेक्षाकृत लचीला कार्य समय मिलता है, लेकिन उनकी आय मांग, किराये, प्लेटफॉर्म शुल्क और काम के घंटों जैसे कई कारकों पर निर्भर करती है।
ड्राइवर संगठनों का कहना है कि प्लेटफॉर्म आधारित रोजगार व्यवस्था में सामाजिक सुरक्षा, न्यूनतम आय, बीमा और पारदर्शी कमीशन प्रणाली जैसे मुद्दों पर भी स्पष्ट नीतियों की जरूरत है।
दूसरी ओर, ऐप आधारित कंपनियों के लिए यात्रियों को प्रतिस्पर्धी किराये पर सेवा उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण है। यदि किराया बहुत बढ़ता है, तो यात्रियों की मांग प्रभावित हो सकती है। इसलिए सरकार के सामने ड्राइवरों की आय और यात्रियों के लिए उचित किराये के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है।
सरकार से तत्काल बातचीत की मांग
ऑल ओडिशा गिग वर्कर्स यूनियन ने ओडिशा सरकार से तत्काल बातचीत शुरू करने की अपील की है। यूनियन चाहती है कि उसकी 30 सूत्रीय मांगों पर सरकार, ड्राइवर प्रतिनिधियों और संबंधित हितधारकों के बीच औपचारिक चर्चा हो।
ड्राइवर संगठनों का कहना है कि बातचीत के जरिए किराया निर्धारण, ईंधन लागत, बोनस, प्रतीक्षा शुल्क और लंबी दूरी के पिकअप जैसे मुद्दों का व्यावहारिक समाधान निकाला जा सकता है।
सरकार की ओर से यदि समयबद्ध बातचीत और स्पष्ट नीति की दिशा में कदम उठाए जाते हैं, तो आंदोलन को समाप्त करने का रास्ता खुल सकता है। वहीं, अगर मांगों पर कोई ठोस पहल नहीं होती, तो विरोध आगे भी बढ़ने की संभावना बनी रह सकती है।
आगे क्या होगा?
भुवनेश्वर में Ola, Uber और Rapido से जुड़े ड्राइवरों का तीसरे दिन भी जारी विरोध अब सरकार के लिए बातचीत और नियमन की चुनौती बन गया है। ड्राइवर बेहतर किराया, अतिरिक्त भुगतान और प्लेटफॉर्म आधारित परिवहन के लिए स्पष्ट नियम चाहते हैं।
आने वाले दिनों में सरकार और यूनियन के बीच बातचीत यह तय कर सकती है कि आंदोलन समाप्त होता है या इसका विस्तार होता है। फिलहाल, ड्राइवरों की मांगों ने गिग वर्कर्स की आय, प्लेटफॉर्म कमीशन और ऐप आधारित परिवहन सेवाओं के नियमन को एक बार फिर सार्वजनिक बहस के केंद्र में ला दिया है।











