बिहार विधानसभा के बजट सत्र में पप्पू यादव की गिरफ्तारी को लेकर सियासी माहौल गरमा गया। कांग्रेस विधायकों ने पोर्टिको में प्रदर्शन किया, सरकार पर राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप लगाया और NEET छात्रा की मौत का मुद्दा भी उठाया।
Patna: बिहार विधानसभा के बजट सत्र के पांचवें दिन सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही राजनीतिक माहौल बेहद गर्म नजर आया। पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव की गिरफ्तारी को लेकर कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा पोर्टिको में जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान नारेबाजी, तख्तियां और प्रतीकात्मक विरोध ने पूरे परिसर का माहौल तनावपूर्ण बना दिया। कांग्रेस का आरोप है कि पप्पू यादव की गिरफ्तारी कानून के तहत नहीं बल्कि राजनीतिक बदले की भावना से की गई है।
टी-शर्ट के जरिए दिया गया राजनीतिक संदेश
कांग्रेस विधायकों का प्रदर्शन सिर्फ नारेबाजी तक सीमित नहीं रहा। चनपटिया से कांग्रेस विधायक अभिषेक रंजन खास अंदाज में सामने आए। वे एक टी-शर्ट पहनकर विधानसभा पहुंचे, जिस पर साफ शब्दों में लिखा था, “आज जेल होई, कल बेल होई, परसो से वही खेल होई”। इस संदेश के जरिए कांग्रेस ने यह बताने की कोशिश की कि पप्पू यादव की गिरफ्तारी अस्थायी है और सच जल्द सामने आएगा। विधायक अभिषेक रंजन ने कहा कि सत्ता के दबाव में विपक्षी नेताओं को डराने की कोशिश की जा रही है।
पप्पू यादव गिरफ्तारी पर कांग्रेस का आरोप
कांग्रेस विधायकों का कहना है कि पप्पू यादव हमेशा जनता की आवाज उठाते रहे हैं। गरीबों, छात्रों और हाशिये पर खड़े लोगों के मुद्दों को उठाने की वजह से उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि बिहार में असहमति को दबाने की राजनीति चल रही है। जो भी सरकार से सवाल पूछता है, उसे किसी न किसी मामले में फंसाने की कोशिश होती है। पप्पू यादव की गिरफ्तारी को इसी कड़ी का हिस्सा बताया गया।
NEET छात्रा की मौत का मुद्दा उठा
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस विधायकों ने NEET छात्रा की मौत का मामला भी जोरशोर से उठाया। उनका आरोप है कि सरकार इस संवेदनशील मामले में गंभीरता नहीं दिखा रही है। कांग्रेस का कहना है कि एक छात्रा की मौत केवल आंकड़ा बनकर रह गई है। न तो जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई हुई है और न ही पीड़ित परिवार को न्याय का भरोसा मिला है। इसी वजह से कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
विधानसभा पोर्टिको में तनावपूर्ण स्थिति

लगातार नारेबाजी की वजह से विधानसभा पोर्टिको में कुछ देर के लिए स्थिति तनावपूर्ण हो गई। सुरक्षा कर्मी सतर्क नजर आए। हालांकि स्थिति नियंत्रण में रही, लेकिन साफ दिख रहा था कि विपक्ष का आक्रोश काफी गहरा है। कांग्रेस विधायकों ने साफ संकेत दिया कि यह मुद्दा सिर्फ बाहर ही नहीं, बल्कि सदन के अंदर भी पूरी ताकत से उठाया जाएगा।
‘लोकतंत्र नहीं, राजतंत्र चल रहा है’ का आरोप
कांग्रेस विधायक कमरुल होदा ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बिहार में लोकतंत्र कमजोर हो गया है और राजतंत्र जैसी स्थिति बनती जा रही है। उनका आरोप था कि सरकार आलोचना सहन नहीं कर पा रही है। जो भी नेता जनता के हक में बोलता है, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाती है। उन्होंने कहा कि पप्पू यादव की गिरफ्तारी लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा हमला है।
बजट सत्र में अहम वित्तीय एजेंडा
इस राजनीतिक हंगामे के बीच विधानसभा में बजट 2026–27 पर चर्चा की शुरुआत होनी है। इसके साथ ही वित्तीय वर्ष 2025–26 का तीसरा सप्लीमेंट्री बजट भी सदन के पटल पर रखा जाना है। सरकार के लिए यह सत्र बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि कई वित्तीय प्रस्तावों को पास कराना है। विपक्ष का कहना है कि वह बजट पर भी सरकार से कड़े सवाल पूछेगा।
पहले भी गरमाया था सदन
यह पहली बार नहीं है जब बजट सत्र के दौरान बिहार विधानसभा में ऐसा माहौल बना हो। इससे पहले चौथे दिन प्रभारी स्वास्थ्य मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी के बयान को लेकर सरकार को आलोचना का सामना करना पड़ा था। विपक्ष ने उस बयान को असंवेदनशील बताते हुए सरकार को घेरा था। तीसरे दिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के बीच तीखी बहस ने भी सुर्खियां बटोरी थीं।
नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव की बहस
राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तेजस्वी यादव पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि वे तेजस्वी की राजनीति को अच्छी तरह समझते हैं। इस बयान पर सदन में काफी देर तक शोरगुल रहा। जवाब में तेजस्वी यादव मुस्कुराते हुए नजर आए, जिससे माहौल और ज्यादा गर्म हो गया था। इस बहस ने यह साफ कर दिया था कि सत्र के बाकी दिन भी टकराव से भरे रहेंगे।
विपक्ष का आक्रामक रुख
पप्पू यादव की गिरफ्तारी और NEET छात्रा की मौत जैसे मुद्दों ने विपक्ष को सरकार के खिलाफ एकजुट कर दिया है। कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दल सरकार को लगातार घेरने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह सिर्फ राजनीतिक लड़ाई नहीं, बल्कि लोकतंत्र और आम जनता के अधिकारों की लड़ाई है। विपक्ष ने साफ संकेत दिया है कि वह पीछे हटने वाला नहीं है।











