बिहार में संगठित अपराध और जमीन से जुड़े विवादों को लेकर पुलिस ने सख्ती बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। भूमाफिया और उन्हें संरक्षण या मदद देने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस (बीसैप) के एडीजी नैयर हसनैन खान ने पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं। मुजफ्फरपुर में कानून-व्यवस्था की समीक्षा के दौरान उन्होंने कहा कि संगठित अपराध से जुड़े लोगों और उनके मददगारों पर कार्रवाई में किसी तरह की ढिलाई नहीं होनी चाहिए।
मुजफ्फरपुर में हुई समीक्षा बैठक में एडीजी ने अपराध नियंत्रण के साथ-साथ साइबर अपराध और वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों पर भी विशेष निगरानी रखने को कहा। पुलिस की प्राथमिकता अपराध पर जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कार्रवाई करना है। बैठक में प्रभारी डीआइजी, एसएसपी, एसपी और शहरी क्षेत्र के विभिन्न थानों के प्रभारी अधिकारी मौजूद रहे।
भूमि विवाद और जमीन पर अवैध कब्जे से जुड़े मामलों को लेकर बिहार पुलिस पहले भी कई जिलों में अभियान चला चुकी है। जुलाई 2026 में पटना पुलिस और एसटीएफ ने एक अंतरजिला भू-माफिया सिंडिकेट के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 17 आरोपितों को गिरफ्तार करने की जानकारी दी थी। पुलिस के अनुसार, गिरोह में बिहार के करीब 10 जिलों के अपराधी और शूटर शामिल थे तथा जमीन पर कब्जा करने के लिए संगठित तरीके से लोगों को जुटाया जाता था।
पुलिस मुख्यालय की ओर से पहले भी जमीन, बालू और शराब माफिया समेत अपराध से अर्जित संपत्ति रखने वाले लोगों की संपत्ति जब्त करने की प्रक्रिया पर जोर दिया गया है। मई 2026 में पुलिस मुख्यालय ने 1,434 अपराधियों की संपत्ति जब्त करने के प्रस्ताव तैयार किए थे। इनमें मुजफ्फरपुर के 109 और पटना के 105 अपराधी शामिल बताए गए थे। उस समय 428 मामलों में संपत्ति जब्ती का प्रस्ताव अदालत भेजे जाने और कुछ मामलों में नोटिस जारी होने की जानकारी दी गई थी।
मुजफ्फरपुर की ताजा समीक्षा बैठक में केवल भूमाफिया पर कार्रवाई ही नहीं, बल्कि आगामी त्योहारों को देखते हुए कानून-व्यवस्था को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। पुलिस को अगले तीन महीनों के लिए विशेष कार्ययोजना के तहत काम करने के निर्देश दिए गए हैं। असामाजिक तत्वों पर निगरानी बढ़ाने, संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करने और किसी भी स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।
महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा को लेकर भी पुलिस अधिकारियों को विशेष निर्देश दिए गए हैं। स्कूल, कॉलेज, कोचिंग संस्थानों और भीड़भाड़ वाले पिकनिक स्थलों को संवेदनशील हॉटस्पॉट के रूप में चिह्नित कर वहां पुलिस गश्त बढ़ाने की बात कही गई है। ऐसे स्थानों पर किसी शिकायत या घटना की सूचना मिलने पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।
एडीजी ने थाना स्तर पर वरिष्ठ नागरिकों की समस्याओं के समाधान के लिए बनाए जा रहे सीनियर सिटीजन सेल की भी सराहना की। पुलिस और आम लोगों के बीच संवाद बढ़ाने पर जोर दिया गया, ताकि बुजुर्गों समेत आम नागरिक अपनी शिकायतें आसानी से पुलिस तक पहुंचा सकें और उनका समय पर समाधान हो सके।
पुलिस की कार्यप्रणाली में मुकदमों के अनुसंधान और ट्रायल को तेजी देने के लिए टारगेट ओरिएंटेड पुलिसिंग लागू करने की बात भी कही गई है। इसके तहत थाना और जिला स्तर पर मामलों के निष्पादन के लिए मासिक लक्ष्य तय किए जाएंगे। अधिकारियों के काम की समीक्षा की जाएगी और बेहतर प्रदर्शन करने वालों को प्रोत्साहित किया जाएगा, जबकि लापरवाही पाए जाने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
भूमाफिया के खिलाफ कार्रवाई में पुलिस के सामने केवल जमीन कब्जे के मामलों की जांच ही चुनौती नहीं होती, बल्कि ऐसे मामलों से जुड़े दस्तावेज, पैसों के लेनदेन, बिचौलियों, आपराधिक नेटवर्क और कथित प्रभावशाली मददगारों की भूमिका की जांच भी महत्वपूर्ण होती है। इसलिए पुलिस की ओर से संगठित अपराध के नेटवर्क को चिन्हित करने और उसके पीछे मौजूद लोगों तक पहुंचने पर जोर दिया जा रहा है। हालांकि किसी व्यक्ति को भूमाफिया का संरक्षक या मददगार मानने से पहले उसके खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों और जांच के निष्कर्षों की पुष्टि जरूरी होगी।
मुजफ्फरपुर में भी भूमि विवादों के मामलों में प्रशासन पहले समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से कार्रवाई पर जोर देता रहा है। फरवरी 2026 में प्रमंडलीय आयुक्त ने दाखिल-खारिज, जमाबंदी और अन्य भूमि संबंधी मामलों के त्वरित और गुणवत्तापूर्ण निष्पादन के निर्देश दिए थे।
अब एडीजी के निर्देश के बाद पुलिस की निगरानी और कार्रवाई को और व्यापक बनाने की तैयारी है। आने वाले दिनों में भूमाफिया से जुड़े पुराने मामलों की समीक्षा, आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों की निगरानी, संपत्ति और नेटवर्क की जांच तथा लंबित मामलों के अनुसंधान में तेजी देखने को मिल सकती है। पुलिस का जोर यह सुनिश्चित करने पर है कि संगठित अपराध और जमीन से जुड़े अवैध कब्जे के मामलों में केवल सामने आए आरोपितों तक कार्रवाई सीमित न रहे, बल्कि जांच में यदि कोई अन्य सहयोगी या नेटवर्क सामने आता है तो उसके खिलाफ भी कानून के तहत कार्रवाई की जाए।
बिहार पुलिस की यह रणनीति ऐसे समय में सामने आई है जब राज्य में कानून-व्यवस्था और अपराध नियंत्रण को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों की जिलावार समीक्षा भी तेज हुई है। 26 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस मुख्यालय ने वरिष्ठ अधिकारियों को अलग-अलग जिलों की जिम्मेदारी देकर निरीक्षण और रिपोर्टिंग की व्यवस्था भी की है।











