बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में प्रसूता शारदा नायक की मौत के चार दिन बाद प्रशासन और परिजनों के बीच समझौता हो गया। 25 लाख रुपये सहायता, नौकरी और 50 लाख मुआवजे के प्रस्ताव के बाद धरना समाप्त कर पोस्टमॉर्टम की सहमति बनी।
बीकानेर: राजस्थान के बीकानेर स्थित पीबीएम अस्पताल में प्रसव के दौरान हुई एक प्रसूता की मौत के बाद पिछले चार दिनों से जारी विवाद और विरोध प्रदर्शन फिलहाल समाप्त हो गया है। प्रशासन और मृतका के परिजनों के बीच बातचीत के बाद सहमति बन गई है, जिसके तहत आर्थिक सहायता, नौकरी और निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया गया है। समझौते के बाद परिजनों ने धरना समाप्त कर दिया और अब मृतका का पोस्टमॉर्टम मेडिकल बोर्ड की निगरानी में कराया जाएगा।
यह मामला पिछले कई दिनों से पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ था, क्योंकि अस्पताल में भर्ती कई महिलाओं की तबीयत सिजेरियन डिलीवरी के बाद अचानक बिगड़ गई थी। इनमें दो महिलाओं की मौत हो चुकी है, जबकि अन्य मरीजों का उपचार जारी है।
आर्थिक सहायता और नौकरी के आश्वासन के बाद खत्म हुआ गतिरोध
मृतका शारदा नायक के परिजनों और प्रशासन के बीच हुई बातचीत में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बनी। प्रशासन ने सामाजिक सहयोग और जनसहभागिता के माध्यम से 25 लाख रुपये की तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। इसके अलावा राज्य सरकार को 50 लाख रुपये की अतिरिक्त आर्थिक सहायता मंजूर करने के लिए प्रस्ताव भेजने पर भी सहमति बनी है।
परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने परिवार के एक सदस्य को संविदा के आधार पर रोजगार उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया है। हालांकि समझौते से संबंधित आधिकारिक लिखित दस्तावेज अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
मौत के चार दिन बाद होगा पोस्टमॉर्टम
21 जून को हुई शारदा नायक की मौत के बाद परिजनों ने शव लेने से इनकार कर दिया था और अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था। अब समझौते के बाद मृतका के पति की सहमति मिलने पर मेडिकल बोर्ड की निगरानी में पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
चार दिन तक शव अस्पताल की मॉर्च्युरी में रखा गया था। पोस्टमॉर्टम के बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया संपन्न होगी। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मामले की सच्चाई सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
लापरवाही साबित होने पर होगी कानूनी कार्रवाई
समझौते के दौरान प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यदि परिजन औपचारिक शिकायत दर्ज कराते हैं, तो पुलिस पूरे मामले की जांच करेगी। जांच के दौरान यदि किसी डॉक्टर, मेडिकल स्टाफ या अन्य संबंधित कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह आश्वासन परिजनों की प्रमुख मांगों में शामिल था। परिवार लगातार दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और न्याय की मांग कर रहा था। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से की जाएगी।
विरोध प्रदर्शन के दौरान बढ़ा था तनाव
मामले ने उस समय गंभीर रूप ले लिया जब मृतका के पति ने अस्पताल की मॉर्च्युरी के बाहर खुद पर पेट्रोल छिड़ककर आत्मदाह का प्रयास किया। हालांकि वहां मौजूद लोगों ने समय रहते हस्तक्षेप कर उन्हें ऐसा करने से रोक लिया।
इस घटना के बाद प्रशासन और पुलिस ने स्थिति को संभालने के लिए अतिरिक्त प्रयास किए। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने भी मामले के शांतिपूर्ण समाधान में भूमिका निभाई।
कौन थीं शारदा नायक?
शारदा नायक बीकानेर जिले के श्रीरामसर गांव की निवासी थीं। उनके पति मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति सीमित होने के कारण मुआवजा और रोजगार की मांग आंदोलन का प्रमुख हिस्सा थी।
शारदा की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए और मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की थी। अब प्रशासन के आश्वासन के बाद परिवार ने आंदोलन समाप्त करने का निर्णय लिया है।
अस्पताल में एक और प्रसूता की हो चुकी है मौत
शारदा नायक की मौत से पहले 19 जून को एक अन्य प्रसूता प्रीति नायक की भी मृत्यु हो चुकी थी। दोनों मामलों के बाद अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली और चिकित्सा प्रबंधन को लेकर सवाल उठने लगे थे।
प्रीति नायक के परिजनों ने पोस्टमॉर्टम के बाद अंतिम संस्कार कर दिया था, जबकि शारदा के परिजन लंबे समय तक विरोध प्रदर्शन करते रहे। इन दोनों घटनाओं ने राज्य के स्वास्थ्य विभाग का ध्यान इस मामले की ओर आकर्षित किया।
सिजेरियन डिलीवरी के बाद कई महिलाओं की हालत बिगड़ी
पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब पीबीएम अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद कई महिलाओं की तबीयत अचानक खराब होने लगी। रिपोर्ट्स के अनुसार, छह महिलाओं में गंभीर किडनी संबंधी समस्याएं सामने आईं और कई को डायलिसिस तक करानी पड़ी।
स्थिति बिगड़ने पर मरीजों को आईसीयू में भर्ती किया गया। कुछ महिलाओं की हालत में सुधार होने के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई, जबकि कुछ अभी भी अस्पताल में उपचाराधीन हैं। दो मरीजों की मौत के बाद मामले ने गंभीर रूप ले लिया।
ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन पर जांच का फोकस
प्रारंभिक जांच में यह संभावना जताई गई है कि सिजेरियन डिलीवरी के बाद लगाए गए कुछ इंजेक्शनों की गुणवत्ता या उपयोग से संबंधित सवाल हो सकते हैं। अस्पताल प्रशासन के अनुसार प्रसूताओं को बाजार से उपलब्ध ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन लगाए गए थे, जिसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी।
हालांकि अभी तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा गया है और जांच जारी है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेगा।
राज्य सरकार ने गठित की दो जांच समितियां
मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने दो अलग-अलग जांच समितियों का गठन किया है। एक विशेषज्ञ टीम ने अस्पताल का दौरा कर प्रारंभिक जांच पूरी कर ली है, जबकि दूसरी समिति दवाओं और चिकित्सा प्रक्रियाओं से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है।
जांच समितियों की अंतिम रिपोर्ट के आधार पर ही सरकार आगे की कार्रवाई और जिम्मेदारी तय करेगी। स्वास्थ्य विभाग ने भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं सबकी नजरें
फिलहाल पीबीएम अस्पताल प्रशासन का दावा है कि मरीजों के इलाज में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती गई और सभी को निर्धारित चिकित्सा प्रोटोकॉल के अनुसार उपचार दिया गया। दूसरी ओर परिजन और सामाजिक संगठन जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
ऐसे में अब सभी की नजरें जांच समितियों की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं। यह रिपोर्ट न केवल मौतों के वास्तविक कारणों का खुलासा करेगी, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।











