DGP-SP से खतरा बताकर ली सुरक्षा, अब 68.60 लाख भरेंगे कारोबारी: पालमपुर के निशांत शर्मा को पुलिस का 15 दिन का नोटिस

पालमपुर के कारोबारी निशांत शर्मा की सुरक्षा पर खर्च 68.60 लाख रुपये वसूले जाएंगे। पुलिस ने 15 दिन में रकम जमा करने का नोटिस जारी किया है।
DGP-SP से खतरा बताकर ली सुरक्षा, अब 68.60 लाख भरेंगे कारोबारी: पालमपुर के निशांत शर्मा को पुलिस का 15 दिन का नोटिस
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हिमाचल प्रदेश के पालमपुर के कारोबारी निशांत कुमार शर्मा को अपनी और परिवार की सुरक्षा के लिए पुलिस की मदद लेना अब काफी महंगा पड़ने वाला है। हिमाचल प्रदेश पुलिस ने उनकी सुरक्षा पर हुए 68 लाख 60 हजार 502 रुपये के खर्च की वसूली के लिए नोटिस जारी किया है। पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी नोटिस में निशांत शर्मा को 15 दिन के भीतर यह राशि सरकारी खाते में जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। यह सुरक्षा उन्हें और उनके परिवार को नवंबर 2023 से उपलब्ध कराई जा रही थी।

पुलिस के मुताबिक, निशांत शर्मा और उनके परिवार की सुरक्षा में अलग-अलग समय पर हिमाचल पुलिस की विभिन्न इकाइयों के जवान तैनात किए गए थे। करीब पौने तीन साल तक चली इस सुरक्षा व्यवस्था में पुलिस बल की तैनाती पर कुल 68,60,502 रुपये खर्च हुए। अब संयुक्त सुरक्षा समीक्षा समिति के फैसले के आधार पर पुलिस ने यह खर्च निशांत शर्मा से वसूलने की प्रक्रिया शुरू की है।

पुलिस मुख्यालय की ओर से 25 अगस्त 2026 को जारी नोटिस में कहा गया है कि सुरक्षा पर खर्च हुई रकम को सरकारी खाते में जमा कराया जाए। निशांत शर्मा को इसके लिए 15 दिनों का समय दिया गया है। नोटिस की प्रतियां गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, राज्य सीआईडी के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, कांगड़ा के पुलिस अधीक्षक और सकोह स्थित रिजर्व बटालियन के कमांडेंट को भी भेजी गई हैं।

दरअसल, निशांत शर्मा की सुरक्षा का मामला वर्ष 2023 में उस समय सुर्खियों में आया था, जब उन्होंने अपनी और अपने परिवार की जान को खतरा बताते हुए हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट को ईमेल भेजा था। उन्होंने आरोप लगाया था कि उन्हें कुछ प्रभावशाली लोगों से खतरा है। इस शिकायत में पुलिस के शीर्ष अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस से स्थिति रिपोर्ट मांगी थी।

शिकायत के बाद 16 नवंबर 2023 को मैक्लोडगंज पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके बाद निशांत शर्मा और उनके परिवार की सुरक्षा को लेकर पुलिस ने व्यवस्था की। खतरे के आकलन के आधार पर उनके साथ सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई। अलग-अलग समय पर पुलिस की विभिन्न इकाइयों से जवान उनकी सुरक्षा में लगाए जाते रहे। यही सुरक्षा व्यवस्था बाद में करीब तीन साल तक चलती रही।

इस पूरे विवाद में हिमाचल प्रदेश के तत्कालीन पुलिस महानिदेशक संजय कुंडू और कांगड़ा की तत्कालीन पुलिस अधीक्षक शालिनी अग्निहोत्री का नाम भी सामने आया था। दिसंबर 2023 में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए दोनों अधिकारियों को अन्य पदों पर स्थानांतरित करने के निर्देश दिए थे। हाईकोर्ट का कहना था कि जांच को प्रभावित होने से बचाने के लिए दोनों अधिकारियों को ऐसी जिम्मेदारी दी जाए, जहां वे जांच पर प्रभाव न डाल सकें।

हालांकि बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। जनवरी 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने डीजीपी को पद से हटाने संबंधी हाईकोर्ट के निर्देश को अलग कर दिया। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को आईजी स्तर के अधिकारियों की एसआईटी गठित करने और शिकायतकर्ता तथा उसके परिवार को खतरे के आकलन के आधार पर पर्याप्त सुरक्षा जारी रखने का निर्देश दिया था।

अब इस पूरे मामले में नया मोड़ संयुक्त सुरक्षा समीक्षा समिति के फैसले से आया है। 5 अगस्त 2026 को अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) की अध्यक्षता में समिति की बैठक हुई। इसमें निशांत शर्मा और उनके परिवार को दी गई सुरक्षा तथा उस पर हुए सरकारी खर्च की समीक्षा की गई। समिति ने निर्णय लिया कि सुरक्षा पर राज्य सरकार और पुलिस की ओर से खर्च की गई रकम निशांत शर्मा से वसूल की जाएगी। इसके बाद पुलिस मुख्यालय ने खर्च का पूरा हिसाब जुटाकर वसूली का नोटिस जारी किया।

पुलिस ने सुरक्षा पर हुए खर्च को अलग-अलग इकाइयों के हिसाब से जोड़ा है। कांगड़ा पुलिस की ओर से उपलब्ध कराए गए विवरण के अनुसार एक अवधि में सुरक्षा पर 37 लाख 96 हजार 589 रुपये खर्च हुए। वहीं दूसरी अवधि में सकोह स्थित रिजर्व बटालियन की ओर से 30 लाख 63 हजार 913 रुपये खर्च किए गए। दोनों रकम को जोड़ने पर कुल खर्च 68 लाख 60 हजार 502 रुपये होता है।

इस तरह करीब 68.60 लाख रुपये की पूरी राशि अब निशांत शर्मा से वसूली जानी है। पुलिस मुख्यालय ने नोटिस में यह भी स्पष्ट किया है कि यह खर्च सार्वजनिक धन से किया गया था। इसलिए संयुक्त सुरक्षा समीक्षा समिति ने इसकी भरपाई संबंधित व्यक्ति से कराने का फैसला लिया है।

निशांत शर्मा और उनके परिवार को 16 नवंबर 2023 से पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराई गई थी। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था में समय-समय पर बदलाव भी होता रहा और अलग-अलग पुलिस इकाइयों के जवानों को तैनात किया गया। सुरक्षा की अवधि लंबी होने के कारण जवानों की तैनाती से जुड़ा खर्च भी लगातार बढ़ता गया। अब पुलिस ने सभी संबंधित इकाइयों से खर्च का विवरण लेकर अंतिम राशि निर्धारित की है।

इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि सुरक्षा व्यवस्था सामान्य वीआईपी सुरक्षा की तरह केवल कुछ दिनों के लिए नहीं थी। कारोबारी और उनके परिवार ने खतरे की आशंका जताई थी, जिसके बाद सुरक्षा उपलब्ध कराई गई और यह व्यवस्था लंबे समय तक जारी रही। इसी दौरान पुलिस बल की तैनाती पर लाखों रुपये खर्च हुए। अब सुरक्षा समीक्षा समिति ने इस खर्च को वापस लेने का फैसला किया है।

निशांत शर्मा का मामला हिमाचल प्रदेश में पुलिस सुरक्षा और उसके खर्च को लेकर भी चर्चा में है। आम तौर पर किसी व्यक्ति को सुरक्षा उपलब्ध कराने से पहले खतरे का आकलन किया जाता है। खतरा वास्तविक और गंभीर पाए जाने पर पुलिस सुरक्षा देने की व्यवस्था होती है। लेकिन जब सुरक्षा लंबे समय तक जारी रहती है तो उस पर होने वाले सरकारी खर्च की समीक्षा भी की जाती है। इस मामले में भी संयुक्त सुरक्षा समीक्षा समिति ने इसी प्रक्रिया के तहत सुरक्षा और खर्च की समीक्षा की।

वर्ष 2023 में सामने आए विवाद के दौरान निशांत शर्मा ने आरोप लगाया था कि उन्हें और उनके परिवार को खतरा है। हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में उनकी ओर से भेजे गए ईमेल में जान के खतरे का उल्लेख किया गया था। उन्होंने खुद को पालमपुर के एक होटल व्यवसाय से जुड़े परिवार का सदस्य बताया था और कुछ लोगों पर दबाव और धमकी के आरोप लगाए थे। हालांकि मामले से जुड़े आरोपों और निष्कर्षों को अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाओं में देखा गया है।

इस विवाद में पुलिस अधिकारियों को लेकर भी गंभीर आरोप और कानूनी कार्रवाई हुई थी। दिसंबर 2023 में हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद मामला देशभर में चर्चा में आया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद जांच और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अलग दिशा तय हुई। जुलाई 2026 में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने इस पुराने विवाद से जुड़े मामले में भी फैसला सुनाया था।

अब अगस्त 2026 में पुलिस की ओर से 68.60 लाख रुपये की वसूली का नोटिस जारी होने के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। खास बात यह है कि सुरक्षा देने के लगभग तीन साल बाद पुलिस ने अब तक हुए खर्च का हिसाब तैयार किया और उसे वसूलने की प्रक्रिया शुरू की है। निशांत शर्मा को नोटिस मिलने के बाद अब 15 दिनों के भीतर राशि जमा करने या इस संबंध में कोई कानूनी कदम उठाने की स्थिति बन सकती है।

पुलिस मुख्यालय ने खर्च की गणना करते समय सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों से संबंधित इकाइयों से आधिकारिक विवरण मंगवाया था। राज्य सीआईडी के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ने संबंधित इकाइयों से यह जानकारी जुटाई। इसके बाद कांगड़ा पुलिस और सकोह रिजर्व बटालियन से मिले आंकड़ों के आधार पर कुल राशि तय की गई। इस प्रक्रिया के बाद ही 68,60,502 रुपये की वसूली का नोटिस जारी किया गया है।

फिलहाल पुलिस के नोटिस के बाद सभी की नजर इस बात पर है कि निशांत शर्मा इस राशि को निर्धारित 15 दिन की अवधि में जमा करते हैं या इस फैसले को किसी कानूनी मंच पर चुनौती देते हैं। पुलिस ने नोटिस के जरिए भुगतान की समय सीमा स्पष्ट कर दी है। यह मामला आगे सुरक्षा व्यवस्था के खर्च और उससे जुड़ी सरकारी नीति को लेकर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कुल मिलाकर पालमपुर के कारोबारी निशांत शर्मा की सुरक्षा का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। वर्ष 2023 में खतरे की शिकायत और पुलिस सुरक्षा से शुरू हुआ मामला अब सरकारी खर्च की वसूली तक पहुंच गया है। हिमाचल पुलिस के अनुसार उनके और परिवार की सुरक्षा पर 68 लाख 60 हजार 502 रुपये खर्च हुए हैं और संयुक्त सुरक्षा समीक्षा समिति के निर्णय के बाद अब यही रकम कारोबारी से वसूल की जाएगी। पुलिस ने 15 दिन के भीतर भुगतान करने का नोटिस दिया है।

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