'BJP के अच्छे दिन RSS की मेहनत का नतीजा' - शताब्दी समारोह में बोले मोहन भागवत

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने शताब्दी समारोह में कहा कि भाजपा के अच्छे दिन RSS की मेहनत और संगठनात्मक काम का परिणाम हैं। जानें उनके इस बयान का पूरा संदर्भ

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में देशभर में चल रहे कार्यक्रमों की श्रृंखला के तहत रविवार को मुंबई में एक बड़ा आयोजन हुआ, जिसमें राजनीति, समाज और संस्कृति से जुड़े कई प्रतिष्ठित लोग शामिल हुए।

नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की 100वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में देश के विभिन्न राज्यों में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। मुंबई में रविवार को आयोजित कार्यक्रम में बॉलीवुड से जुड़े कई सितारे भी मौजूद रहे। इस अवसर पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने दर्शकों से बातचीत के दौरान कहा कि भाजपा के ‘अच्छे दिन’ आरएसएस की वजह से आए हैं, न कि इसका उल्टा। 

उन्होंने कहा, आरएसएस राम मंदिर आंदोलन के लिए प्रतिबद्ध था और जिन्होंने इसका समर्थन किया, उन्हें इसका लाभ मिला। भागवत ने आगे स्पष्ट किया कि आरएसएस के लिए ‘अच्छे दिन’ स्वयंसेवकों की कड़ी मेहनत और संगठन की विचारधारा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का परिणाम हैं।

BJP को अच्छे दिन RSS से मिले

कार्यक्रम में मोहन भागवत ने स्पष्ट रूप से कहा कि अगर भाजपा के लिए “अच्छे दिन” आए हैं, तो उसका श्रेय RSS को जाता है, न कि इसके उलट। उन्होंने कहा, “RSS राम मंदिर आंदोलन के लिए प्रतिबद्ध था और जिन लोगों ने इस आंदोलन का समर्थन किया, उन्हें राजनीतिक रूप से भी लाभ मिला। भागवत के अनुसार, RSS के लिए “अच्छे दिन” स्वयंसेवकों की दशकों की कड़ी मेहनत, अनुशासन और विचारधारा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का परिणाम हैं। उन्होंने इसे किसी राजनीतिक जीत के बजाय सामाजिक-सांस्कृतिक आंदोलन की सफलता बताया।

संघ में नेतृत्व और जाति के सवाल पर भागवत ने कहा कि सरसंघचालक का पद किसी खास जाति के लिए आरक्षित नहीं है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति या जनजाति से होना कोई बाधा नहीं है और ब्राह्मण होना भी कोई अतिरिक्त योग्यता नहीं मानी जाती। उन्होंने स्वीकार किया कि संघ के शुरुआती वर्षों में ब्राह्मणों की संख्या अधिक थी, लेकिन आज RSS सभी जातियों और समुदायों के लिए समान रूप से काम करता है। उनके अनुसार, संघ का आधार योग्यता, समर्पण और राष्ट्रभाव है, न कि जाति।

नरेंद्र मोदी और RSS पर क्या बोले?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर भागवत ने एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा, “कई लोग कहते हैं कि नरेंद्र मोदी RSS से आए प्रधानमंत्री हैं, लेकिन यह सही नहीं है। उन्होंने कहा कि मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं और उनकी राजनीतिक पहचान भाजपा से जुड़ी है, जो RSS से अलग संगठन है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि भाजपा में कई लोग ऐसे हैं जो RSS के स्वयंसेवक रहे हैं, जैसे अन्य क्षेत्रों में भी संघ के स्वयंसेवक सक्रिय हैं।

देश और समाज पर अपनी बात रखते हुए भागवत ने कहा कि भारत एक प्राचीन सभ्यता है और यदि भारत मजबूत और महान बनेगा, तो पूरी दुनिया को इसका लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि भारत में जन्म लेने वालों का आचरण ऐसा होना चाहिए कि दुनिया के लोग यहां आकर जीवन मूल्य सीखें। उनके अनुसार, एक सशक्त राष्ट्र के लिए एकजुट, अनुशासित और चरित्रवान समाज जरूरी है, जिसमें कोई भी व्यक्ति या समुदाय पीछे न छूटे।

भाषा के मुद्दे पर भागवत ने कहा कि भारत की अपनी पहचान है और अंग्रेजी संघ की कार्यप्रणाली का हिस्सा नहीं बनेगी। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जहां जरूरत हो, वहां अंग्रेजी का उपयोग किया जाता है, लेकिन प्राथमिकता मातृभाषा और हिंदी को दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि RSS किसी भी भाषा का विरोध नहीं करता, लेकिन भारतीय भाषाओं को केंद्र में रखना जरूरी मानता है।

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