भारत ने संयुक्त राष्ट्र में शांति सैनिकों पर हमले करने वालों के खिलाफ जवाबदेही तय करने की मांग उठाई है। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि आधुनिक तकनीक से जुड़े खतरों के बीच सैनिकों की सुरक्षा जरूरी है। भारत अब तक 50 मिशनों में तीन लाख से ज्यादा सैनिक भेज चुका है।
संयुक्त राष्ट्र: भारत ने दुनिया के अलग-अलग संघर्ष वाले इलाकों में तैनात संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों की सुरक्षा को लेकर बड़ा बयान दिया है। गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र में हुई बैठक में भारत ने कहा कि शांति सैनिकों पर हमला करने वालों को जवाबदेह ठहराना जरूरी है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के सैन्य सलाहकार कर्नल तरुणेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि आज शांति सैनिकों को पहले से कहीं ज्यादा जटिल और तकनीक आधारित खतरों का सामना करना पड़ रहा है।
शांति सैनिकों की सुरक्षा को लेकर भारत ने संयुक्त राष्ट्र में क्या कहा?
संयुक्त राष्ट्र में भारत ने शांति अभियानों पर होने वाली सालाना बैठक के दौरान सैनिकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। भारत की ओर से बैठक में शामिल कर्नल तरुणेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि जिन इलाकों में युद्ध या हिंसा चल रही है, वहां शांति सैनिकों को अपनी जान जोखिम में डालकर काम करना पड़ता है। ऐसे में उनकी सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए।
कर्नल सिंह ने बताया कि कई देशों में संयुक्त राष्ट्र के सैनिक ऐसे इलाकों में तैनात हैं, जहां हथियारबंद गुटों के बीच लगातार संघर्ष होता रहता है। वहां कब हालात बिगड़ जाएं, इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल होता है। पहले सैनिकों के सामने बंदूक और दूसरे हथियारों का खतरा ज्यादा रहता था, लेकिन अब हमलों में नई तकनीक का इस्तेमाल भी होने लगा है। इसलिए सुरक्षा के पुराने इंतजामों के भरोसे नहीं रहा जा सकता।
भारत ने इस बात पर भी जोर दिया कि शांति सैनिकों पर हमला करने वालों को सजा मिलनी चाहिए। किसी सैनिक की हत्या या उस पर हमला होने के बाद मामला केवल जांच तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी होनी चाहिए। भारत के मुताबिक, इस काम में संयुक्त राष्ट्र और उन देशों की जिम्मेदारी बनती है, जहां शांति अभियान चलाए जा रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्र के मिशनों में तीन लाख से ज्यादा भारतीय सैनिक कर चुके हैं सेवा
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संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों से भारत का रिश्ता सात दशक से भी ज्यादा पुराना है। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में शांति बनाए रखने के लिए भारत लंबे समय से अपने सैनिक भेज रहा है। अब तक 50 शांति अभियानों में तीन लाख से ज्यादा भारतीय सैनिक अपनी सेवाएं दे चुके हैं। लेकिन इन अभियानों के दौरान कई भारतीय जवानों को अपनी जान भी गंवानी पड़ी है। संयुक्त राष्ट्र के मिशनों में ड्यूटी करते हुए अब तक 184 भारतीय शांति सैनिक शहीद हो चुके हैं।
कर्नल तरुणेंद्र प्रताप सिंह ने इन सैनिकों को याद करते हुए कहा कि शांति अभियानों में भारत का योगदान केवल सैनिक भेजने तक सीमित नहीं है। भारतीय जवानों ने मुश्किल परिस्थितियों में अपनी जिम्मेदारी निभाई है और कई सैनिकों ने इसके लिए जान तक दी है।
संयुक्त राष्ट्र के शांति सैनिकों को 'ब्लू हेलमेट' के नाम से भी जाना जाता है। इनकी पहचान नीले रंग की टोपी और हेलमेट से होती है। इन सैनिकों का काम संघर्ष वाले इलाकों में शांति समझौतों की निगरानी करना, आम लोगों की सुरक्षा में मदद देना और जरूरत पड़ने पर स्थानीय प्रशासन का सहयोग करना होता है।
क्या है संयुक्त राष्ट्र का प्रस्ताव 2589, जिस पर भारत ने दिया जोर?
संयुक्त राष्ट्र में शांति सैनिकों की सुरक्षा पर चर्चा हुई तो भारत ने सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2589 का भी जिक्र किया। यह प्रस्ताव 18 अगस्त 2021 को पास हुआ था। उस वक्त सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता भारत कर रहा था। प्रस्ताव पर सभी सदस्य देशों ने सहमति जताई थी।
दरअसल, कई बार शांति मिशन पर गए सैनिकों को हिंसा का सामना करना पड़ता है। कहीं उन पर हमला होता है, तो कहीं हथियारबंद लोग उन्हें अगवा कर लेते हैं। कुछ मामलों में सैनिकों की जान भी चली जाती है। प्रस्ताव 2589 में इसी तरह की घटनाओं पर कार्रवाई की बात कही गई है। जिन देशों में ऐसी घटनाएं होती हैं, उनसे अपेक्षा की गई है कि वे मामलों की जांच कराएं और हमला करने वालों को अदालत तक पहुंचाएं।
भारत ने बैठक में कहा कि शांति सैनिकों पर हमला करने वाले अगर सजा से बच जाते हैं, तो इससे गलत संदेश जाता है। सैनिकों को सुरक्षित रखने के साथ यह भी जरूरी है कि उनके खिलाफ अपराध करने वालों पर मुकदमा चले और कानून के मुताबिक कार्रवाई हो।
शांति अभियानों में क्या बदलाव चाहता है भारत?
भारत ने संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों के काम करने के तरीके में भी बदलाव की जरूरत बताई है। कर्नल सिंह ने कहा कि किसी देश में सैनिक भेजने से पहले यह साफ होना चाहिए कि उन्हें वहां कौन-सा काम करना है और कितने समय तक करना है। इसके अलावा सैनिकों को जरूरत के हिसाब से हथियार, सुरक्षा उपकरण, नई तकनीक और दूसरी सुविधाएं मिलनी चाहिए। बिना पूरे इंतजाम के सैनिकों को खतरनाक इलाकों में भेजना ठीक नहीं होगा।
भारत ने कहा कि जो देश इन अभियानों में अपने सैनिक और पुलिसकर्मी भेजते हैं, उनकी बात भी सुनी जानी चाहिए। मिशन से जुड़े बड़े फैसले लेते समय उनकी राय को महत्व मिलना चाहिए। भारत ने शांति अभियानों में नई तकनीक और सौर ऊर्जा जैसे साधनों का इस्तेमाल बढ़ाने की बात भी कही। साथ ही पुराने अभियानों की समय-समय पर समीक्षा करने पर जोर दिया, ताकि पता चल सके कि उनका काम अभी भी जरूरी है या नहीं।










