पैराग्वे में यूएनो बैंक के वित्तीय संकट ने राष्ट्रपति सैंटियागो पेना की सरकार गिरा दी है। संसद ने महाभियोग के जरिए उन्हें पद से हटाया और बाद में नजरबंद कर दिया गया। करीब 30 लाख बैंक ग्राहकों की बचत फंसी हुई है।
असुनसियोन: दक्षिण अमेरिकी देश पैराग्वे में एक बड़े बैंक के डूबने से शुरू हुआ विवाद राष्ट्रपति की कुर्सी तक पहुंच गया। शुक्रवार, 6 नवंबर को संसद ने सैंटियागो पेना को महाभियोग के जरिए पद से हटा दिया। इसके कुछ ही मिनट बाद उन्हें घर में नजरबंद कर दिया गया। उन पर सरकारी धन के गलत इस्तेमाल और बैंक को अनुचित फायदा पहुंचाने जैसे गंभीर आरोप हैं। हालांकि, पेना इन आरोपों से इनकार कर चुके हैं।
महाभियोग में अपनी ही पार्टी के सांसदों ने छोड़ा साथ
पैराग्वे की संसद में शुक्रवार को सैंटियागो पेना के खिलाफ महाभियोग पर मतदान हुआ। सीनेट के 45 सदस्यों में से 44 ने उन्हें हटाने के पक्ष में वोट दिया, जबकि एक सांसद अनुपस्थित रहा। खास बात यह रही कि उनकी अपनी कोलोराडो पार्टी के सांसदों ने भी उनका साथ नहीं दिया। पेना ने गुरुवार को राष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने की पेशकश की थी।
मगर सांसदों ने इस्तीफे पर फैसला करने के बजाय महाभियोग की प्रक्रिया आगे बढ़ाई। इस फैसले के बाद पेना पूर्व राष्ट्रपति को मिलने वाली आजीवन सीनेट सदस्यता और उससे जुड़ी कानूनी सुरक्षा भी खो बैठे। उनकी जगह उपराष्ट्रपति पेद्रो अलियाना ने नए राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली है। वह अगस्त 2028 तक बचे हुए कार्यकाल की जिम्मेदारी संभालेंगे।
यूएनो बैंक बंद होने से क्यों बिगड़े हालात?
इस पूरे राजनीतिक संकट की शुरुआत डिजिटल बैंक यूएनो (Ueno Bank) से हुई। तेजी से बढ़ते इस बैंक के करीब 30 लाख ग्राहक थे। इनमें बड़ी संख्या उन लोगों की थी, जिन्होंने पहली बार बैंक में खाता खुलवाया था। बैंक की वित्तीय स्थिति बिगड़ने पर पैराग्वे के केंद्रीय बैंक ने 3 नवंबर को इसका नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया। जांच में बैंक के पास जरूरी पूंजी निर्धारित न्यूनतम स्तर के आधे से भी कम पाई गई थी।
इस कार्रवाई के बाद ग्राहकों के खातों से पैसे निकालने और लेनदेन करने पर रोक लग गई। कई लोगों की जीवनभर की बचत बैंक में फंस गई। पेंशन पाने वाले बुजुर्गों को भी परेशानी उठानी पड़ी। राजधानी असुनसियोन समेत कई शहरों में लोग सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से अपनी जमा रकम वापस दिलाने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की।
पेना पर सरकारी पैसे के गलत इस्तेमाल का आरोप
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महाभियोग के दौरान सांसदों ने आरोप लगाया कि पेना ने अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल करके यूएनो बैंक में सरकारी धन जमा करवाने में मदद की। आरोपों के मुताबिक, सरकारी पेंशन फंड की करीब 355 मिलियन डॉलर की रकम बैंक में जमा थी। सांसदों का दावा है कि यह निवेश कानूनी सीमा से अधिक था।
बैंक की मालिकाना कंपनी ग्रुपो वाजक्वेज में पेना की भी हिस्सेदारी रह चुकी है। उन्होंने पिछले साल अपनी हिस्सेदारी बेच दी थी। इसी पुराने कारोबारी संबंध को लेकर हितों के टकराव के सवाल उठ रहे हैं। सांसदों का आरोप है कि बैंक से जुड़ी कंपनियों को दिए गए संदिग्ध कर्ज और वित्तीय गड़बड़ियों पर नियामक अधिकारियों ने समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की।
पेना का कहना है कि उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया। उन्होंने बैंक संकट की जिम्मेदारी तय करने और प्रभावित लोगों को राहत दिलाने की बात भी कही थी।
पद से हटते ही पेना को क्यों किया गया नजरबंद?
महाभियोग के बाद अभियोजकों ने पेना के खिलाफ आपराधिक जांच आगे बढ़ाई। उन पर विश्वासघात, प्रभाव का गलत इस्तेमाल और सार्वजनिक पद का निजी फायदे के लिए उपयोग करने जैसे आरोपों की जांच चल रही है। अभियोजक सिल्विया मार्गरीटा गोंजालेज वेस्टर के मुताबिक, शनिवार को पेना से पूछताछ होनी है। जांच पूरी होने और आगे की कानूनी प्रक्रिया को देखते हुए उन्हें उनके घर में नजरबंद रखा गया है।
पूर्व केंद्रीय बैंक प्रमुख कार्लोस कार्वालो के खिलाफ भी गिरफ्तारी का आदेश जारी किया गया है। बैंक के कई अधिकारियों पर अलग से जांच चल रही है। हालांकि, नजरबंद किए जाने का मतलब यह नहीं है कि पेना आपराधिक मामले में दोषी साबित हो गए हैं। उन पर लगे आरोपों का फैसला कानूनी प्रक्रिया के बाद होगा।
नए राष्ट्रपति के सामने सबसे बड़ी चुनौती
पेद्रो अलियाना के राष्ट्रपति बनने के बाद सरकार की पहली चुनौती बैंक ग्राहकों का पैसा वापस दिलाना है। उन्होंने प्रभावित लोगों को उनके नुकसान की भरपाई करने का भरोसा दिया है। केंद्रीय बैंक के मुताबिक, जमा बीमा व्यवस्था से लगभग 97 प्रतिशत ग्राहकों की रकम सुरक्षित होने का अनुमान है। कुछ छोटे जमाकर्ताओं को शुरुआती भुगतान मिलना भी शुरू हो गया है।
लेकिन जिन लोगों की बड़ी रकम फंसी है, उनके सामने अभी अनिश्चितता बनी हुई है। बैंक संकट ने देश की वित्तीय व्यवस्था पर लोगों के भरोसे को भी चोट पहुंचाई है।











