बिहार में सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को बदलने की दिशा में सरकार कई स्तरों पर काम कर रही है। इसी कड़ी में अब सरकारी स्कूलों को समाज से जोड़ने की योजना पर जोर दिया जा रहा है। इसके तहत NRI और पूर्व छात्र यानी एलुमनी सरकारी स्कूलों को गोद लेकर उनके विकास में सहयोग कर सकेंगे। इसके साथ ही सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को JEE और NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मुफ्त कोचिंग उपलब्ध कराने की पहल भी आगे बढ़ाई जा रही है।
सरकार का उद्देश्य सरकारी स्कूलों को केवल बोर्ड परीक्षा तक सीमित रखने के बजाय उन्हें ऐसे संस्थानों के रूप में विकसित करना है, जहां छात्रों को आधुनिक तकनीक, बेहतर शिक्षण व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का अवसर एक ही जगह मिल सके। हाल के दिनों में शुरू की गई बिहार स्कूल लाइव क्लासेज पहल इसी दिशा में एक बड़ा कदम है। इसके तहत सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को विशेषज्ञ शिक्षकों की लाइव और इंटरएक्टिव कक्षाओं से जोड़ने की तैयारी की गई है।
सरकारी स्कूलों के छात्रों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में JEE और NEET की मुफ्त तैयारी को शामिल किया गया है। अभी इस व्यवस्था की शुरुआत चयनित मॉडल स्कूलों से की गई है। पहले चरण में पटना के 10 मॉडल स्कूलों को लाइव टीचिंग सिस्टम से जोड़ा गया और JEE के लिए 266 तथा NEET के लिए 252 छात्रों ने पंजीकरण कराया था। योजना को आगे राज्य के अन्य मॉडल स्कूलों तक विस्तार देने की तैयारी है।
अब इस व्यवस्था का दायरा बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। ताजा जानकारी के मुताबिक बिहार विद्यालय परीक्षा समिति JEE और NEET की मुफ्त कोचिंग को और अधिक सरकारी स्कूलों तक पहुंचाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। 15 अगस्त से 146 स्कूलों में मुफ्त JEE-NEET कोचिंग का विस्तार किए जाने की जानकारी सामने आई है। इससे सरकारी स्कूलों के ज्यादा छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का अवसर मिलने की उम्मीद है।
सरकारी स्कूलों को NRI और पूर्व छात्रों से जोड़ने की योजना को भी इसी व्यापक बदलाव का हिस्सा माना जा रहा है। किसी स्कूल से पढ़कर देश-विदेश में अपनी पहचान बनाने वाले पूर्व छात्र यदि वापस अपने स्कूल से जुड़ते हैं तो वे शिक्षा, संसाधन, तकनीक, करियर मार्गदर्शन और अन्य जरूरतों में योगदान दे सकते हैं। विदेशों में रहने वाले पूर्व छात्र भी डिजिटल माध्यम से स्कूलों और विद्यार्थियों से जुड़कर सहयोग कर सकेंगे।
स्कूल को गोद लेने की व्यवस्था का उद्देश्य केवल आर्थिक मदद जुटाना नहीं है। इसके जरिए स्कूलों की वास्तविक जरूरतों को समझकर उनमें सुधार करने की कोशिश की जा सकती है। किसी स्कूल को स्मार्ट क्लास की जरूरत है, कहीं विज्ञान प्रयोगशाला को बेहतर बनाने की आवश्यकता है, तो कहीं पुस्तकालय, खेल सामग्री या डिजिटल संसाधनों की कमी हो सकती है। पूर्व छात्र और NRI इन क्षेत्रों में अपनी क्षमता के अनुसार योगदान दे सकते हैं।
इस पहल से स्कूल और उसके पुराने छात्रों के बीच संबंध भी मजबूत हो सकते हैं। अक्सर किसी स्कूल से पढ़े छात्र नौकरी या व्यवसाय के बाद देश के अलग-अलग हिस्सों और विदेशों में चले जाते हैं। वर्षों बाद भी यदि वे अपने पुराने स्कूल से जुड़े रहें तो वहां पढ़ने वाले नए विद्यार्थियों को उनके अनुभव का लाभ मिल सकता है।
बिहार सरकार की कोशिश सरकारी स्कूलों में पढ़ाई के स्तर को निजी स्कूलों के बराबर या उससे बेहतर बनाने की दिशा में है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता में सुधार को लेकर लक्ष्य रखा है। हालिया बयानों में उन्होंने कहा है कि अगले दो वर्षों में सरकारी स्कूलों की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि मंत्री, विधायक और अधिकारी भी अपने बच्चों को इन स्कूलों में पढ़ाने के लिए तैयार हों। साथ ही JEE और NEET की तैयारी तथा लाइव शिक्षकों की व्यवस्था पर भी जोर दिया गया है।
बिहार स्कूल लाइव क्लासेज के जरिए कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को तकनीक आधारित पढ़ाई से जोड़ने की योजना है। इसमें विशेषज्ञ शिक्षकों की लाइव क्लास, डिजिटल स्टडी मैटेरियल, रिकॉर्डेड लेक्चर, डाउट क्लियरिंग, मॉक टेस्ट और ऑनलाइन टेस्ट सीरीज जैसी सुविधाएं शामिल की जा रही हैं। इसका सीधा फायदा उन छात्रों को मिल सकता है, जिन्हें अपने जिले या गांव में JEE और NEET की अच्छी कोचिंग उपलब्ध नहीं हो पाती।
JEE और NEET की महंगी कोचिंग का खर्च बिहार के ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बड़ी चुनौती रहा है। ऐसे में सरकारी स्कूलों में ही मुफ्त तैयारी की सुविधा मिलने से छात्रों पर आर्थिक बोझ कम हो सकता है। प्रतिभाशाली विद्यार्थी अगर स्कूल स्तर पर ही विशेषज्ञ शिक्षकों से तैयारी कर सकें तो उन्हें बड़े शहरों में कोचिंग के लिए जाने की जरूरत कम पड़ सकती है।
इस व्यवस्था में डिजिटल शिक्षा की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। लाइव क्लास के माध्यम से किसी बड़े शहर में बैठे विशेषज्ञ शिक्षक दूर-दराज के सरकारी स्कूल के विद्यार्थियों को पढ़ा सकते हैं। इससे शिक्षकों की कमी वाले क्षेत्रों में भी विशेषज्ञ विषयों की पढ़ाई उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
JEE के लिए फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स तथा NEET के लिए फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी जैसे विषयों की मजबूत तैयारी जरूरी होती है। इसलिए केवल सामान्य स्कूली पढ़ाई से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करना कई विद्यार्थियों के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। विशेषज्ञ शिक्षकों और नियमित टेस्ट के जरिए इस अंतर को कम करने की कोशिश की जा रही है।
मुफ्त कोचिंग के साथ विद्यार्थियों को डिजिटल सामग्री और अभ्यास का अवसर मिलने से उनकी तैयारी अधिक व्यवस्थित हो सकती है। नियमित मॉक टेस्ट से छात्रों को अपनी कमियों का पता चलेगा और वे समय रहते उन पर काम कर सकेंगे। डाउट क्लियरिंग की सुविधा भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
सरकार की योजना का एक अहम पक्ष यह भी है कि सरकारी स्कूलों को केवल सरकारी तंत्र के भरोसे न छोड़कर समाज के दूसरे सक्षम लोगों को भी उनसे जोड़ा जाए। NRI, पूर्व छात्र, सामाजिक संगठन और अन्य सहयोगी स्कूलों के विकास में भागीदार बन सकते हैं। इससे स्कूलों को अतिरिक्त संसाधन और विशेषज्ञता मिल सकती है।
हालांकि इस तरह की योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि स्कूलों को गोद लेने की व्यवस्था कितनी पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से लागू होती है। यह सुनिश्चित करना जरूरी होगा कि स्कूलों की जरूरतों की सही पहचान हो, मिलने वाली सहायता का उचित इस्तेमाल हो और उसका लाभ सीधे विद्यार्थियों तक पहुंचे।
इसी तरह मुफ्त JEE-NEET कोचिंग का फायदा अधिक से अधिक जरूरतमंद और योग्य छात्रों तक पहुंचाना भी चुनौती होगी। ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को योजना की जानकारी, डिजिटल सुविधा और नियमित कक्षाओं तक पहुंच दिलाना जरूरी होगा। केवल योजना शुरू कर देना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उसके परिणामों की नियमित निगरानी भी करनी होगी।
सरकारी स्कूलों में स्मार्ट क्लास और डिजिटल तकनीक आने से पढ़ाई का तरीका भी बदल सकता है। ब्लैकबोर्ड और किताबों के साथ वीडियो, एनिमेशन, डिजिटल कंटेंट और लाइव एक्सपर्ट क्लास का इस्तेमाल छात्रों की समझ को बेहतर बना सकता है। खासकर विज्ञान और गणित जैसे विषयों में डिजिटल माध्यम उपयोगी साबित हो सकता है।
बिहार में शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की यह कोशिश इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य के लाखों बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं। यदि इन स्कूलों की गुणवत्ता में सुधार होता है तो इसका सीधा असर बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़ेगा।
सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती इस योजना को राजधानी और चुनिंदा मॉडल स्कूलों तक सीमित रखने के बजाय पूरे राज्य के सरकारी विद्यालयों तक पहुंचाने की है। शुरुआती चरण में पटना के मॉडल स्कूलों से शुरू हुई लाइव क्लास और मुफ्त प्रतियोगी परीक्षा तैयारी को आगे दूसरे जिलों तक पहुंचाने की योजना है।
यदि NRI और पूर्व छात्रों की भागीदारी भी प्रभावी तरीके से जुड़ती है तो सरकारी स्कूलों के विकास के लिए एक नया मॉडल तैयार हो सकता है। इससे सरकार के साथ समाज भी स्कूलों की जिम्मेदारी में भागीदार बनेगा। किसी स्कूल के पुराने छात्र अगर अपने अनुभव और संसाधनों के साथ वहां के बच्चों को मार्गदर्शन देंगे तो विद्यार्थियों को करियर के नए विकल्पों की जानकारी भी मिल सकती है।
इस पूरी पहल का सबसे बड़ा फायदा उन बच्चों को मिल सकता है, जिनके परिवार महंगी निजी कोचिंग का खर्च नहीं उठा सकते। अगर स्कूल में ही अच्छी पढ़ाई, लाइव विशेषज्ञ शिक्षक और प्रतियोगी परीक्षाओं की मुफ्त तैयारी उपलब्ध होती है तो ऐसे बच्चों के लिए डॉक्टर और इंजीनियर बनने का सपना अधिक सुलभ हो सकता है।
बिहार में शिक्षा व्यवस्था को बदलने की यह पहल फिलहाल विस्तार के दौर में है। सरकार डिजिटल शिक्षा, लाइव क्लास, मुफ्त JEE-NEET तैयारी और समाज की भागीदारी को एक साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है। आने वाले समय में इसका असर सरकारी स्कूलों के शैक्षणिक माहौल और छात्रों के परिणामों में दिखाई देना महत्वपूर्ण होगा।
कुल मिलाकर बिहार में सरकारी स्कूलों को आधुनिक और प्रतियोगी शिक्षा के केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी है। NRI और पूर्व छात्रों को स्कूलों से जोड़ने की योजना से संसाधन और मार्गदर्शन मिल सकता है, जबकि JEE-NEET की मुफ्त कोचिंग से आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार की कोशिश है कि संसाधनों की कमी किसी भी छात्र के बड़े सपने के रास्ते में बाधा न बने।











