चार दिन से बारिश, नहीं सूख रहीं दुर्गा प्रतिमाएं; कोडरमा में मूर्तिकारों की बढ़ी चिंता, पंखे-हाईमास्ट लाइट का सहारा

कोडरमा में लगातार बारिश और नमी से दुर्गा प्रतिमाओं को सुखाने में परेशानी हो रही है। मूर्तिकार पंखे और हाईमास्ट लाइट की मदद से काम पूरा कर रहे हैं।
चार दिन से बारिश, नहीं सूख रहीं दुर्गा प्रतिमाएं; कोडरमा में मूर्तिकारों की बढ़ी चिंता, पंखे-हाईमास्ट लाइट का सहारा
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कोडरमा में लगातार हो रही बारिश ने दुर्गापूजा की तैयारियों के बीच मूर्तिकारों की परेशानी बढ़ा दी है। पिछले कई दिनों से मौसम खराब रहने के कारण मिट्टी से तैयार की जा रही मां दुर्गा और अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं पर्याप्त रूप से सूख नहीं पा रही हैं। प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने, रंग-रोगन और सजावट का काम भी इससे प्रभावित हो रहा है। समय कम होने के कारण मूर्तिकार अब प्राकृतिक धूप का इंतजार करने के बजाय कृत्रिम रोशनी और पंखों की मदद से प्रतिमाओं को सुखाने की कोशिश कर रहे हैं।

कोडरमा में दुर्गापूजा को लेकर अलग-अलग इलाकों में तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। जयनगर क्षेत्र में भी सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति की बैठक में पूजा की तैयारियों को लेकर चर्चा की गई थी और आगे की बैठकों में मूर्तिकारों, टेंट संचालकों और लाइट वालों को शामिल करने का निर्णय लिया गया था।

मूर्तिकारों के सामने सबसे बड़ी समस्या प्रतिमाओं को पूरी तरह सुखाने की है। मिट्टी की प्रतिमा पर अलग-अलग चरणों में काम किया जाता है और प्रत्येक चरण के बाद पर्याप्त सुखाने का समय जरूरी होता है। बारिश के दौरान वातावरण में नमी बढ़ जाने से मिट्टी सामान्य दिनों की तुलना में धीरे सूखती है। अगर मिट्टी के पूरी तरह सूखने से पहले उस पर रंग या अन्य सामग्री लगा दी जाए तो प्रतिमा की फिनिशिंग प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि कारीगर हर चरण को सावधानी से पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं।

लगातार बारिश के कारण कई जगह मूर्तिकारों को प्रतिमाओं को सुरक्षित रखने के लिए अतिरिक्त व्यवस्था करनी पड़ रही है। कार्यस्थल पर पानी और कीचड़ जमा होने से आवाजाही और काम करने में भी परेशानी हो रही है। प्रतिमाओं को बारिश की सीधी बूंदों से बचाने के लिए उन्हें ढककर रखा जा रहा है, लेकिन इससे हवा और प्राकृतिक गर्मी भी कम मिलती है। ऐसे में प्रतिमाओं को सुखाने के लिए कृत्रिम उपायों का सहारा लेना पड़ रहा है।

झारखंड के दूसरे जिलों में भी लगातार बारिश का असर दुर्गा प्रतिमा निर्माण पर देखा गया है। रांची में मूर्तिकारों ने बारिश और धूप नहीं निकलने के कारण प्रतिमाओं की मिट्टी सुखाने के लिए पंखे, हैलोजन लाइट और गैस ब्लोअर का इस्तेमाल शुरू किया है। वहां के मूर्तिकारों के अनुसार बारिश के कारण निर्माण प्रक्रिया सामान्य दिनों की तुलना में काफी धीमी हुई है और लागत में भी बढ़ोतरी हो रही है।

हजारीबाग में भी लगातार बारिश के कारण मूर्तिकारों को प्रतिमाएं सुखाने में परेशानी हो रही है। वहां कारीगर फ्लड लाइट और ब्लोअर की मदद से प्रतिमाओं को सुखाने का प्रयास कर रहे हैं। बारिश और नमी के कारण मिट्टी में सीलन तथा फंगस का खतरा बढ़ने की बात भी सामने आई है।

चतरा में भी लगातार बारिश ने प्रतिमा निर्माण की गति को प्रभावित किया है। रिपोर्ट के अनुसार पिछले कुछ दिनों से रुक-रुककर हो रही बारिश के कारण मिट्टी की प्रतिमाएं पर्याप्त रूप से सूख नहीं पा रही हैं। वहां भी मूर्तिकार फ्लड लाइट के सहारे प्रतिमाओं को सुखाने का प्रयास कर रहे हैं।

कोडरमा में भी मूर्तिकारों के लिए समय महत्वपूर्ण है। प्रतिमाओं को पहले मिट्टी के काम से पूरी तरह तैयार करना, फिर सुखाना, इसके बाद रंग-रोगन, आभूषण, वस्त्र और अन्य सजावटी काम पूरा करना होता है। बारिश के कारण यदि सुखाने की प्रक्रिया में देरी होती है तो आगे के सभी काम प्रभावित हो सकते हैं। इसका असर प्रतिमाओं की डिलीवरी के समय पर भी पड़ सकता है।

मौसम विभाग के कोडरमा केंद्र के 25 सितंबर के पूर्वानुमान में भी आसमान में बादल रहने और मध्यम बारिश या गरज के साथ बारिश की संभावना बताई गई थी। 26 से 29 सितंबर के दौरान भी हल्की बारिश या गरज के साथ बारिश की संभावना दर्ज की गई है। इसके बाद 30 सितंबर से मौसम मुख्य रूप से साफ रहने का अनुमान दिया गया है।

मौसम में सुधार होने की उम्मीद के बावजूद फिलहाल मूर्तिकार अतिरिक्त मेहनत कर काम को समय पर पूरा करने में जुटे हैं। जहां प्राकृतिक धूप नहीं मिल रही है, वहां पंखे और हाईमास्ट या फ्लड लाइट जैसी कृत्रिम रोशनी का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसका उद्देश्य मिट्टी में मौजूद नमी को कम करना और प्रतिमाओं को अगले चरण के काम के लिए तैयार करना है।

बारिश का असर केवल प्रतिमाओं के सूखने तक सीमित नहीं है। रंग-रोगन और फिनिशिंग के लिए भी सूखा वातावरण जरूरी होता है। नमी अधिक रहने पर रंग सूखने में समय लग सकता है और अंतिम सजावट प्रभावित हो सकती है। इसलिए मूर्तिकारों को एक साथ कई स्तरों पर मौसम से मुकाबला करना पड़ रहा है।

दुर्गापूजा के नजदीक आने के साथ मूर्तिकारों पर काम पूरा करने का दबाव भी बढ़ रहा है। कई प्रतिमाओं का निर्माण पहले से तय समय के अनुसार चल रहा था, लेकिन बारिश के कारण काम की गति प्रभावित हुई है। अब कारीगर अतिरिक्त समय देकर और उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल करते हुए प्रतिमाओं को निर्धारित समय पर तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं। कोडरमा में बारिश का यह दौर कब तक जारी रहता है और मौसम साफ होने के बाद निर्माण कार्य कितनी तेजी से आगे बढ़ता है, इससे तय होगा कि मूर्तिकारों को आगे कितनी अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ेगी।

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