बिहार में बाढ़, जलजमाव और मौसम की मार झेल रहे किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर है। राज्य में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। सरकार के इस फैसले के बाद किसानों को बाढ़, सूखा, अत्यधिक बारिश और दूसरी प्राकृतिक आपदाओं से फसल को होने वाले नुकसान की स्थिति में बीमा सुरक्षा मिल सकेगी। केंद्र सरकार की ओर से भी स्पष्ट किया गया है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले फसल नुकसान को कवर किया जाता है।
बिहार सरकार ने रबी मौसम 2026-27 से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू करने का फैसला किया है। इसके साथ ही राज्य में पहले से चल रही बिहार राज्य फसल सहायता योजना को बंद करने का निर्णय लिया गया है। नई व्यवस्था के तहत किसानों को फसल के नुकसान के जोखिम से सुरक्षा देने के लिए बीमा आधारित व्यवस्था लागू होगी। सरकार का मानना है कि इससे प्राकृतिक आपदाओं के कारण खेती में होने वाले आर्थिक नुकसान से किसानों को राहत मिलेगी।
बिहार में हर साल बड़ी संख्या में किसान बाढ़ और जलजमाव की समस्या का सामना करते हैं। खासकर गंगा, गंडक, कोसी, बागमती और दूसरी नदियों के आसपास के इलाकों में बाढ़ का असर खेती पर भी पड़ता है। कई बार खेतों में पानी भरने के कारण तैयार फसल खराब हो जाती है। लगातार बारिश या नदी का जलस्तर बढ़ने से खेतों में लगी फसल डूब जाती है और किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसे समय में फसल बीमा किसानों के लिए आर्थिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बाढ़ और जलभराव जैसे जोखिमों को भी कवर किया जाता है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के मुताबिक योजना में अधिसूचित फसलों को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान के खिलाफ बीमा सुरक्षा दी जाती है। जलभराव को भी योजना के तहत जोखिम कवर के रूप में शामिल किया गया है। हालांकि बीमा का लाभ संबंधित राज्य में अधिसूचित फसल और क्षेत्र तथा योजना की शर्तों के अनुसार मिलेगा।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 20 अगस्त को पटना में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कहा था कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना अब बिहार में लागू होगी। उन्होंने कहा कि इससे किसानों को बाढ़, सूखा, बारिश और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से फसल को होने वाले नुकसान पर सुरक्षा मिलेगी। उन्होंने इसे किसानों के लिए महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि फसल खराब होने की स्थिति में किसानों को मुआवजा मिलेगा।
इस फैसले को बिहार के किसानों के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि खेती का बड़ा हिस्सा मौसम पर निर्भर है। सामान्य मौसम में किसान फसल तैयार करने के लिए बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी पर बड़ी रकम खर्च करते हैं। लेकिन अचानक आई बाढ़ या लगातार बारिश से पूरी फसल खराब हो जाए तो किसान की पूरी मेहनत और लागत दोनों पर संकट आ जाता है। ऐसे में बीमा योजना से नुकसान की स्थिति में आर्थिक सहायता मिलने की उम्मीद रहती है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किसानों को अपनी फसल के लिए निर्धारित प्रीमियम का हिस्सा देना होता है और बाकी प्रीमियम में सरकार की ओर से सब्सिडी दी जाती है। केंद्र की जानकारी के अनुसार खरीफ खाद्य और तिलहन फसलों के लिए किसान का प्रीमियम हिस्सा 2 प्रतिशत, रबी खाद्य और तिलहन फसलों के लिए 1.5 प्रतिशत तथा वाणिज्यिक और बागवानी फसलों के लिए 5 प्रतिशत तक निर्धारित है। शेष प्रीमियम सरकार की ओर से सब्सिडी के रूप में दिया जाता है।
योजना का सबसे बड़ा फायदा यह है कि किसान को प्राकृतिक जोखिम के कारण होने वाले नुकसान से पूरी तरह अकेले नहीं जूझना पड़ेगा। बाढ़ के कारण खेत में खड़ी फसल नष्ट होने, अत्यधिक बारिश से फसल खराब होने या दूसरी अधिसूचित प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान होने पर योजना की शर्तों के अनुसार बीमा दावा किया जा सकता है। हालांकि किसान को योजना में शामिल फसल, क्षेत्र, समय सीमा और दावा प्रक्रिया से संबंधित नियमों का पालन करना जरूरी होगा।
बिहार में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू होने के साथ किसानों के सामने यह भी महत्वपूर्ण होगा कि वे अपनी फसल और जमीन से जुड़े दस्तावेजों को अपडेट रखें। किसान पंजीकरण और आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी समय पर प्राप्त करना जरूरी होगा, ताकि प्राकृतिक आपदा की स्थिति में दावा प्रक्रिया में परेशानी न हो। सरकार की ओर से योजना के क्रियान्वयन और अधिसूचित फसलों एवं क्षेत्रों से संबंधित जानकारी जारी की जाएगी।
सरकार के इस फैसले से बड़े किसानों को भी फसल बीमा योजना का लाभ मिलने का रास्ता खुला है। इससे पहले बिहार में राज्य फसल सहायता योजना के तहत किसानों को फसल नुकसान पर सहायता दी जाती थी। अब बीमा आधारित व्यवस्था लागू होने से किसानों को केंद्र प्रायोजित फसल बीमा योजना के दायरे में लाया जाएगा।
बिहार में फसल सुरक्षा को लेकर यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब राज्य के कई हिस्सों में बाढ़ और अतिवृष्टि का खतरा बना हुआ है। सरकार ने खरीफ 2026 में अनियमित मानसून, अत्यधिक बारिश और कम बारिश के कारण बाढ़ या सूखे जैसी स्थिति से निपटने के लिए आकस्मिक फसल योजना के तहत वैकल्पिक फसलों के बीज वितरण की व्यवस्था के लिए भी राशि स्वीकृत की है। इससे साफ है कि राज्य में मौसम आधारित कृषि जोखिम को कम करने पर जोर दिया जा रहा है।
किसानों के लिए फसल बीमा का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि बाढ़ के दौरान सिर्फ फसल ही नहीं बल्कि खेत की मिट्टी, कृषि निवेश और अगली फसल की तैयारी पर भी असर पड़ता है। कई किसानों को दोबारा खेत तैयार करने के लिए अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है। यदि फसल कटने से पहले ही बर्बाद हो जाए तो किसान के पास बाजार में बेचने के लिए कोई उत्पादन नहीं बचता। ऐसे में बीमा से मिलने वाली सहायता परिवार की आर्थिक स्थिति को संभालने में मदद कर सकती है।
हालांकि किसानों को यह समझना होगा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना हर तरह के नुकसान पर स्वतः भुगतान की गारंटी नहीं देती। योजना में राज्य द्वारा अधिसूचित फसल और क्षेत्र, नुकसान का प्रकार और बीमा की शर्तें महत्वपूर्ण होती हैं। इसलिए किसानों को अपनी फसल का बीमा कराने से पहले संबंधित विभाग, बैंक, कृषि कार्यालय या अधिकृत माध्यम से पूरी जानकारी लेनी होगी।
केंद्र सरकार के अनुसार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना वर्ष 2016-17 से लागू है और राज्यों तथा किसानों के लिए यह स्वैच्छिक योजना है। इसमें बुवाई से लेकर फसल कटाई के बाद तक विभिन्न गैर-निवारणीय प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को कवर किया जाता है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के किसानों के लिए जलभराव का जोखिम भी खास महत्व रखता है। बिहार के कई इलाकों में बाढ़ का पानी खेतों में लंबे समय तक जमा रहने से धान और दूसरी फसलों को नुकसान पहुंचता है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि जलभराव को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में जोखिम कवर के रूप में शामिल किया गया है। हालांकि स्थानीय नुकसान के मामलों और कुछ फसलों के लिए अलग शर्तें लागू हो सकती हैं।
सरकार का दावा है कि फसल बीमा योजना के माध्यम से किसानों को खेती में जोखिम से सुरक्षा मिलेगी और प्राकृतिक आपदा के बाद उन्हें आर्थिक रूप से संभलने में मदद मिलेगी। बिहार जैसे राज्य में, जहां हर साल बाढ़ और मौसम की अनिश्चितता खेती को प्रभावित करती है, यह योजना किसानों के लिए काफी अहम साबित हो सकती है।
अब किसानों की नजर इस बात पर रहेगी कि बिहार में योजना के तहत कौन-कौन सी फसलें और कौन-कौन से जिले अधिसूचित किए जाते हैं, आवेदन की प्रक्रिया क्या होगी और बीमा कराने की अंतिम तारीख क्या तय की जाती है। किसानों को सलाह दी जाएगी कि वे आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद अपने क्षेत्र और फसल से जुड़ी शर्तों की जानकारी जरूर लें।
बिहार सरकार के इस फैसले से खेती में प्राकृतिक आपदा के जोखिम को कम करने की कोशिश की गई है। बाढ़ से फसल बर्बाद होने पर किसान को पूरी तरह अपनी जेब से नुकसान उठाने के बजाय बीमा सुरक्षा का सहारा मिलेगा। ऐसे में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना बिहार के लाखों किसानों के लिए खेती में आर्थिक सुरक्षा का नया विकल्प बन सकती है।










